राघव ने कहा, तुम... यहाँ क्या कर रही हो? काशी कहती है, खाना बन गया है. माँ ने मुझे तुम्हे बुलाने के लिए भेजा है। "ठीक है चलो! राघव ने उत्तर दिया और वे दोनों खाना खाने की जगह पर जाने लगते है।
तब तक काशी की माँ छाया ने भी सबके लिए खाना लगा दिया था. काशी और राघव भी खाना खाने की जगह पर पहुंच जाते है। छाया कहती है, आ गए राघव बेटा! बैठो और खाना खा लो... जी! राघव ने कहा। सभी खाना खाने लग जाते है.
महारत ने कहा, तुम दोनों यहाँ के तो नहीं लगते हो? और इस काली पहाड़ी के जंगल में क्या कर रहे हो? "सरदार हम दोनों दिव्य गिरी पहाड पर जहाँ रहे है, जिसका रास्ता इस जंगल से होकर जाता है." राघव ने कहा।
"क्या दिव्य गिरी पहाड!" वहाँ जाना खतरे से खाली नहीं है, कुछ भी हो सकता है तुम दोनों के साथ....और यहाँ से तो वह अभी बहुत दूर है, मेरी मानों तो वापिस लौट जाओ। महारत ने कहा।
राघव कहता है, धन्यवाद महारत जी! लेकिन हमारा जाना जरुरी है।
छाया कहती है, रात काफी हो चुकी है अब हम सब को सोना चाहिए. सभी सोने के लिए चले जाते है।
अगले दिन सुबह राघव ने कहा, सरदार जी अब हम चलते है। "रुको राघव! मै तुम्हे भेंट के रूप मे कुछ देना चाहता हूँ" महारत ने कहा। राघव कहता है, नहीं सरदार इसकी कोई जरूरत नहीं है। महारत ने कहा, नहीं तुम यही रुको! मै अभी आया...
थोडी देर मे महारत आता है और राघव को एक खंजर थमाते हुए कहता है, ये तुम्हारे लिए है. वह बताता है कि ये कोई साधारण खंजर नहीं है बल्कि मायावी खंजर है. जिस पर भी तुम इस खंजर से वार करोगे. कुछ समय के लिए उसकी शक्ति काम नहीं करेंगी. वह चाहे कोई जादुई शक्ति हो या फिर कोई तांत्रिक शक्ति जब तक इस खंजर का असर रहेंगा उसकी शक्ति काम नहीं करेंगी, लेकिन इसका इस्तेमाल एक बार ही किया जा सकता है। सिर्फ़ एक बार....
"ये तो बहुत अनमोल खंजर है इसे आप मुझे क्यूँ दे रहे हो. इसे आप रखो. राघव ने कहा। महारत कहता है, ये मै तुम्हे भेंट के रूप मे दे रहा हूँ और वैसे भी आगे बहुत खतरा है तुम्हारे काम आएगा. राघव ने कहा, ठीक है सरदार!
राघव उस मायावी खंजर को रख लेता है और कहता है, सरदार अब हमें चलना चाहिए, सफर बहुत लम्बा रहने वाला है. महारत ने हाँ में सिर हिलाया।
राघव ने कहा, चलो मधु अब चलते है. और वे दोनों जंगल मे आगे बढ जाते है. कुछ दूर जाने के बाद राघव को ऐसा लगता है मानो कोई उनका पीछा कर रहा हो. राघव कहता है, मधु मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे हमारा कोई पीछा कर रहा हो.
मधु चारो और देखती है पर उसे कुछ नजर नहीं आता, राघव ये "जरूर तुम्हरा बहम होगा, चलो चलते है!" मधु ने कहा। कुछ दूर जाने के बाद उन दोनों को एक विशाल सांप दिखाई पडता है जोकि उनकी ओर तेजी से बढ़ रहा था।
"जल्दी भागो यहाँ से... राघव ने चिल्लाते हुए कहा। वे दोनों देखते है कि उस सांप ने एक लडकी का रूप ले लिया है और वह उनके पीछे ही भाग रही है. मधु कहती है, राघव यह तो एक इच्छादारी सांप है. वह लड़की उन दोनों पर जादू करती है. जिसके कारण राघव और मधु एक झटके के साथ जमीन पर जा गिरते है।
जब वे दोनों खडे होते है तो उन्हें अपने सामने वही लडकी दिखती है जिसने विशालकाय सांप से लडकी का रूप धारण कर लिया था. उसने हँसते हुए कहा, "तुम दोनों मुझसे तेज नहीं भाग सकते. और आज तक ऐसा कोई नहीं जो सर्पिका से बचकर जिन्दा गया हो."
"हमने तुम्हारा क्या बिगाडा है जो तुम हमारे पीछे पडी हुई हो. शायद वो तुम ही थी जो हमारा कुछ देर पहले पीछा कर रही थी. राघव ने कहा। सर्पिका कहती है, "वाह! तुम तो बहुत तेज हो. पर तुम दोनों अब यहाँ से आगे जिन्दा तो नहीं जा सकोगे."
मधु कहती है, तुम हमें क्यों मारना चाहती हो... "मैंने काफी दिनों से कुछ अच्छा नहीं खाया है आज तुम दोनों को खाकर अपनी भूख को शांत करुँगी. सर्पिका हँसते हुए कहा।
"मैं तुम्हे फिर बोल रहा हूँ, हमें जाने दो नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा. तुम मुझे लड़ने पर मजबूर कर रही हो. राघव ने गुस्से में कहा।
सर्पिका ज़ोर- ज़ोर से हँसने लग जाती है और कहा, इस पूरे जंगल मे सभी मुझसे डरते है और तुम मुझे मारने की बात कर रहे हो.
सर्पिका उन दोनों पर फिर जादू करती है और राघव और मधु दूर जाकर गिरते है. और राघव की कांस्य की तलवार भी उसके हाथ से छुट जाती है।
सर्पिका ने आगे कहा, अब तो मै तुम दोनों को खाकर ही रहूँगी. तभी सर्पिका अपनी शक्ति से विशालकाय सांप मे बदल जाती है और राघव और मधु के पास जाने लगती है. राघव मधु से कहता है, हमें जल्दी यहाँ से निकलना होगा.
लेकिन तब तक सर्पिका मधु को अपनी पूछ से पकड लेती है. मधु ने डरी हुई आवाज़ में कहा, राघव बचाओ मुझे बचाओ! सर्पिका मधु को खाने वाली होती ही है कि तभी राघव तेजी से सर्पिका की ओर भागता है और मायावी खंजर से उस पर वार कर देता है.
मायावी खंजर के लगते ही सर्पिका विशालकाय सांप से लडकी मे बदल जाती है. और नीचे गिर जाती है. तभी राघव मधु के पास जाता है और उससे पूछता है, "तुम ठीक हो ना," मधु ने कहा, हाँ मै ठीक हूँ.
सर्पिका ने दर्द में चिल्लाते हुए कहा, मै तुम दोनों को नहीं छोडूगी. वह उन पर अपनी शक्तियों से वार करने की कोशिश करती है, पर उसकी शक्ति काम नहीं करती है.
"ये तुमने कैसे खंजर से वार किया है मेरी शक्तियां क्यों काम नहीं कर रही है." सर्पिका ने चिल्लाते हुए कहा। राघव कहता है, मैंने तुम्हे पहले ही चेतावनी दी थी, पर तुमने मेरी बात नहीं मानी, अब तुम्हे जो दर्द हो रहा है ना, इसकी जिम्मेदार तुम खुद हो.
चलो मधु अब हमें चलना चाहिए, अभी कुछ दूर ओर चलना है. मधु कहती है हाँ चलो! ये कहकर दोनों जंगल मे आगे की ओर बढ जाते है, अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये.....