(काम्या कपूर ने बॉयफ़्रेंड बने वेटर को दस लाख देने का वादा किया...उसे काम्या के पापा और दीदी के सामने रिजेक्ट होना था न कि सिलेक्ट)
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काम्या ने कंधे उचकाए—
“जब ज़िंदगी स्क्रिप्ट से बाहर चलने लगे,
तो खुद ही स्क्रिप्ट लिखनी पड़ती है।”
"एक बात पूछूँ आपसे?" समुद्र की लहरों को देखते हुए ऋतिक ने धीरे से कहा।
"हँसते हुए पूछो," काम्या ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।
"तुम्हारे पापा और दीदी आ रहे हैं… लेकिन तुम्हारी माँ?"
काम्या की मुस्कान अचानक फीकी पड़ गई। उसने नजरें झुका लीं।
"मेरी माँ… इस दुनिया में नहीं हैं," उसकी आवाज़ हल्की भर्रा गई, "वो बहुत अच्छी थीं… अगर वो होतीं ना, तो शायद मैं इतनी परेशान नहीं होती… वो मुझे समझती थीं।"
काम्या की आंखों में समुद्र से भी ज्यादा पानी भर गया मां का जिक्र आते ही।
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई। सिर्फ लहरों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
काफी देर तक चुप बैठे रहने से काम्या की आँखें नींद से बोझिल होने लगीं।
ऋतिक ने उसे देखते हुए कहा, "काम्या… बीच पर एक कॉटेज है, चाहो तो वहीं रात बिता लो।"
काम्या ने तुरंत सिर हिला दिया, "नहीं… कपूर ज्वेलर्स की बेटी कहीं भी रात नहीं बिताती।"
ऋतिक ने हल्के तंज में कहा, "तो फिर… जोसफ के साथ जहाँ ठहरती होंगी, उसी होटल चली जाओ।"
काम्या ने उसकी तरफ देखा, इस बार उसकी आँखों में साफ़ी थी, "हम घूमते-फिरते जरूर थे… प्यार भी था… लेकिन मैंने कभी अपनी मर्यादा नहीं लांघी।"
ऋतिक ने थोड़ा हैरानी से पूछा, "मतलब… आज के ज़माने में भी वर्जिन हो.....?"
काम्या ने उसकी बात बीच में ही काट दी, आवाज़ अब ठोस थी, " मैं शादी के बाद ही… अपने पति के साथ रहना चाहती हूँ।"
ऋतिक कुछ पल उसे देखता रहा… जैसे पहली बार उसे सही मायनों में समझ रहा हो।
लहरें अब भी किनारे से टकरा रही थीं—
काम्या ने उसकी तरफ देखा — आंखों में हल्की नाराज़गी और आत्मसम्मान साफ झलक रहा था।
"हाँ," उसने धीमे लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, "और मुझे गर्व है कि मैं वर्जिन हूं। हर चीज़ का एक सही समय होता है… और मैं उस समय का इंतज़ार कर रही हूँ।"
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी फैल गई। दूर समुद्र की लहरें जैसे उनके मन के शोर को आवाज़ दे रही थीं।
ऋतिक हल्का सा मुस्कुराया, लेकिन इस बार उसकी मुस्कान में तंज नहीं था… समझ थी।
"आज के ज़माने में भी… कोई इतना सच्चा सोच सकता है… ये उम्मीद नहीं थी," उसने धीरे से कहा।
काम्या ने नजरें फेर लीं, "हर कोई भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहता, ऋतिक… कुछ लोग अपने उसूलों के साथ जीना पसंद करते हैं।"
हवा थोड़ी ठंडी हो गई थी। काम्या ने अपने दोनों बाँहों से खुद को कसकर लपेट लिया।
"चलो, मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ," ऋतिक ने नरम आवाज़ में कहा।
काम्या ने एक पल सोचा… फिर सिर हिला दिया।
"ठीक है…"
दोनों उठे और साथ चल पड़े…
लेकिन इस बार उनके बीच पहले जैसी दूरी नहीं थी —
कुछ अनकहा सा, धीरे-धीरे जगह बना रहा था।
"तुम्हारी भी कोई गर्लफ्रेंड होगी?" चुप्पी तोड़ते हुए काम्या ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
ऋतिक हँस पड़ा, "मैडम… हम जैसे लोगों की तो दोस्ती ही बड़ी मुश्किल से होती है, गर्लफ्रेंड तो बहुत दूर की बात है।"
काम्या ने चुटकी ली, "अच्छा… मतलब तुम भी वर्जिन निकले?"
ऋतिक ने कंधे उचकाए, "अब क्या करें… किस्मत ने अभी तक कोई मौका ही नहीं दिया।"
दोनों एक-दूसरे को देखकर हँस पड़े।
समुद्र की लहरें किनारे से टकरा रही थीं… और उनके बीच की झिझक भी धीरे-धीरे उसी शोर में घुलती जा रही थी।
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...to be continued