राघव और काशी गुफा से कबिले की ओर जा ही रहे होते है कि काशी ने पूछते हुए कहा, तुम्हारा नाम क्या है? राघव" राघव है मेरा नाम, और तुम्हारा नाम. राघव ने कहा. काशी" मैं काशी हूँ, और इससे ज्यादा मुझे नहीं लगता कि मुझे तुम्हे और कुछ अपने बारे में बताने की जरूरत है, क्यों सही कहा ना. काशी ने कहा।
अगर अपने आप की तारीफ हो चुकी हो तो राजकुमारी आगे चले. राघव ने कहा. कुछ दूर चलने के बाद राघव को रास्ते मे अपनी वहीं कांस्य की तलवार पडी हुई दिखाई देती है, वह उसे उठा लेता है. और उसके ऊपर हाथ फेरते हुए कहता है, तो आखिरकार तुम मुझे मिल ही गई. अब तुम्ही मुझे मधु को बचाने में मदद करोगी।
काशी ने राघव की बात को काटते हुए कहा, ओह लडके जरा सपने से बाहर आओ... तुम्हे लगता है तुम इस बिना धार वाली तलवार से मेरे पूरे कबिले से लड जाओगे. जैसी ये तलवार दिख रही है ना. मुझे नहीं लगता है कि ये चूहें तक को मार पाएगी तो कबिले से जितने की तो भूल ही जाओ. हमारे कबिले के पास ऐसे हथियार है जिससे हम बडे से बडे जानवरो को भी दूर से ही मौत के घाट उतार देते है।
क. क्या? तुम. ना मुझे डराने की कोशिश मत करो, तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मैंने यहाँ के कबिले के सरदार की बेटी से शादी कर ली हो. राघव ने कहा.
काशी ने कहा, क्या कहा तुमने मैं और वो भी तुमसे शादी चेहरा देखा है अपना. राघव ने काशी की बात को काटते हुए कहा, Sorry' मतलब माफी चाहता हूँ, वो तो मैंने गलती से कह दिया और हाँ चेहरा तो मैं रोज देखता हूँ, और देखो तुम्हारी कितनी अच्छी किस्मत है आखिरकार तुमने भी मेरा चेहरा देखने को मिल ही गया.
काशी ने कहा, जी बिल्कुल आपने तो मेरे ऊपर बहुत बडा अहसान कर दिया, अगर तुम्हारी फिजूल की बातें खत्म हुई तो जल्द-जल्दी चलो.
तभी चक्रवर्ती उन आदमियों से पूछते हुए कहता है, अब उस गुफा मे उन दोनों पर नजर कौन रख रहा है. तभी कबिले का सरदार महारत वहाँ पहुंच जाता है और चक्रवर्ती से पूछता है, काशी का कुछ पता चला वह कहाँ है.
नहीं महाराज! मुझे लगता है जिस लडकी को हम जंगल से लेकर आए थे उन्ही के साथियो ने काशी को अगवाह किया होगा. चक्रवर्ती ने कहा. महारत बोला, जाओ उस लडकी को लेकर आओ.
चक्रवर्ती बोलता है, जी महाराज! तभी कबिले के कुछ लोग मधु को लेकर आ जाते है. महारत पूछता है, बता लडकी तुम यहाँ किस मकसद से आई हो. चक्रवर्ती अपने आदमियों के पास जाता है और उनसे कहता है, तुमने सुना नहीं मैंने क्या कहा कौन है वहाँ गुफा मे जो उन पर नजर रख रहा है. उनमे से एक ने कहा, हम सब तो आपको बताने के लिए आए है अभी तो उस गुफा मे कोई नहीं है.
चक्रवर्ती कहता है, क्या? फिर तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो जल्दी से गुफा मे जाओ. और देखो कही वे वहाँ से भाग तो नहीं गए. उन्होंने कहा, ठीक है सरदार हम अभी जाते है.
महारत मधु से कहता है, सच सच बता दो नहीं तो तुम्हे कठोर दंड मिलेगा. मधु ने कहा, मै सच बोल रही हूँ मुझे नहीं पता कि आपकी बेटी काशी कहाँ है.
महारत ने कहा, तो तुम ऐसे नहीं मानोगी. चक्रवर्ती. इसे तब तक कोडे मारे जाए, जब तक ये बता न दे कि काशी कहाँ है. चक्रवर्ती कहता है, ठीक है महाराज!
राघव और काशी भी कबिले मे पहुंच जाते है और राघव ऊँची आवाज मे कहता है, खबरदार! किसी ने मधु को हाथ भी लगाया तो, मै उसे छोडूगा नहीं. उसको मेरी तलवार का सामना करना पडेगा.
इतनी हिम्मत दिखा ही दी है तो कम से कम संवाद तो अच्छा कर लेते है, इस कांस्य की तलवार से ललकार रहे हो सच में. अगर तुम कहो तो मैं तुम्हे एक दमदार- सा संवाद बता सकती हूँ. काशी ने कहा.
राघव ने धीरे से कहा, संवाद मतलब कि' Dialogue' तुम इस समय संवाद पर बहस कर रही हो Disgusting. तुम चुप ही रहो. फिलहाल तुम चुप रहकर ही मेरी ज्यादा मदद कर सकती हो.
छाया ने कहा, काशी बेटी तुम आ गई, कहाँ चली गई थी बेटी. आ अपनी माँ के गले लग जा. काशी अपनी माँ के गले लग जाती है. महारत बोलता है, जरूर इस लडके ने काशी को अगवाह किया होगा. इसे बंदी बना लिया जाए. काशी ने कहा, नहीं पिता जी! इसने तो मुझे बचाया है, इसने मुझे अगवाह नहीं किया था.
तभी राघव को वे लोग दिखाई देते है जिसने काशी को अगवाह किया था, राघव उनकी और इशारा करते हुए कहता है, सरदार इन लोगो ने ही काशी को अगवाह किया था. महारत कबिले वालों से कहता है, कोई भी बचकर भाग ना सके. कबिले वाले उन सभी को पकड लेते है
महारत उन लोगो से पूछता है, तुमने किसके कहने पर काशी को अगवाह किया है जल्दी बताओ नहीं तो अभी तुम सबको मिर्त्युदंड मिलेगा. उनमे से एक बहुत डर जाता है और कहता है, काशी को अगवाह हमने चक्रवर्ती जी के कहने पर किया था. हमें छोड दो सरदार...
महारत चक्रवर्ती के पास जाता है और कहता है, गद्दार मैंने सबसे ज्यादा तुम पर भरोसा किया था और तुमने मेरी बेटी काशी को अगवाह करवाया क्यों?
हाँ मैंने करवाया है काशी को अगवाह क्योंकि अब इस कबिले का सरदार मुझे बनना था. मै तुम्हारी बेटी के बदले मे तुम्हारे सामने शर्त रखता कि अगर तुम्हे अपनी बेटी जिन्दा चाहिए तो इस कबिले का सरदार मुझे बनाना होगा. चक्रवर्ती ने कहा।
राघव की ओर इशारा करते हुए कहता है, लेकिन इस लडके ने पूरे करें कराए पर पानी फेर दिया. इतना बडा धोखा. इसे बंदी बना कर यहाँ से ले जाओ मै कल बताऊंगा की इसको क्या दंड मिलना चाहिए. महारत ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा।
महारत ने राघव से कहा, तुम्हारा बहुत- बहुत धन्यवाद! तुमने मेरी बेटी की जान बचाई और चक्रवर्ती का भी सच हमारे सामने लाए. राघव कहता है, इसकी कोई जरुरत नहीं है सरदार बस आप मेरी दोस्त को छोड दो ताकि हम यहाँ से आगे अपनी मंजिल की ओर जा सके...
छोड तो दूंगा, पर मेरी एक शर्त है? महारत ने कहा।
अब एक और शर्त! क्या शर्त है सरदार आपकी? राघव ने कहा. आज तुम हमारे मेहमान हो तुम्हे रात को हमारे साथ ही भोजन करना होगा, और कल सुबह ही तुम यहाँ से जा सकते हो, जहाँ भी तुम जा रहे हो. महारत ने कहा।
ठीक है सरदार जैसा आप चाहे. हम कल सुबह ही अपनी यात्रा पर निकलेगे. राघव ने उत्तर दिया. मधु को भी आजाद कर दिया जाता है. छाया राघव और मधु से कहती है, चलो तुम दोनों अंदर चलो! थोडा आराम कर लेना, राघव और मधु अंदर चले जाते है।
सुनो राजकुमारी प्यास लगी है थोडा पानी मिल सकता है. लेकिन बिना बहस किए. राघव ने कहा.
काशी कहती है, क्या. तुम्हे तो मैं. राघव ने काशी की बात काटते हुए कहा, मैं. पर. नहीं सिर्फ पानी मिलेगा या नहीं? काशी ने गुस्से में कहा, थोडी देर रुको अभी लेकर आई. थोडी देर मे काशी मधु और राघव के लिए पानी लेकर आ जाती है और देते हुए कहती है, ये लो पानी पिलो.
राघव ने कहा, इतने गुस्से में तो कोई जहर भी ना दे जैसे आप पानी दे रही है.
मधु ने कहा, राघव तुम क्या कह रहे हो ये सरदार की बेटी है, अगर इसने सरदार से कुछ कह दिया तो.
काशी ने कहा, चलो तुम्हारी दोस्त को तो कुछ ज्ञान है, इससे ही कुछ सीख लो की राजकुमारी से कैसे बात करते है.
पानी पीने के बाद, राघव ने कहा, सीख लूँगा राजकुमारी जी! लेकिन मै अभी काफी थक चुका हूँ तो मुझे आप उस जगह पर ले चलो जहाँ पर मै कुछ देर शांति से आराम कर सकू, और वैसे भी मैं तुम्हारा मेहमान हूँ. भूल तो नहीं गई. काशी ने कहा, ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, चलो मेरे साथ. काशी राघव को आराम करने की जगह पर ले जाती है. और कहती है, तुम यहाँ आराम कर सकते हो तुम्हे कोई परेशान नहीं करेंगा.
ये कहकर काशी वहाँ से चली जाती है. काफी थक जाने के कारण राघव को नींद आ जाती है. थोडी देर मे रात हो जाती है और खाना भी बन जाता है. मधु, महारत, काशी, सभी वहाँ पर थे, सिवाए राघव के. छाया ने कहा, काशी जाओ उस लडके राघव को भी खाना खाने के लिए बुलाकर लाओ.
काशी ने कहा, मैं. छाया ने कहा, हाँ बेटा वो हमारे मेहमान है और उसने तुम्हारी जान भी बचाई थी.
ठीक है माँ मै अभी जाती हूँ. काशी ने कहा, और वह उस जगह पर जाने लगती है जहाँ वह राघव को आराम करने के लिए छोड कर आई थी. वहाँ पर पहुंचने के बाद देखती है कि राघव सोया हुआ था.
काशी राघव को उठाते हुए कहती है, उठो राघव उठो! खाना खा लो बन गया है. राघव गहरी नींद में था और कहता है, थोडी देर मे खा लूँगा अभी तो सोया हूँ" माँ"
काशी कहती है, क्या? राघव की अचानक नींद खुल जाती है और कहता है, तुम थोडी दूर रहो. काशी चेहरे पर मुस्कान के साथ कहती है" तुम सपना देख रहे थे. अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....