डॉक्टर! अगर मेरी बहन की साँसों की डोरी टूटी, तो इस पूरे अस्पताल में किसी की साँसें बाकी नहीं बचेंगी. इस पूरे शहर को कब्रिस्तान बना दूँगा मैं!
सफेद दीवारों से घिरे उस वीआईपी कॉरिडोर में गूँजी वह आवाज कोई मामूली इंसानी आवाज नहीं थी. वह साक्षात काल की गर्जना थी. उस आवाज में इतना खौफ, इतनी ठंडक और इतना वजन था कि सामने खडे शहर के सबसे बडे और नामी कार्डियोलॉजिस्ट के पैर थर- थर काँपने लगे. डॉक्टर के माथे से पसीने की बूंदें टपक कर फर्श पर गिर रही थीं. उसने डरते हुए अपनी नजरें उठाईं, लेकिन सामने खडे उस शख्स की आँखों में देखने की हिम्मत किसी में नहीं थी.
वह अयांश सिंघानिया था.
छह फीट दो इंच लंबा, बेहद गठीला और कसरती बदन. उसका चेहरा किसी ग्रीक गॉड की तरह तराशा हुआ और अविश्वसनीय रूप से हैंडसम था. तेज धारदार जबडा (jawline), तीखी नाक और माथे पर गुस्से से तनती नसें—उसे एक ऐसा निखार देती थीं जिसे देखकर कोई भी सम्मोहित हो जाए. लेकिन उस बेपनाह हुस्न के पीछे छिपा था एक बेहद खूंखार, बेरहम और कातिलाना औरा (aura)। वह सिर्फ बिजनेस की दुनिया का बेताज बादशाह नहीं था, बल्कि अंडरवर्ल्ड की अंधेरी गलियों का वह खूंखार माफिया था जिसके नाम से बडे- बडे सूरमाओं के हलक सूख जाते थे.
हमेशा की तरह, अयांश आज भी सिर से पैर तक मुकम्मल काले कपडों में था. उसकी काली सिल्क की शर्ट के ऊपर का एक बटन खुला हुआ था, और उसके ऊपर उसने एक बेहद कीमती ब्लैक ओवरकोट डाल रखा था. उसकी कलाई पर बंधी काली रोलेक्स घडी की टिक- टिक इस खामोश गलियारे में साफ सुनी जा सकती थी. अयांश के लिए काला रंग सिर्फ एक कपडा नहीं था, उसकी रूह का हिस्सा था. वह जहाँ खडा हो जाता, वहाँ का तापमान अपने आप गिर जाता था. उसके इर्द- गिर्द का औरा इतना भारी और खतरनाक था कि लोग उसके पास से गुजरने में भी कतराते थे.
सर. सर, हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं. अवनि मैम को बहुत गहरे जख्म आए हैं. कार एक्सीडेंट इतना भयानक था कि वह. वह इस वक्त कोमा में चली गई हैं. अगले चौबीस घंटे बेहद नाजुक हैं, डॉक्टर ने अपनी काँपती हुई हथेलियों को आपस में भींचते हुए किसी तरह अपनी बात पूरी की.
जैसे ही' कोमा' शब्द अयांश के कानों में पडा, उसकी आँखों में खून उतर आया. उसकी गहरी भूरी आँखें पल भर में जलते हुए अंगारे जैसी लाल हो गईं. उसने झटके से डॉक्टर का कॉलर अपने मजबूत हाथ में जकडा और उसे दीवार से सटा दिया.
कोशिश? मुझे तुम्हारी कोशिश नहीं, मेरी बहन की जिंदगी चाहिए! अवनि को अगर कुछ भी हुआ, तो डॉक्टर. तुम अपनी आखिरी दुआ अभी माँग लो, अयांश ने बेहद धीमी, फुसफुसाती हुई लेकिन खंजर जैसी नुकीली आवाज में कहा.
अयांश! छोडो उसे. इसमें डॉक्टर की कोई गलती नहीं है।
पीछे से एक बेहद कडक, रौबदार और बुजुर्ग आवाज गूँजी. अयांश के हाथ पल भर के लिए ठिठके. उसने डॉक्टर को झटके से पीछे धकेला और मुडकर देखा. सामने सिंघानिया खानदान की सबसे बुजुर्ग और रसूखदार महिला, उसकी दादी खडी थीं. दादी की आँखों में अवनि की हालत को देखकर गहरा दुख तो था, लेकिन उनके चेहरे का रोब और संजीदगी अभी भी कायम थी.
दादी आगे बढीं और उन्होंने आईसीयू (ICU) के कांच वाले दरवाजे से अंदर झांका, जहाँ अवनि मशीनों और अनगिनत ट्यूब्स के बीच बेजान पडी हुई थी. उसकी सिर पर पट्टियाँ बंधी थीं और वेंटिलेटर की मशीन लगातार एक डरावनी आवाज कर रही थी. अवनि को इस हाल में देखकर दादी की आँखों के कोने गीले हो गए, लेकिन उन्होंने तुरंत खुद को संभाला. उनकी आँखों में दुख के साथ- साथ एक अजीब सी घबराहट और किसी पुराने अतीत का साया भी तैर गया, जिसे उन्होंने अयांश की नजरों से छुपा लिया.
अयांश अपनी दादी के पास जाकर खडा हो गया. उसके दोनों हाथ उसके ब्लैक कोट की जेबों में चले गए. उसकी उँगलियाँ गुस्से से अंदर ही अंदर भींच रही थीं.
दादी, यह कोई हादसा नहीं है, अयांश की आवाज में बर्फ जैसी ठंडक थी. मेरी अवनि की गाडी के ब्रेक फेल किए गए थे. उसे जानबूझकर इस मौत के कुएं में धकेला गया है।
दादी ने चौंककर अयांश की तरफ देखा, क्या कह रहे हो तुम? किसने हिम्मत की सिंघानिया खानदान की बेटी पर हाथ डालने की?
अयांश के होंठों पर एक बेहद खौफनाक और शैतानी मुस्कान उभर आई. उसने अपने कोट की जेब से अपना ब्लैक आईफोन निकाला और स्क्रीन पर एक नाम और तस्वीर चमका दी.
कबीर अस्थाना! अयांश ने उस नाम को इस तरह चबाकर लिया जैसे वह उस इंसान की बोटी- बोटी चबा रहा हो. इस कीडे ने मेरी बहन की मासूमियत का फायदा उठाना चाहा. जब अवनि ने इसे दुत्कारा, तो इसने मेरी बहन को रास्ते से हटाने की साजिश रची. यह अस्थाना खानदान भूल गया है कि अवनि किसकी बहन है।
अयांश का सुरक्षा प्रमुख, सैम, जो खुद काले सूट में मुस्तैद खडा था, तेजी से अयांश के पास आया और सिर झुकाकर बोला, बॉस, हमारे मुखबिरों से खबर मिली है. कबीर अस्थाना इस वक्त शहर में नहीं है. वह अपने किए धरने पर पर्दा डालने के लिए कहीं छिप गया है. लेकिन.
लेकिन क्या, सैम? मेरी डिक्शनरी में' लेकिन' शब्द के लिए कोई जगह नहीं है, अयांश ने बिना मुडे, अपनी गहरी और जानलेवा आवाज में कहा.
बॉस, कबीर तो हाथ नहीं आया, लेकिन अस्थाना परिवार में आज एक बहुत बडा जश्न चल रहा है. कबीर की चचेरी बहन, सिया अस्थाना की आज शादी है. पूरा अस्थाना खानदान उस मंडप में मौजूद है, सिर्फ कबीर को छोडकर, सैम ने पूरी रिपोर्ट दी.
यह सुनते ही अयांश के चेहरे के भाव पूरी तरह बदल गए. उसकी आँखों में रेंगता हुआ गुस्सा अब एक खूंखार और सोचे- समझे प्रतिशोध में तब्दील हो चुका था. कबीर अस्थाना ने उसकी सबसे अनमोल चीज, उसकी बहन की जिंदगी को दांव पर लगाया था. तो फिर कबीर के परिवार की बेटी इतनी शांति से लाल जोडे में सजकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कैसे कर सकती थी?
सिया अस्थाना. अयांश ने उस नाम को अपने जेहन में उतारा. दुश्मन के घर की बेटी का मंडप सजेगा और मेरी बहन यहाँ सफेद कफन जैसी चादर ओढकर जिंदगी और मौत की भीख माँगेगी? ऐसा नहीं होगा. इंसाफ तो खुदा करता है, अयांश सिंघानिया सिर्फ तबाही मचाता है।
दादी ने अयांश के चेहरे पर छाए उस खौफनाक अंधेरे को भांप लिया. उन्होंने आगे बढकर अयांश का हाथ पकडना चाहा, अयांश, रुक जाओ. गुस्से में कोई ऐसा कदम मत उठाना जिससे.
दादी! अयांश ने अपनी दादी की बात को बीच में ही काट दिया. उसका औरा इस वक्त इतना भारी था कि खुद दादी भी दो कदम पीछे हट गईं. आप यहाँ अवनि के पास रहिए. डॉक्टरों की हर जरूरत पूरी होनी चाहिए. मैं. कबीर अस्थाना के उस आलीशान घमंड की बुनियाद हिलाकर आता हूँ. उसने मेरी बहन का खून बहाया है, अब मैं उसके खानदान के आंसू बहाऊँगा।
अयांश ने अपनी कलाई घुमाई, ब्लैक रोलेक्स पर वक्त देखा और तेजी से कॉरिडोर से बाहर की तरफ बढ गया. उसके पीछे काले सूटों में सजे उसके दर्जनों बॉडीगार्ड्स का एक पूरा कारवां चल पडा. अस्पताल की लॉबी में मौजूद हर मरीज, हर स्टाफ अयांश को देखकर थम गया. ऐसा लग रहा था मानो कोई राजा नहीं, बल्कि साक्षात यमराज अपने काले लिबास में किसी की बली लेने निकला हो.
अस्पताल के बाहर छह काली बुलेटप्रूफ गाडियाँ पहले से ही स्टार्ट खडी थीं. अयांश अपनी सबसे पसंदीदा ब्लैक रोल्स रॉयस की पिछली सीट पर जाकर बैठ गया. गाडी के शीशे पूरी तरह काले थे, जिसके पार देखना नामुमकिन था. गाडी जैसे ही अस्पताल के प्रांगण से बाहर निकली, अयांश ने खिडकी के बाहर रात के घने अंधेरे को देखा.
उसकी उँगलियाँ उसकी सीट के चमडे को बेरहमी से नोच रही थीं. उसके दिमाग में सिर्फ एक ही मंजर घूम रहा था—अवनि का वह रोता हुआ चेहरा जब वह आखिरी बार उससे मिली थी, और अब मशीनों पर टिकी उसकी जिंदगी.
कबीर अस्थाना! तूने मेरी बहन की जिंदगी बर्बाद की है ना? अब देख, मैं तेरी सबसे प्यारी बहन को अपनी नफरत की आग में कैसे जिंदा जलाता हूँ! अयांश ने खुद से बुदबुदाते हुए कहा. उसकी आवाज में छिपी नफरत इतनी गहरी थी कि गाडी के अंदर मौजूद सैम की रीढ में भी एक सिहरन दौड गई.
गाडियों का वह काफिला शहर की चमचमाती सडकों को चीरता हुआ अस्थाना मेंशन की तरफ बढ रहा था, जहाँ रोशनी से नहाया हुआ एक आलीशान मंडप सजा था. उस मंडप में खुशियाँ थीं, शहनाइयाँ थीं और लाल जोडे में सजी वह मासूम सिया थी, जो इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि उसकी जिंदगी का सबसे भयानक तूफान कुछ ही मिनटों में वहाँ दस्तक देने वाला है. एक ऐसा तूफान, जो उसे हमेशा- हमेशा के लिए एक आलीशान पिंजरे में कैद कर देगा.
अयांश सिंघानिया अपनी नफरत का सौदा करने निकल चुका था, और इस बार वह बिना अपनी जीत के वापस लौटने वालों में से नहीं था.