कोन्निचिवा: माय देसी लव - 3 Kajal Soam द्वारा यात्रा विशेष में हिंदी पीडीएफ

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कोन्निचिवा: माय देसी लव - 3


परिदृश्य: गाड़ी के अंदर का माहौल और जयपुर की गलियाँ।
गाड़ी अब जयपुर के पुराने परकोटे की तंग गलियों में दाखिल हो चुकी थी। बाहर शोर था, पर गाड़ी के अंदर एक अजीब सी खामोशी और जिज्ञासा का माहौल था। निहाल बड़े ध्यान से गाड़ी चला रहा था, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार रियर-व्यू मिरर में पीछे बैठी शिवानी पर टिक जाती थीं। शिवानी ने अपना दुपट्टा ठीक किया और बाहर की दुकानों को देखते हुए रास्ते बताने लगी।
शिवानी: "यहाँ से बाएँ (Left) लीजिएगा... हाँ, अब सीधा। संभलकर! यहाँ के रिक्शे वाले किसी के सगे नहीं होते।"
निहाल (मुस्कुराते हुए): "I'm trying, शिवानी जी। पर यहाँ के ट्रैफिक में गाड़ी चलाना किसी वीडियो गेम के फाइनल लेवल जैसा है। और ऊपर से आपकी हिंदी के भारी शब्द... 'सगे नहीं होते' का मतलब क्या है?"
शिवानी ने आँखें घुमाईं। "मतलब ये कि वो आपकी महँगी गाड़ी का ख्याल नहीं रखेंगे। वैसे, आप जापान में क्या करते हैं? वहाँ भी ऐसे ही 'पति' और 'पते' में कंफ्यूज रहते हैं या कुछ काम-वाम भी करते हैं?"
हेमा जी, जो बगल में बैठी थीं, जोर से हंस पड़ीं। "देखा निहाल! मैंने कहा था न, जयपुर की लड़कियां जितनी सुंदर होती हैं, उतनी ही हाजिरजवाब भी। बेटा, ये फैशन डिजाइनर है, कपड़ों के साथ-साथ बातों की कटिंग भी बहुत अच्छी करती है।"
निहाल थोड़ा झेंप गया, पर उसे शिवानी का यह बेबाक अंदाज पसंद आ रहा था। जापान में सब इतने औपचारिक (Formal) होते थे कि ऐसी खुली बातें सुनने को तरस जाते थे।
दृश्य 2: विमला दादी का 'CCTV' दरबार
जैसे ही गाड़ी शिवानी के मोहल्ले की नुक्कड़ पर पहुँची, शिवानी ने घबराकर रुकने का इशारा किया। "बस-बस! यहीं रोक दीजिए निहाल जी। ब्रेक मारिए!"
निहाल ने झटके से ब्रेक लगाया। "क्या हुआ? कोई एक्सीडेंट?"
शिवानी (जल्दी-जल्दी अपना बैग संभालते हुए): "एक्सीडेंट नहीं, मेरा 'बैंड' बज जाएगा अगर पापा ने मुझे एक अजनबी लड़के की गाड़ी से उतरते देख लिया। आप और आंटी आराम से आइये, मैं और यामी पैदल ही घर पहुँचती हैं।"
गाड़ी से उतरते हुए शिवानी ने खिड़की की ओर झुककर निहाल को चिढ़ाया। "सुनिए, यहाँ से दूसरा घर विनोद सिंह जी का है। पर अगर आप रास्ता भूल जाएँ, तो फिक्र मत कीजिएगा। वो सामने जो चबूतरे पर दादी बैठी हैं न? हाँ, वो बैंगनी साड़ी वाली—विमला दादी! वो इस मोहल्ले की 'मुखबिर' और 'CCTV कैमरा' हैं। उनके पास पूरे जयपुर की खबर रहती है कि किसके घर कौन आया है और कौन किसके साथ घूम रहा है। आप बस उनसे पूछ लेना, वो आपको पलक झपकते ही सही पते पर पहुँचा देंगी। वैसे भी उन्हें नए लोग और नई गाड़ियाँ घूरने का बहुत शौक है।"
शिवानी और यामी हाथ हिलाकर बिजली की रफ़्तार से गली के अंदर गायब हो गईं। निहाल ने अपनी माँ की तरफ देखा और दोनों की हंसी छूट गई।
निहाल: "माँ, शी इज रियली क्रेजी (Crazy)! उसने हमें सीधा मोहल्ले की जासूस दादी के पास भेज दिया। पर उसने मेरा नाम कैसे जाना? क्या उसे पता चल गया है कि मैं कौन हूँ?"
हेमा जी ने रहस्यमयी मुस्कान दी। "बेटा, दिल की बात और पते की बात छुपती नहीं है। चलो, अब गाड़ी सीधे उसके दरवाज़े पर खड़ी करते हैं।"
बाहर बैठी 'विमला दादी' ने अपनी छड़ी ठोकते हुए और चश्मा नाक पर टिकाते हुए गाड़ी को ऐसे घूरना शुरू कर दिया था जैसे कोई विदेशी जहाज उनके मोहल्ले में लैंड कर गया हो। उन्हें शक हो गया था कि आज जयपुर में कुछ 'अनोखा' होने वाला है।
दृश्य 3: घर के अंदर का माहौल और शिवानी की तैयारी
शिवानी हाँफती हुई घर के अंदर दाखिल हुई। घर में मसालों की खुशबू तैर रही थी। उसकी माँ, अनु देवी, रसोई में समोसे तल रही थीं और पिता, विनोद सिंह, अपना कुर्ता ठीक करते हुए ड्राइंग रूम में सोफे बिछा रहे थे।
विनोद सिंह: "शिवानी! कहाँ रह गई थी बेटा? मेहमान एयरपोर्ट से निकल चुके हैं। जल्दी जा और वो नीले वाला सूट पहन ले जो कल सिला था। अपनी फैशन डिजाइनिंग का हुनर आज खुद पर भी आज़मा ले!"
शिवानी ने बिना कुछ कहे अपने कमरे की ओर दौड़ लगा दी। उसके दिल की धड़कनें तेज़ थीं। उसे वो 'जापानी मुंडा' याद आ रहा था। उसने जल्दी से अपना सबसे सुंदर राजस्थानी हाथ की कढ़ाई वाला सूट निकाला। उसने हल्का सा काजल लगाया और कानों में झुमके पहने। आईने में खुद को देखते हुए उसने सोचा, "शिवानी, तू ये सब उसके लिए क्यों कर रही है? तुझे तो बस अपने करियर से प्यार था न?"
तभी बाहर एक महँगी गाड़ी के रुकने की आवाज़ आई और साथ ही विमला दादी की ऊँची आवाज़ गूँजी— "अरे विनोद! देख तो सही, तेरे घर जापान से 'राजा-बाबू' आए हैं!"
शिवानी के हाथ सुन्न पड़ गए। उसे एहसास हुआ कि अब सामना होने वाला है। वह चाय की ट्रे तैयार करने लगी, पर उसके हाथ कांप रहे थे। उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़के का उसने बीच सड़क पर मज़ाक उड़ाया था, वो वाकई उसका 'होने वाला' हो सकता है।
एपिसोड का अंत: शिवानी चाय की ट्रे लेकर ड्राइंग रूम की तरफ बढ़ती है, जहाँ निहाल और हेमा जी बैठ चुके हैं। निहाल की नज़र दरवाजे पर टिकी है, जहाँ से शिवानी की परछाईं अंदर आने वाली है।