बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 8 July Writes द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 8

तूफ़ान की पहली आहट -


उस रात घर में कोई ठीक से सो भी नहीं पाया।
रिया कमरे के कोने में चुप बैठी थी।
आईशा उसके पास थी, लेकिन उसके चेहरे पर भी चिंता की लकीरें साफ़ नज़र आ रही थीं।


आरिफ़ खिड़की के पास खड़ा बाहर अँधेरे को देख रहा था।
बाहर हवा तेज़ चल रही थी।
जैसे कोई आने वाला हो।
सुबह का सूरज अभी पूरी तरह निकला भी नहीं था कि रिया का फोन बज उठा।


स्क्रीन पर एक नाम नाम चमकने लगा ---
“तेजस्वी”


रिया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“उठाओ मत,” आईशा ने तुरंत कहा।
फोन बजता रहा…
फिर बंद हो गया।


लेकिन पाँच सेकंड बाद फिर से फोन बज उठा।
इस बार आरिफ़ ने फोन उठा लिया।
“कौन?” उसकी आवाज़ सख्त थी।


दूसरी तरफ से धीमी और ठंडी हँसी सुनाई दी।
“अरे… तो अब बहन के घर शरण मिली है?”
आरिफ़ का जबड़ा भींच गया।
“नाम बताओ अपना...।”
“नाम जानकर क्या करोगे?” उसकी आवाज़ और भी शांत हो गई।


“बस इतना समझ लो… खेल अभी शुरू हुआ है।”
“तेजस्वी?” आरिफ़ ने सीधे पूछा।
कुछ पल की चुप्पी और फिर जवाब आया ---
“समझदार लगते हो। अच्छा है।
अपने दोस्त रोहित से कह देना… पुरानी बातें मैं भूला नहीं हूँ।” और फोन कट गया।


कमरे में सन्नाटा छा गया।
रिया की आँखों से आँसू गिर पड़े।
“वो हमें नहीं छोड़ेगा…” उसकी आंखों में डर साफ दिख रही थी।
आईशा ने उसे गले लगा कर कहा ---
“हम साथ हैं। डरने की ज़रूरत नहीं।”
लेकिन उसके दिल की धड़कनें तेज़ हो रही थी।


उधर शहर के दूसरे कोने में…
एक बड़ा सा ऑफिस बिल्डिंग की ऊपरी मंज़िल पर तेजस्वी खिड़की के सामने खड़ा था।


बारिश की हल्की बूंदें शीशे पर गिर रही थीं।
उसने फोन टेबल पर रखा और मुस्कुराया।
“रोहित… तुमने मुझे धोखा दिया था,” वो  खुद से बुदबुदाया।
“अब तुम्हारी बारी है टूटने की।”
उसकी आँखों में अजीब सा ठंडापन था।


दोपहर में रोहित अचानक आईशा के घर आया। इस बार वो गुस्से में नहीं था।
चेहरा थका हुआ था।
“उसने फोन किया ना?” उसने सीधे सीधे पूछा।
आरिफ़ ने हाँ में सिर हिलाया।


रिया ने काँपते हुए आवाज में कहा,
“रोहित, आखिर ये सब कब खत्म होगा?”
रोहित ने पहली बार साफ़ शब्दों में कहा,
“तेजस्वी सिर्फ़ पैसे या बदला नहीं चाहता…
वो चाहता है कि मैं हर पल डर में जिऊँ।”


“क्यों?” आईशा ने पूछा।
रोहित की आवाज़ भी भारी हो गई।
“क्योंकि मैंने उसके illegal deals का पर्दाफाश किया था और वो जेल जाते-जाते बचा था।”
कमरे में तनाव और गहरा हो गया।


“तो अब क्या करेगा वो..?” आरिफ़ ने पूछा।
रोहित ने धीमे स्वर में कहा,
“अब वो सीधा हमला नहीं करेगा…
वो इंतज़ार करेगा।
और जहाँ मैं सबसे कमजोर हूँ… वहीं पे वार करेगा।”


रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
आईशा ने अचानक महसूस किया ---
जैसे कोई उन्हें देख रहा हो।उसने खिड़की से बाहर झाँका।सड़क के उस पार एक काली कार खड़ी थी।उसके शीशे गहरे थे। अंदर कौन है, पता नहीं।


उसका दिल धक से रह गया। “आरिफ़…” उसने धीरे से कहा।
सबकी नज़र उस कार पर गई।
कुछ सेकंड बाद कार धीरे-धीरे आगे बढ़ गई…
और मोड़ पर जा कर गायब हो गई।


“ये संयोग नहीं है,” आरिफ़ ने गंभीर स्वर में कहा।रोहित ने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा--- “वो हमें देख रहा है।”


शाम को बारिश फिर शुरू हो गई।
रिया बालकनी में खड़ी थी। उसने धीरे से कहा---
“दीदी… अगर मेरी वजह से आपको कुछ हो गया तो?”


आईशा प्यार से उसका चेहरा छुते हुए कहा ---- "कुछ नहीं होगा , तुम घबराओ मत...!" तुम मेरी बहन हो।"
"तुम्हारी वजह से नहीं… लेकिन तुम्हारे लिए अगर मुझे कुछ भी करना पड़े, मैं करूँगी।” हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं...।"


उसी वक्त दूर कहीं बिजली कड़कने की आवाज़ आई । आसमान  चमक उठा।
जैसे वो आने वाले तूफान की चेतावनी दे रहा  हो।


और कहीं अँधेरे में, तेजस्वी की आँखें भी चमक रही थी।उसने अपने आदमी से कहा ---
“अभी नहीं… सही वक्त आने दो।"
"जब वार होगा… तो ऐसा कि रोहित जिंदगी भर याद रखेगा...।” और तभी बारिश तेज़ हो गई।


आईशा ने अनजाने में अपना हाथ आरिफ़ के हाथ में कसकर पकड़ लिया।
उसे नहीं पता था ---- की अगली बारिश सिर्फ़ डर की नहीं होगी…
वो उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बनने वाली थी।


आखिर क्या चाहता है ये तेजस्वी...? और आगे क्या करने वाला है..?? जानने के लिए पढ़ते रहें (बारिश की वो पहली मुलाक़ात --- एक प्रेम कहानी ❤️ ❤️ ❤️)