तभी उनमे से एक ने कहा, "मतलब तुम घुस्पेठिया हो, जो हमारे कबिले मे चुपके से आए हो बताओ तुम किस मकसद से आए हो और तुम्हे किसने भेजा है"। मैं कोई गुस्पेठी नहीं हूँ. मै किसी के लिए कोई खतरा नहीं हूँ. इससे पहले की राघव अपनी बात पूरी कर पाता वे लोग राघव को भी जडी बूटी सुंघाकर बेहोश कर देते है।
महारत जहाँ काशी सोई हुई थी वहाँ पहुंच जाता, काशी को वहाँ ना देखकर वह काशी की माँ छाया को जाकर उठाता है. उठो छाया! उठो.... छाया ने कहा, क्या हुआ? आप कुछ परेशान दिखाई दे रहे हो?
का..काशी अपने सोने के जगह पर नहीं है, तुम्हे पता है क्या वह कहाँ गयी है। महारत ने हड़बड़ी में पूछा। छाया बोलती है नहीं मुझे तो नहीं पता काशी कहाँ गयी है. महारत चिल्लाते हुए कहता है, चक्रवर्ती जल्दी आओ जल्दी..
महारत की आवाज सुनकर चक्रवर्ती महारत के पास पहुंच जाता है और कहता है, क्या हुआ महाराज कुछ परेशान लग रहे हो, कुछ हुआ है क्या ? "हाँ काशी कही मिल नहीं रही है तुम जल्दी कबिले वालों के साथ काशी को ढूंढने जाओ..." महारत ने चिंता करते हुए कहा। चक्रवर्ती बोलता है, ठीक है महाराज आप परेशान मत हो मै अभी जाता हूँ।
वहाँ जंगल में उनमे से एक आदमी बोला, हमें तो सिर्फ इस लडकी काशी को अगवाह करना था, फिर इस अजनबी लडके को क्यों बेहोश कर दिया. तभी वह आदमी बोलता है जिसने राघव को बेहोश किया था हम इसके बारे मे चक्रवर्ती जी को बताएगे कि हमने एक घुसपेठिया को पकडकर रखा है तो खुश होकर वे हमें कुछ अनमोल वस्तु भेंट मे दे सकते है.
उनमे से एक आदमी ने कहा, हाँ तुम सही बोल रहे हो। वे बेहोश राघव और काशी के हाथो को बांधकर एक गुफा मे ले जाते है. वहाँ पर चक्रवर्ती कुछ कबिले वालों के साथ काशी को ढूंढने का झूठा नाटक करने लगता है. और उनको ढूंढते ढूंढते सुबह हो जाती है. चक्रवर्ती महारत के पास जाता है और बोला हमने पूरी रात काशी को ढूंढा लेकिन वह कही नहीं मिली.
यह सुनकर महारत उदास हो जाता है वहां पर वे लोग भी गुफा से बहार चक्रवर्ती के पास बताने के लिए जाते हैं कि हमने एक लडके को और पकड कर रखा है यह सोचते हुए की उनको इनाम मिलेगा. वहाँ कलिंग गाँव की शपित हवेली में सौरव कलिंगेश जिन्न से कहता है, अगर राघव को कुछ भी हुआ तो मै तुम्हे नहीं छोडूगा.
लिली भी बोलती है, और मै भी नहीं छोडूगी. "मैंने उसे पहले ही मना किया था, वहाँ पर बहुत खतरा है.कलिंगेश ने कहा। सौरव ने गुस्से में कहा, अब तुम ज्यादा अच्छे बनकर मत दिखाओ तुम्हें क्या लगता है ऐसे अच्छे बनने का नाटक करोगे हम तुम दोनों को छोड़ देंगे कभी नहीं... और वह पता नहीं कौन-सी तलवार दी थी तुमने राघव को. अगर वह तुम्हारा कोई जादू हुआ तो मै इस हनुमान जी के लॉकेट से तुम दोनों को जला दूंगा.
"मैंने सच मे उसे एक दिव्य शक्तियों की तलवार दी है महिमा तलवार! पर उसे चलाने के लिए बहुत मजबूत होना पडेगा. शुरू मे तो वह तलवार उसको भी चोट पंहुचा देगी." कलिंगेश ने कहा। सौरव बोलता है, तुम्हारा उस तलवार को राघव को देना भी मुझे तुम्हारा कोई छल लग रहा है।
वहाँ गुफा मे राघव को भी होश आ जाता है. वह काशी को उठाते हुए बोलता है, Hey hello...लडकी जल्दी उठो, जल्दी! राघव की आवाज सुनकर काशी को भी होश आ जाता है. कहती है, तुम कौन हो? तुम यहाँ के तो नहीं लगते. और तुम्हारी इतनी हिम्मत तुमने मुझे अगवाह किया, तुम्हे पता है मेरे पिता महाबली कबिले के सरदार है, अगर मुझे थोडी सी भी चोट लगी तो मेरे पिता तुम्हे मिर्त्युदंड देंगे.
"ohh hello बोले ही जा रही हो! बोलने से पहले अपनी आँखे अच्छे से खोलकर देखो मेरे हाथ भी बंधे हुए है. अगर मै तुम्हे अगवाह करता तो, किया अपने आप को भी अगवाह कर लेता. रात को कुछ लोग तुम्हे उठाकर ले जा रहे थे, तुम्हे बचाने के लिए आया तो उन्हे मुझे भी उठा लिया...." राघव ने कहा। काशी कहती है, "फिर मैंने बोला था कि मुझे बचाने के लिए आओ... तुम्ही अपनी मर्दानगी दिखा रहे थे।" ये कहकर वह हँसने लग जाती है। काशी ने आगे कहा, कहीं कुछ ज्यादा ही तो नहीं पीटे हो तुम...तुम्हारे गाल तो अभी तक लाल दिख रहे है लगता है तुम्हे मौका ही नहीं दिया मर्दानगी दिखाने का.... काशी फिर हँसने लग जाती है।
राघव ने कहा, वैसे गाल तो तुम्हारे भी लाल है, लेकिन तुम तो यहाँ के सरदार की बेटी हो, तुम्हे तो नहीं मारेंगे तुम्हारे कबिले के लोग तो, फिर तुम्हारे गाल लाल कैसे? कुछ देर सोचने के बाद कहा, ohh अच्छा, तुमने आज से पहले मेरे जितना Handsome, good looking मेरा मतलब मेरे जितना खूबसूरत लड़का तुमने इस जंगल में पहली ही बार देखा होगा। इसीलिए तुम्हारे गाल लाल हुए होंगे, क्यों सही कहा ना राजकुमारी...
काशी ने कहा, पता है तुम्हारा मज़ाक कैसा था, बिल्कुल कड़वे करेले जैसा.... तो तुम क्या अपने मज़ाक को शहद सा मीठा समझती हो... पहले पता होता कि तुम ऐसी होंगी तो मै तुम्हे कभी बचाने के लिए बिल्कुल भी नहीं आता. राघव ने कहा।
काशी कहती है, "ऐसी होंगी से तुम्हारा क्या मतलब है साफ-साफ बोलो. लेकिन पहले तुम मेरे एक सवाल का जवाब दो.
"अब सवाल की ही कमी रह गई थी पूछो क्या पूछना है" राघव ने कहा। काशी ने कहा, तुम इतनी रात को हमारे कबिले से क्या चुराने के लिए आए थे. जरूर तुम हमारा जादुई खंजर चुराने के लिए आए होंगे. राघव ने कहा, मुझे पता था तुम्हारे दिमाग़ में ऐसा ही कुछ चल रहा होगा बेचारा सरदार... काशी ने कहा, क्या कहा तुमने.... राघव ने कहा, ऐसे आँखें बड़ी करोगी तो तुम्हे क्या लगता है मैं डर जाऊंगा और हाँ मै वहाँ कोई जादुई खंजर चुराने नहीं गया था, और वैसे भी चुराकर तो तुम लेके आए हो. काशी कहती है, हम क्या चुराकर लेकर आए है
"जिस लडकी को तुम्हारे कबिले वाले जंगल से उठा कर लाए थे, वह मेरी दोस्त मधु थी. और ज़रा देखो तो आज तुम्हे भी किसी ने अगवाह कर लिया. सही ही कहा जाता जैसी करनी वैसी भरनी। लेकिन मुझे अपनी दोस्त को बचाने के लिए यहाँ से किसी भी तरह से निकलना होगा" राघव ने कहा। काशी बोली, क्या वह तुम्हारी दोस्त थी.? राघव ने कहा, हाँ अब चुप रहो और मुझे यहाँ से निकलने के लिए कुछ सोचने दो.
तभी राघव को वहाँ पर एक पत्थर दिखाई पडता है, और राघव रस्सी को पत्थर पर रगडने लगता है. काशी बोलती है, तुम ऐसे क्यों हिल रहे हो आराम से नहीं बैठ सकते किया. राघव की रस्सी टूट जाती है और वह उठते हुए कहता है मै तो चला मधु को बचाने तुम बैठो यहाँ, 'आराम से...'
"oh लडके अकेले कहाँ जा रहे हो, शायद तुम भूल गए हो मेरे पिता महाबली कबिले के सरदार है. अगर तुम मेरी मदद करते हो,तो मै भी तुम्हे तुम्हारी दोस्त को ले जाने में मदद करने की सोच सकती हूँ काशी ने कहा।
राघव बोलता है, "क्यों अब नहीं बैठना किया तुम्हे आराम से यहाँ..." "ज्यादा मत बोलो और जल्दी इस रस्सी को खोलो इससे पहले की वे लोग यहाँ आ जाए" काशी ने कहा। राघव काशी के हाथ खोल देता है, और वे दोनों कबिले की ओर जाने लगते है.
वहाँ पर वे लोग चक्रवर्ती के पास पहुंच जाते है, चक्रवर्ती ने कहा , तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो? उनमे से एक आदमी ने कहा, सरदार जब हम काशी को अगवाह करके ले जा रहे थे.
तभी उसको बचाने के लिए एक लडका आ जाता है. वह यहाँ का नहीं लग रहा था. तो हम उसको भी बेहोश कर देते है. चक्रवर्ती बोलता है, अच्छा किया!अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....