राघव मधु के पास जाता है और उन जडो को बिना जोर लगाए हुए धीरे से पकडता है, और एक झटके मे कांस्य की तलवार से काट देता है।
"जल्दी आगे चलो यहाँ से..." मधु ने जल्दबाजी करते हुए कहा। दोनों जंगल मे आगे की ओर चल देते है. मधु ने कहा, राघव मुझे तो लगा तुम उस शक्तिशाली तलवार को बुलाओगे.....
"मैं उस घमंडी तलवार को बुलाता! कभी नहीं.... और तुम्हें क्या लगता है, वह मेरे बुलाने से आती, उसका ऐटिटूड देखा है। जिस बिजली की रफ्तार से वह मेरे हाथ से गायब हुई है ना... अभी तक मेरे हाथ का दर्द गया नहीं है।" राघव ने कहा।
मधु कहती है, लेकिन राघव तुम उस शक्तिशाली महिमा तलवार के स्वामी हो.... उसे घमंडी तो मत बोलो। 'Ohh.. Please' अब तुम तो उसकी side मत लो, वो सिर्फ़ एक तलवार है, और तुम्हें लगता है वो तलवार मुझे अपना स्वामी मानेगी?राघव ने गुस्से में कहा।
मधु ने कहा, ठीक है, मुझसे गलती हो गई। तुम नहीं हो उस तलवार के स्वामी, राघव हमें थोडी देर आराम कर लेना चाहिए, मुझसे और नहीं चला जायेगा.
राघव ने कहा, ठीक है थोडी देर आराम कर लेते है. दोनों एक विशाल पेड के नीचे आराम करने लग जाते है।
काफी थक जाने के कारण उन दोनों को नींद आ जाती है. मधु राघव से पहले उठ जाती है और पानी की तलाश मे जंगल मे आगे की ओर चली जाती है. कुछ देर बाद राघव को मधु के चिल्लाने की आवाज सुनाई पडती है राघव बचाओ बचाओ!
मधु की आवाज सुनकर राघव एक झटके के साथ उठता और जिस ओर से चीख सुनाई दे रही थी उस ओर दौड़ पड़ता है, राघक देखता है कि कुछ कबिले के लोग मधु को उठाकर लेजा रहे है. राघव अपनी काँस्य की तलवार को मजबूती से हाथ में पकड़े हुए, उन कबिले के लोगो का पीछा करने लग जाता है.
राघव उनका पीछा करते-करते उनके कबिले मे पहुंच जाता है. जिस कबिले का नाम था महाबली कबिला! वहाँ पर राघव को उनका सरदार भी दिखाई देता है, जिसका नाम था महारत. और उसकी पत्नी का नाम था छाया.
महारत और छाया की एक बेटी भी थी जिसका नाम काशी था. काशी एक निडर और सुंदर युवती थी.
तभी कबिले के लोगो मे से एक की आवाज सुनाई पडती है, महाराज इस लडकी को हम जंगल से पकडकर लेकर आए है. ये आवाज़ और किसी की नहीं बल्कि सरदार के सेनापति की थी , जिसका नाम चक्रवर्ती था.
चक्रवर्ती ने कहा, महराज जरूर ये लडकी दूसरे कबिले से होंगी, जो हमारे कबिले वालो के लिए खतरा हो सकती है.
कबिले का सरदार महारत कहता है, इसे बंधी बना कर रख लिया जाये, मै कल सारे कबिले वालों के सामने इसको सजा दूंगा. तभी चक्रवर्ती ने कहा, ठीक है महाराज ऐसा ही होगा. मधु को बंधी बना लिया जाता है. ये सब राघव छुपकर देख रहा होता है.
रात होने वाली थी तभी राघव को एक विचार सूझता है, वह सोचता है कि रात को सबके सोने के बाद वह मधु को आजाद करके इस कबिले से बाहर निकल जाएंगे.
राघव वही छुपकर रात होने का इंतजार करने लगता है. और मधु उन कबिले वालों के बीच काफी डरी हुई थी, और मन ही मन कहा, राघव कहाँ हो तुम? मुझे यहाँ बहुत डर लग रहा है. थोडी देर बाद रात हो जाती है।
महारत जोकि सरदार था वो पत्नी छाया और बेटी काशी से कहता है, रात काफी हो चुकी है हमे सोने चलना चाहिए. छाया ने कहा, हाँ चलो.... महारत, छाया और काशी सोने चले जाते है.
राघव सोचते हुए कहता है, अब तो बहुत रात हो चुकी है सभी कबिले वाले सो चुके होंगे, लेकिन कबिले के एक हिस्से में तो कुछ और ही चल रहा था। वहाँ चक्रवर्ती कबिले के कुछ लोगो से बात कर रहा था, वह उन लोगो से बोलता है, आज रात को तुम्हे काशी को अगवाह करना है, अब इस कबिले का सरदार मुझे बनना है, उसकी बेटी काशी को अगवाह करने के बाद मै महारत के सामने एक शर्त रखूँगा?
तभी उनमे से एक आदमी चक्रवर्ती से पूछते हुए कहता है, और वह क्या शर्त होंगी? "अगर तुम्हे अपनी बेटी काशी जिन्दा चाहिए, तो इस कबिले का सरदार मुझे बनाना होगा."चक्रवर्ती ने हँसते हुए कहा। तभी फिर से एक आदमी बोलता है,वाह! क्या शर्त रखी है चक्रवर्ती सरदार...
चक्रवर्ती ने कहा, अब जल्दी जाओ और उस काशी को अगवाह करके कबिले से बाहर ले जाकर छुपा दो.
तभी उनमे से एक आदमी ने कहा, ठीक है, ऐसा ही होगा. ये कहकर वे काशी को उठाने के लिए चले जाते है. राघव भी मधु को कबिले वालों की कैद से छुडाने के लिए चल पडता है.
वे लोग उस जगह पर पहुंच जाते है जहाँ पर काशी सो रही थी. वे काशी को एक जडी बूटी को सुंघा देते है जिससे काशी बेहोश हो जाती है. और वे काशी को उठाकर कबिले से बाहर ले जाने लगते है. राघव भी उसी तरफ से मधु को ढूंढते हुए जा रहा होता है। उसे नहीं पता था कि मधु को कबिले वालो ने कहाँ बंदी बनाया हुआ है।
राघव उन लोगो को काशी को कबिले से बाहर ले जाता हुए देख लेता है, तभी राघव मन ही मन बुदबूदाते हुए कहा, ये तो इस कबिले की सरदार की बेटी है और ये लोग कौन है? कही इसे किडनैप तो नहीं कर रहे है. मुझे सरदार को बताना होगा.
राघव एक दो, बार आवाज लगाते हुए कहता है, सरदार! सरदार जल्दी उठो, फिर सोचता है अगर मै सरदार को उठाने के लिए गया, तो काफी देर हो जाएगी और तब तक पता नहीं ये लोग सरदार की बेटी को ले जाकर कहाँ छुपा दे, और वैसे भी ये जंगल बहुत बडा है.
ये सोचकर राघव उन लोगो का पीछा करने लग जाता है, तब तक वे कबिले से बाहर निकल जाते है, राघव भी अपनी कांस्य की तलवार लिए हुए उनके पीछे ही दौड पडता है, और उनको रोकते हुए कहता है, रुक जाओ! और सरदार की बेटी को छोड दो नहीं तो अच्छा नहीं होगा.
राघव की बात सुनकर वे रुक जाते है और राघव की ओर देखने लगते है और कहा, तुम तो इस कबिले के नहीं लगते हो? कहाँ से आए हो?
राघव बोलता है, मै यहाँ से कई मिलो दूर कलिंग गाँव से आया हूँ. तुम इस लडकी को कहाँ लेकर जा रहे हो.
वहाँ महारत की भी नींद खुल जाती है, और सोचते हुए कहता है मुझे कौन बुला रहा था, कही काशी या छाया तो नहीं? ये सोचकर वह उस जगह पर जाने लग जाता है, जहाँ काशी सोई हुई थी.अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....