Fannaah: An Impossible Love Story - 8 Neelam Panwar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Fannaah: An Impossible Love Story - 8

अध्याय 8 : दूसरी परिक्षा – खून की प्यास


सभा में सन्नाटा पसरा हुआ था। हर वैम्पायर की नज़र अनन्या पर थी। पहली परिक्षा पार कर लेने के बाद भी कोई मानने को तैयार नहीं था कि एक नाज़ुक इंसान वाकई इस दुनिया में टिक सकती है।

राजवंत ने ठंडी आवाज़ में कहा –

“पहली परिक्षा ने दिखा दिया कि यह लड़की डर को हरा सकती है। लेकिन असली कसौटी अब शुरू होगी। वैम्पायर की ज़िंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा है… खून। अगर यह लड़की खून के सामने अपनी नफ़रत और कमजोरी छोड़कर मज़बूत खड़ी रह सके, तभी हम मानेंगे कि यह हमारे बीच रहने योग्य है।”

अनन्या को सभा के बीच लाया गया। ज़मीन पर एक पत्थर का कटोरा रखा गया, जिसमें ताज़ा इंसानी खून भरा हुआ था। उसकी गंध चारों तरफ़ फैल गई।

वैम्पायरों की आँखें लाल हो उठीं। कुछ बमुश्किल खुद को रोक पा रहे थे।

अनन्या का चेहरा पीला पड़ गया। उसने इतनी तेज़ और अजीब गंध पहले कभी महसूस नहीं की थी। उसके पेट में मिचली उठने लगी।

राजवंत ने आदेश दिया –

“लड़की को इस खून के सामने खड़ा करो। देखेंगे, यह इंसान खून देखकर भागती है… या टिकती है।”

आदित्य का दिल कसक रहा था। वह समझता था कि अनन्या के लिए यह सबसे कठिन इम्तिहान है।

“ये ठीक नहीं है… वो इंसान है, खून उसके लिए डर और घृणा का प्रतीक है।”

लेकिन सभा ने उसकी बात अनसुनी कर दी।

“अगर वो तुम्हारे साथ रहना चाहती है, तो उसे खून की सच्चाई स्वीकार करनी ही होगी।”

अनन्या खून के कटोरे के पास खड़ी हो गई। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, आँखों में आँसू थे।

उसके सामने उसके डर उमड़ पड़े –

*“अगर मैं उल्टी कर दूँ या बेहोश हो जाऊँ… तो सब मुझे कमजोर समझेंगे। क्या मैं सच में आदित्य के लायक हूँ? क्या मैं उसकी दुनिया का हिस्सा बन सकती हूँ?”*

उसने खुद से कहा –

“प्यार सिर्फ़ फूलों और खुशबुओं का नाम नहीं है। अगर मुझे आदित्य की दुनिया का हिस्सा बनना है, तो मुझे उसके अंधेरे को भी अपनाना होगा।”

सभा ने आदेश दिया –

“इस खून को अपने हाथ में लो।”

अनन्या काँपते हाथों से कटोरा उठाती है। गंध इतनी तीखी थी कि उसका सिर चकराने लगा। लेकिन उसने आँखें बंद कर लीं और गहरी साँस ली।

“ये खून मुझे डराता है… लेकिन मैं जानती हूँ कि यही आदित्य की दुनिया की सच्चाई है। अगर मैं इसे नफ़रत से देखूँगी, तो मैं कभी उसका साथ नहीं दे पाऊँगी।”

उसने आँखें खोलकर सभा की ओर देखा और दृढ़ स्वर में बोली –

“मैं खून नहीं पी सकती, क्योंकि मैं इंसान हूँ। लेकिन मैं इस खून से नफ़रत भी नहीं करती। अगर इस खून ने आदित्य को ज़िंदा रखा है, तो मेरे लिए यह पवित्र है।”

सभा में फुसफुसाहट गूँजने लगी।

“इंसान होकर ये लड़की खून को स्वीकार कर रही है?”

“इसने तो हमें भी सोचने पर मजबूर कर दिया…”

राजवंत की आँखों में हल्की चमक आई।

“यह लड़की डरती है, घृणा भी करती है… लेकिन फिर भी स्वीकार कर लेती है। यही असली ताक़त है।”

आदित्य की आँखों में गर्व

आदित्य आगे बढ़ा और अनन्या का हाथ थाम लिया।

“तुमने कर दिखाया। मैं जानता था कि तुम्हारा दिल मेरी जाति से भी बड़ा है।”

अनन्या मुस्कुराई।

“प्यार का मतलब ही है स्वीकार करना… तुम्हें जैसे हो वैसे। तुम्हारी दुनिया, तुम्हारी सच्चाई… सब मेरी है।”

राजवंत ने सभा को शांत किया और कहा –

“दूसरी परिक्षा भी पूरी हुई। लेकिन अब आखिरी और सबसे कठिन परिक्षा बाकी है। इसमें यह लड़की साबित करेगी कि क्या यह वाकई हमारे बीच जीने लायक है… या मरने लायक।”

सभा में सन्नाटा छा गया। और आदित्य का दिल बेचैनी से धड़कने लगा।