Fannaah: An Impossible Love Story - 7 Neelam Panwar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Fannaah: An Impossible Love Story - 7

अध्याय 7 : पहली परिक्षा – डर की घाटी

अनन्या ने गहरी साँस ली और सुरंग की ओर कदम बढ़ाए। जैसे ही उसने अंदर प्रवेश किया, चारों तरफ़ घना अंधेरा छा गया। बाहर खड़े वैम्पायर हँस रहे थे –

“ये नाज़ुक-सी लड़की डर की घाटी से जिंदा बाहर नहीं आएगी।”

लेकिन आदित्य की आँखें सिर्फ़ अनन्या पर टिकी थीं। उसका दिल धड़क रहा था, मानो वो खुद उस सुरंग में हो।

सुरंग का अंधेरा इतना गहरा था कि अनन्या को अपने हाथ भी दिखाई नहीं दे रहे थे। अचानक ठंडी हवा का झोंका आया और उसके कानों में एक आवाज़ गूँजी –

“तू अकेली है… तेरा कोई नहीं।”

अनन्या काँप उठी। उसे लगा कोई अदृश्य साया उसके पीछे-पीछे चल रहा है। उसने मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।

फिर सामने अचानक एक दृश्य उभर आया।

पहला डर – अपने प्रिय को खोने का

उसने देखा, आदित्य ज़मीन पर पड़ा है। उसके शरीर से खून बह रहा है और चारों तरफ़ वैम्पायर उसे घेरकर हँस रहे हैं।

“आदित्य!” – अनन्या चीख पड़ी और उसकी ओर दौड़ी।

लेकिन जैसे ही उसने आदित्य को छूना चाहा, उसका शरीर राख बनकर बिखर गया।

अनन्या वहीं घुटनों के बल गिर गई। आँसू उसकी आँखों से बहने लगे।

“नहीं… ये सच नहीं हो सकता… ये बस मेरा डर है…”

उसने खुद को संभालते हुए कहा –

“मुझे आदित्य पर भरोसा है। वो इतनी आसानी से हार नहीं सकता। और अगर कभी ऐसा हुआ भी… तो मैं भी उसके साथ रहूँगी।”

जैसे ही उसने ये कहा, वो दृश्य गायब हो गया।

दूसरा डर – अपने परिवार की नफ़रत

अब उसके सामने उसका परिवार खड़ा था। माँ-पापा और उसके भाई-बहन। उनके चेहरे पर गुस्सा और नफ़रत थी।

उसके पिता ने कठोर स्वर में कहा –

“तूने हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी। एक वैम्पायर से प्यार करके तूने हमें धोखा दिया।”

उसकी माँ ने रोते हुए कहा –

“अनन्या, तू अब हमारी बेटी नहीं रही।”

ये सुनकर अनन्या की आँखें भर आईं।

“मैं आप सबसे बहुत प्यार करती हूँ… लेकिन क्या प्यार करना गुनाह है? मैं गलत नहीं हूँ। अगर आप मुझे छोड़ भी दें… तो भी मैं अपने प्यार को नहीं छोड़ूँगी।”

जैसे ही उसने ये शब्द कहे, परिवार का दृश्य भी धीरे-धीरे धुंध में बदल गया और गायब हो गया।

अब अचानक अंधेरे से कई हाथ निकलकर अनन्या को पकड़ने लगे। वो हाथ बर्फ़ जैसे ठंडे थे। उन्होंने उसके पैरों और हाथों को जकड़ लिया।

अचानक उसके सामने खुद उसकी ही लाश दिखाई दी – ज़मीन पर पड़ी, आँखें बंद और चेहरा पीला।

अनन्या का साँस रुकने लगा। उसे लगा कि सचमुच उसका दम घुट रहा है। लेकिन तभी उसने आदित्य की कही बात याद की

“डर असली नहीं होता… ये सिर्फ़ तेरे मन में है।”

उसने पूरी ताक़त लगाकर चिल्लाया –

“मैं जिंदा हूँ! और जब तक मेरा प्यार जिंदा है, मैं कभी हार नहीं सकती!”

इतना कहते ही सारे हाथ धुएँ में बदलकर गायब हो गए। उसकी लाश भी गायब हो गई। और धीरे-धीरे सुरंग का अंधेरा हटने लगा।

अनन्या बाहर निकल आई। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, कपड़े अस्त-व्यस्त थे, लेकिन आँखों में चमक थी।

सभा के वैम्पायर हैरानी से उसे देख रहे थे।

“ये असंभव है… एक इंसान डर की घाटी से कैसे निकल सकती है?”

राजवंत ने गंभीर नज़रों से अनन्या को देखा और बोला –

“पहली परिक्षा पूरी हुई। यह लड़की वाकई अलग है। अब इसे दूसरी परिक्षा दी जाएगी।”

आदित्य दौड़कर अनन्या के पास आया। उसने उसका चेहरा थाम लिया।

“तुमने कर दिखाया, अनन्या। मैं तुम पर गर्व करता हूँ।”

अनन्या मुस्कुराई।

“मैंने कहा था न… मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूँगी।”