अध्याय 4 : अनकहा रिश्ता और छिपा ख़तरा
रात धीरे-धीरे ढल रही थी। जंगल का रास्ता पीछे छूट चुका था और अब दूर कहीं गाँव की बत्तियाँ दिखाई देने लगी थीं। अनन्या और आदित्य बिना कुछ कहे बस चलते जा रहे थे। लेकिन उनके दिलों में बहुत कुछ बदल चुका था।
अनन्या अब जान चुकी थी कि आदित्य इंसान नहीं, एक वैम्पायर है। डर होना चाहिए था, लेकिन उसके दिल में एक अजीब-सी शांति थी। शायद इसलिए क्योंकि उसने अभी-अभी देखा था कि आदित्य ने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी – खून की प्यास – पर जीत हासिल की थी।
चलते-चलते अनन्या बोली –
“आदित्य, क्या तुम्हें कभी लगता है कि तुम्हारी ज़िंदगी सामान्य हो सकती थी? जैसे आम इंसानों की होती है।”
आदित्य ने आसमान की ओर देखा। तारों की हल्की-सी झलक दिख रही थी।
“कभी-कभी सोचता हूँ… काश मैं भी दूसरों की तरह जी पाता। लेकिन हर बार सच्चाई मुझे वापस खींच लाती है। मैं अमर हूँ, अनन्या। समय मेरे लिए थमा हुआ है। लोग बूढ़े हो जाते हैं, मर जाते हैं… लेकिन मैं वहीं का वहीं खड़ा रह जाता हूँ। यही मेरी सबसे बड़ी सज़ा है।”
अनन्या चुप रही। उसके दिल में दर्द-सा उठा।
“तो क्या तुम कभी… प्यार नहीं कर सकते?”
आदित्य मुस्कुराया, लेकिन उसकी मुस्कान में गहरा दर्द था।
“प्यार मेरे लिए सबसे बड़ा ख़तरा है। अगर मैं किसी इंसान से जुड़ जाऊँ तो या तो मैं उसे खो दूँगा… या खुद को। और अगर मैं अपनी प्यास पर काबू न रख पाया… तो उस इंसान की मौत मेरे हाथों होगी।”
अनन्या ने उसकी ओर देखा।
“लेकिन तुमने तो अभी खुद को रोक लिया। शायद तुम्हारे लिए प्यार ही सबसे बड़ी ताक़त है।”
आदित्य की आँखों में पहली बार उम्मीद की चमक आई।
धीरे-धीरे दोनों गाँव के करीब पहुँच गए। लेकिन जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे थे, आदित्य बेचैन होता जा रहा था।
“मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था।” – उसने कहा।
“क्यों?” – अनन्या ने पूछा।
“क्योंकि इंसान की दुनिया और मेरी दुनिया कभी एक नहीं हो सकती। अगर मेरे जैसे दूसरे वैम्पायर्स को पता चला कि मैं इंसानों के बीच हूँ… तो यह तुम्हारे लिए भी ख़तरनाक होगा।”
अनन्या चौंक गई।
“मतलब… और भी वैम्पायर्स हैं?”
आदित्य ने सिर झुका लिया।
“हाँ। और वे मेरे जैसे नहीं हैं। वे इंसानों को सिर्फ़ शिकार समझते हैं। अगर उन्हें पता चल गया कि मैं किसी इंसान की परवाह करता हूँ, तो…”
वह वाक्य अधूरा छोड़कर चुप हो गया।
अनन्या को पहली बार एहसास हुआ कि यह रिश्ता सिर्फ़ उनके बीच की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें बाहर से भी खतरे हैं।
गाँव के बिल्कुल पास पहुँचने ही वाले थे कि अनन्या ने पीछे देखा। उसे लगा जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो।
“आदित्य… तुमने सुना? कोई हमारे पीछे है।”
आदित्य ने तुरंत रुककर ध्यान लगाया। उसके कान और आँखें सामान्य इंसानों से कहीं ज़्यादा तेज़ थीं। उसने हवा को सूंघा और उसकी आँखों में गुस्सा चमक उठा।
“हाँ… कोई है। और वह इंसान नहीं।”
अनन्या डर गई।
“क…कौन?”
आदित्य की आवाज़ गहरी हो गई।
“मेरे जैसे… लेकिन मेरे दुश्मन।”
अचानक पेड़ों के पीछे से दो परछाइयाँ बाहर आईं। दोनों की आँखें खून जैसी लाल थीं और चेहरों पर खतरनाक मुस्कान।
“तो ये रहा हमारा आदित्य… इंसानों के साथ दोस्ती करता हुआ।” – उनमें से एक ने ताना मारा।
अनन्या का खून सूख गया।
“ये… ये भी वैम्पायर हैं?”
आदित्य उसके सामने खड़ा हो गया। उसकी आवाज़ गरज रही थी –
“अनन्या, मेरे पीछे रहना। ये तुम्हें नुकसान पहुँचाएँगे।”
वे दोनों वैम्पायर आदित्य के चारों ओर घूमने लगे।
“तुमने हमारी जाति से गद्दारी की है, आदित्य। इंसान को बचाते हो? उससे मोहब्बत करते हो? ये तुम्हारी मौत का कारण बनेगा।”
आदित्य की आँखें जलने लगीं। उसके दाँत बाहर आ गए।
“अगर तुमने अनन्या की तरफ़ एक कदम भी बढ़ाया… तो मैं तुम दोनों को खत्म कर दूँगा।”
वातावरण में तनाव भर गया। हवा और ठंडी हो गई। अनन्या काँपते हुए पीछे खड़ी रही।
पहली बार उसने देखा कि आदित्य कितना खतरनाक हो सकता है। लेकिन उस खतरनाक रूप में भी उसे अपने लिए सुरक्षा महसूस हो रही थी।
लड़ाई शुरू होने से ठीक पहले आदित्य ने पीछे मुड़कर अनन्या से कहा –
“याद रखना, अनन्या… चाहे जो हो, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा। तुम मेरी कमज़ोरी नहीं… मेरी ताक़त हो।”
अनन्या की आँखों से आँसू बह निकले।
वह समझ चुकी थी कि यह रिश्ता अब सिर्फ़ प्यार नहीं, बल्कि एक जंग भी है।
और उसी पल उसने ठान लिया – चाहे जो हो, मैं भी आदित्य का साथ कभी नहीं छोड़ूँगी।