Fannaah: An Impossible Love Story - 3 Neelam Panwar द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Fannaah: An Impossible Love Story - 3

अध्याय 3 : खून की प्यास और पहली परीक्षा


रात गहराती जा रही थी। आसमान अब बादलों से ढक चुका था और चाँद की रोशनी भी ग़ायब हो गई थी। जंगल का रास्ता और डरावना लगने लगा था। लेकिन अनन्या अब आदित्य के साथ चल रही थी। उसके अंदर डर कम हो गया था, लेकिन यह रहस्य अभी भी उसे खाए जा रहा था कि वह जिस पर भरोसा कर रही है, वह इंसान नहीं बल्कि एक वैम्पायर है।

अनन्या ने धीमी आवाज़ में पूछा –

“आदित्य… आप सच में अपने आप पर काबू रख सकते हैं? मेरा मतलब… अगर आपके सामने खून आ जाए तो?”

आदित्य रुक गया। उसकी आँखों में गहरी बेचैनी उतर आई।

“यह सवाल… मेरे लिए सबसे कठिन है। मैं कई सालों से कोशिश कर रहा हूँ, अनन्या। मैंने अपने जैसे कई वैम्पायर्स को इंसानों का खून पीते देखा है। लेकिन मैं… मैं अलग बनने की कोशिश कर रहा हूँ।”

अनन्या उसकी ओर देखती रही। उसके चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था।

“तो क्या कभी ऐसा हुआ है… कि आपने किसी इंसान को चोट पहुँचाई हो?” – उसने हिचकिचाते हुए पूछा।

आदित्य ने आँखें झुका लीं।

“हाँ… सालों पहले। जब मुझे अपनी ताक़त और अपनी भूख का पता नहीं था। उस दिन… मैंने किसी को खो दिया। तब से मैंने कसम खाई है कि मैं किसी इंसान का खून नहीं पीऊँगा।”

अनन्या का दिल सिहर गया, लेकिन उसकी आँखों में आदित्य के लिए सहानुभूति थी।

दोनों धीरे-धीरे गाँव की ओर बढ़ रहे थे। तभी अनन्या का पैर एक पत्थर से टकराया और उसके टखने पर गहरी खरोंच आ गई।

“आह!” – वह दर्द से कराह उठी।

घाव से खून बहने लगा। लाल बूंदें ज़मीन पर गिर रही थीं।

अनन्या ने ऊपर देखा… और आदित्य का चेहरा देखकर उसके दिल की धड़कन थम-सी गई।

आदित्य की आँखें चमक उठी थीं। उनमें लालिमा और भी गहरी हो गई थी। उसके नुकीले दाँत बाहर निकलने लगे। वह बेतहाशा साँस लेने लगा।

“आ… अनन्या…” – उसकी आवाज़ भारी और काँपती हुई थी।

“तुम्हारा खून… इसकी खुशबू…”

अनन्या का दिल बैठ गया। उसने जल्दी से घाव को ढकने की कोशिश की, लेकिन खून की गंध हवा में फैल चुकी थी।

आदित्य पीछे हट गया। उसके हाथ काँप रहे थे।

“मैं… मैं नहीं कर सकता… मुझे दूर रहना होगा।”

लेकिन उसके कदम जैसे अपने आप अनन्या की ओर बढ़ रहे थे।

अनन्या ने काँपते हुए कहा –

“आदित्य… आप वादा कर चुके हैं। आप मुझे चोट नहीं पहुँचाएँगे।”

आदित्य ने अपने कान ढक लिए और ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया।

“मैं कोशिश कर रहा हूँ… लेकिन यह प्यास… यह मुझे तोड़ रही है। तुम्हारे खून की खुशबू… मैं इसे रोक नहीं पा रहा।”

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

“तुम समझ नहीं सकती, अनन्या। यह मेरे अंदर का दानव है। हर बार जब मैं किसी इंसान के करीब आता हूँ, यही डर मुझे खा जाता है कि कहीं मैं उन्हें खो न दूँ।”

अनन्या उसके पास आई। उसके दिल में डर तो था, लेकिन उससे भी ज़्यादा विश्वास।

उसने धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाया।

“अगर तुम सच में मुझसे दूर जाना चाहते हो तो जाओ। लेकिन अगर तुम मुझ पर भरोसा करते हो… तो खुद को संभालो। मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

आदित्य ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में लालिमा और दर्द दोनों थे।

“तुम्हें अंदाज़ा नहीं है, अनन्या… मैं कितना पास हूँ तुम्हें चोट पहुँचाने के। बस एक पल… और मैं सब कुछ खो दूँगा।”


अनन्या ने उसकी आँखों में गहराई से देखा और कहा –

“तो खुद को जीत लो। यही तुम्हारी असली ताक़त है। अगर तुम सच्चे हो… तो मेरा खून तुम्हारे लिए इम्तहान है, न कि इनाम।”

आदित्य ज़ोर से चिल्लाया। उसकी चीख़ जंगल में गूँज उठी। उसने अपने दाँत दबा लिए और ज़मीन पर मुक्का मारा।

कुछ ही सेकंड बाद उसकी आँखों की लालिमा कम हो गई और उसकी साँसें सामान्य होने लगीं।

वह धीरे-धीरे उठा और अनन्या के सामने आकर बोला –

“मैंने… मैंने खुद पर काबू पा लिया। तुम्हारे लिए।”

अनन्या की आँखों में आँसू थे।

“तो अब मुझे भरोसा है कि तुम मुझे कभी चोट नहीं पहुँचाओगे।”

आदित्य ने पहली बार मुस्कुराने की कोशिश की।

“शायद… तुम ही वह वजह हो जिसकी मुझे बरसों से तलाश थी। तुम ही मेरी रोशनी हो।”

अनन्या ने धीरे-धीरे उसका हाथ थाम लिया। उसके स्पर्श से आदित्य का दिल पहली बार इंसान जैसा धड़कने लगा।

और वहीं, उस रात, आदित्य ने अपनी सबसे बड़ी परीक्षा जीत ली – इंसानी खून की प्यास पर अपने प्यार की जीत।