काफी दूर चले जाने के बाद मधु ने सांसे भरते हुए कहा, "मुझसे अब और नहीं चला जाएगा मैं काफी थक चुकी हूं।"
यह सुनकर राघव ने कहा, "चलो कहीं रुक कर आराम कर लेते हैं।" वहां पर उन्हें एक पेड दिखाई देता है राघव ने उस ओर इशारा करते हुए कहा, "चलो वहीं पर रुककर आराम कर लेते हैं।" वे दोनों उस पेड़ के नीचे कुछ देर आराम करने के बाद वापिस काली पहाड़ी की ओर चल देते है। कुछ दूर चलने के बाद वे दोनों एक बाजार में पहुंच जाते हैं। बाज़ार में काफी भीड़ थी और साथ ही बहुत सी दुकाने भी.... राघव बडी ध्यान सा दुकानों को देख रहा था जैसे वह कुछ ढूंढ रहा हो।
मधु ने कहा, क्या हुआ? राघव तुम क्या ढूंढ रहे हो? अभी पता चल जाएगा कि मैं क्या ढूंढ रहा था, तुम यही रुको मैं अभी आया.... राघव ने कहा, और दौड़ता हुआ बाज़ार में एक दुकान के पास पंहुचा जिसमे भाले, तलवारे और खंजर थे।
राघव उस दुकान से दो कांस्य की तलवारे खरीदकर ले आता है. और एक तलवार मधु को थमाते हुए कहता है, हालांकि यहाँ कांस्य की तलवारे ही मिली है लेकिन एक 'बचाव हथियार'होना जरुरी है "इसको तुम रखो आगे बहुत खतरा है काम आएगी. राघव और मधु दोनों हाथ में उस कांस्य की तलवार को लेकर काली पहाडी की ओर निकल जाते हैं.
थोडी दूर और चलने के बाद में दोनों काली पहाडी पर पहुंच जाते हैं. वहां पर उन दोनों को एक घना जंगल दिखाई देता है. उस जंगल के शुरू होने से पहले एक विशाल पेड दिखाई देता है। राघव ने एक मुस्कान के साथ कहा, आख़िरकार हम काली पहाड़ी के जंगल तक पहुंच ही गए.... चलो अब बिना देरी करे अंदर चलते है।
राघव और मधु जैसे ही उस जंगल के अंदर जाने की कोशिश करते है, अचानक एक अदृश्य शक्ति से टकराकर गिर जाते हैं. उस जंगल के चारों तरफ एक अदृश्य कवच बना हुआ था.
तभी अचानक उस विशाल पेड से आवाज गूँजती है जोकि काली पहाडी के जंगल के शुरू होने से ठीक पहले था. तुम इस जंगल के अंदर ऐसे नहीं जा सकते है। इसके चारों ओर मेरी शक्तियों से अदृश्य कवच बना हुआ है.
राघव ने बताते हुए कहा, हमें दिव्यागिरी नामक पहाड पर जाना है जिसका रास्ता इस जंगल से होकर ही गुजरता है.
पेड से आवाज आती है जाने दूंगा पर मेरी एक शर्त है!
मधु ने गंभीर आवाज में कहा, "कैसी शर्त?"
तुम्हें मेरे तीन पहेलियों का उत्तर देना होगा यदि तुम इन तीन पहेलियों का सही उत्तर देते हो, तभी तुम इस जंगल के अंदर जा सकते हो. और तुम दोनों को सही जवाब बताने के लिए केवल दो मौके मिलेंगे अगर तुम एक भी पहेली का गलत जवाब देते हो, तो तुम इस जंगल के अंदर नहीं जा सकते... पेड़ से आवाज़ गूँजी।
राघव ने कहा, ठीक है! तुम्हारी पहली पहेली क्या है?
"प्यास लगे तो पी सकते हैं, भूख लगे तो खा सकते हैं और अगर ठण्ड लगे तो उसे जला भी सकते हैं. बोलो क्या है वो?" पेड़ ने गूँजती हुई आवाज़ में कहा...
मधु ने कहा, संतरा... जिसको हम खा भी सकते है और उसके छिलको को जला भी सकते है.
"गलत जवाब!" तुम तो पहली पहेली पर ही दम तोड़ दोगे, अब बस एक मौका और बचा... अगर तुम नहीं बता पाए तो तुम्हे वापिस जाना होगा। बोलो लड़के! पेड़ से आवाज़ गूँजी।
थोडी देर सोचने के बाद राघव ने कहा, नारियल, जिसको हम खा सकते है, पी सकते है और जला भी सकते है.
पेड से आवाज आई, "सही जवाब!" लड़के तुमने पहली पहेली ही सही बताई है ज्यादा ख़ुश मत हो...
राघव ने कहा, "लगता है हमारे सही जवाब से किसी को कुछ ज्यादा ही निराशा हो रही है, हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। अगली पहेली क्या है?"
"बरगद के वृक्ष के नीचे चार लोग बैठे हैं, लंगडा, बहरा, अंधा, लुल्ला. पेड से आम गिरने पर सबसे पहले कौन उठाएगा." पेड़ से आवाज़ गूँजी ये है दूसरी पहेली...
मधु ने कहा, "बहरा उठा सकता है क्युकी वह इन सभी से तेज भाग सकता है."
राघव ने कहा, "कोई नहीं उठाएगा...
"कोई नही उठाएगा क्या मतलब है, तुम्हारे कहने का लड़के साफ़-साफ़ बोलो..." पेड़ से आवाज़ गूँजी।
राघव ने कहा, ठीक है तो बिल्कुल कान खोल कर सुनो। क्योंकि वे चारो बरगद के पेड के निचे बैठे हैं और बरगद के पेड से आम नहीं गिर सकता...
"सही जवाब... " मुझे अंदाजा नहीं था कि तुम इस पेहली का जवाब दे पाओगे। मधु ने खुशी के साथ कहा, अब बस आखिरी पहेली बताओ क्या है?
"ऐसी क्या चीज है जिसे बनाने में काफी वक्त लगता है, लेकिन टूटने में एक क्षण भी नहीं लगता?" पेड़ से आवाज़ गूँजी...
राघव सोच ही रहा होता है, तभी मधु कहती है इसका जवाब मुझे पता है भरोसा...
पेड़ से आवाज़ गूँजी, "तुम्हारा आखरी पहेली का जवाब भी.... सही है,"
तुम दोनों इस जंगल के अंदर जा सकते हो. पेड के ऐसा कहते ही वह अदृश्य कवच हट जाता है. पेड उन्हें सचेत करते हुए कहता है, मेरी मानो तो वापिस लौट जाओ, क्योंकि जिस काम को करने के लिए तुम इस जंगल से होते हुए जा रहे हो अगर वह नहीं हुआ तो तुम इस जंगल से बाहर नहीं आ पाओगे....
राघव ने कहा, बताने के लिए धन्यवाद! लेकिन हमारा जाना जरूरी है. ये कहकर राघव और मधु काली पहाडी के जंगल के अंदर चले जाते है. वे दोनों देखते है कि जंगल काफी घना था. तभी मधु को कुछ चीटिंयो का समहू दिखाई पडता है.
मधु राघव को बताते हुए कहती है, "राघव इन चीटियों को देखो, ये कोई साधारण चीटिया नहीं है" Bullet Ant" है.
" Bullet Ant" मतलब.... राघव ने कहा। मधु ने कहा, राघव ये Bullet Ant" वे चीटिया होती है, जिनके काटने के बाद व्यक्ति को बुलेट लगने जैसा दर्द होता है.
"अगर इस जंगल की चीटिया इतनी खतरनाक है, तो आगे जंगल कितना खतरनाक होगा... हम दोनों को संभलकर चलना होगा. राघव ने सचेत करते हुए कहा। दोनों हाथ मे कांस्य की तलवार लिए हुए आगे बढ जाते है. तभी अचानक से मधु का पैर पेड की जडो मे फँस जाता है, वह जितना उससे बाहर निकलने के लिए जोर लगाती है वह उतनी ही और फँसने लग जाती है.
मधु रुक जाओ! तुम जितना इसे बाहर निकलने के लिए जोर लगा रही हो उतनी ही ये जडे मजबूत हो रही है. राघव ने कहा। मधु इन जडो से बाहर कैसे निकली? जानने के लिए पढ़ते रहिए.....