धड़कनों की बेईमानी और वो तूफानी रात
जैसे ही कबीर के जूतों की आवाज़ डाइनिंग हॉल की तरफ बढ़ी, अयान ने घबराकर झटके से अपना हाथ रुद्र की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन रुद्र ने एक सेकंड के लिए अयान की उंगलियों को और कसकर भींचा, उसके चेहरे पर एक बहुत ही हल्की सी शरारती मुस्कान आई और फिर उसने बड़े आराम से अयान का हाथ और पानी का गिलास छोड़ दिया।
रुद्र वापस अपनी चेयर पर ऐसे सीधे होकर बैठ गया जैसे कुछ हुआ ही न हो। उसका चेहरा फिर से एकदम गंभीर और शांत हो गया था।
"लो भाई, पानी की ठंडी बोतलें!" कबीर ने टेबल पर बोतलें रखते हुए कहा। उसने अयान की तरफ देखा, जो इस वक्त पूरी तरह लाल हो चुका था और उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
"अरे अयान, तुझे क्या हुआ यार? तेरा चेहरा इतना लाल क्यों है? और तू हांफ क्यों रहा है, एसी तो चल रहा है?" कबीर ने अयान के माथे पर हाथ लगाने के लिए हाथ बढ़ाया।
अयान ने घबराकर कबीर का हाथ हटाया और हकलाते हुए बोला, "कुछ... कुछ नहीं कबीर, वो बस... बस अचानक थोड़ी गर्मी सी लगी और थोड़ा सा पानी गले में अटक गया था।" अयान ने नजरें उठाकर सामने देखा, तो रुद्र बड़े मजे से पानी का घूंट ले रहा था, लेकिन उसकी तीखी नजरें अभी भी अयान के चेहरे पर ही टिकी हुई थीं। अयान को समझ आ गया था कि रुद्र उसकी घबराहट का पूरा मज़ा ले रहा है।
डिनर खत्म होने के बाद, कबीर के पापा और मम्मी कमरे में आराम करने चले गए। कबीर ने अयान का हाथ पकड़ा, "चल अयान, छत पर चलते हैं। आज मौसम बहुत अच्छा है, वहां बैठकर थोड़ी देर बातें करेंगे और फिर सो जाएंगे।"
दोनों हवेली की तीसरी मंजिल पर बनी विशाल छत पर आ गए। रात के करीब 10 बज रहे थे और ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी। दिल्ली की वो आलीशान रात और आसमान में चमकते सितारे बहुत खूबसूरत लग रहे थे। अयान रेलिंग के पास खड़ा होकर ठंडी हवा को महसूस कर रहा था, जिससे उसके दिल की बेचैनी थोड़ी कम हो रही थी।
"अयान, एक बात बता..." कबीर ने रेलिंग पर टेक लगाते हुए अचानक गंभीर होकर पूछा।
अयान का दिल धक से रह गया, "क्या... क्या बात कबीर?"
"तू मेरे भाई रुद्र से इतना डर क्यों रहा है? नीचे टेबल पर भी तू बहुत अजीब बिहेव कर रहा था। देख भाई, रुद्र भले ही दिखने में कड़क और सीरियस है, लेकिन वो किसी को बिना वजह कुछ नहीं कहता। तू इतना संकोच मत कर," कबीर ने हंसते हुए कहा।
अयान ने राहत की सांस ली कि कबीर को कुछ और शक नहीं हुआ। उसने मुस्कुराकर कहा, "नहीं यार, डर नहीं है। बस बड़े भाई हैं ना तुम्हारे, और वो इतने बड़े आर्किटेक्ट हैं, तो थोड़ा अजीब लगता है।" अयान मन ही मन सोच रहा था कि वह कबीर को कैसे बताए कि वह रुद्र से डर नहीं रहा, बल्कि उनके परफ्यूम की खुशबू और उनकी नज़रों में पूरी तरह खो चुका है।
तभी अचानक छत के लोहे के भारी दरवाजे के खुलने की आवाज़ हुई।
ठंडी हवा के झोंके के साथ वही जानी-पहचानी 'चंदन और मिंट' की खुशबू अयान के नथुनों से टकराई। अयान ने मुड़कर देखा—रुद्र छत पर आ चुका था। इस वक्त उसने अपनी ब्लैक शर्ट की जगह एक ढीली-ढाली ग्रे कलर की टी-शर्ट पहन रखी थी और उसके हाथ में एक कॉफी का मग था। बिना चश्मे के, रात के अंधेरे में उसकी आँखें और भी ज़्यादा गहरी और सम्मोहक लग रही थीं।
"भाई! आप सोए नहीं अभी तक?" कबीर ने पूछा।
"नहीं, एक नए प्रोजेक्ट का मैप डिज़ाइन करना था, तो बस कॉफी पीने ऊपर आ गया," रुद्र ने गहरी आवाज़ में कहा और धीरे-धीरे चलते हुए ठीक अयान के बगल में आकर खड़ा हो गया।
रेलिंग पर हाथ रखते हुए, रुद्र का मजबूत कंधा अयान के कंधे से हल्का सा छू गया। उस मामूली से छुअन से अयान के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई।
"वैसे अयान..." रुद्र ने अपनी कॉफी का सिप लेते हुए अयान की तरफ देखा, "कल सुबह मैं ऑफिस के काम से कनॉट प्लेस जा रहा हूँ। कबीर कह रहा था कि तुम्हें अपनी कॉलेज की लाइब्रेरी के लिए कुछ खास किताबें खरीदनी हैं। अगर चाहो... तो कल सुबह मेरे साथ चल सकते हो।"
रुद्र का यह ऑफर सुनकर अयान की आँखें अचरज से बड़ी हो गईं। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो रुद्र इतना कड़क है, वह खुद उसे साथ चलने के लिए कह रहा है।
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