छुपा हुआ एहसास: एक अनकही कहानी` - एपिसोड 2 Pihu Patel द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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छुपा हुआ एहसास: एक अनकही कहानी` - एपिसोड 2

रुद्र के कमरे से बाहर जाने के बाद भी अयान के दिल की धड़कनें शांत होने का नाम नहीं ले रही थीं। कबीर बेड पर लेटा हुआ अपने फोन में मसरूफ था, लेकिन अयान की नजरें बार-बार अपनी हथेलियों पर जा रही थीं, जहाँ अभी कुछ देर पहले रुद्र के मजबूत हाथ की गर्माहट महसूस हुई थी। 'चंदन और मिंट' की वो खुशबू अभी भी कमरे की हवा में घुली हुई थी।
"अयान, कबीर! नीचे आओ बच्चों, डिनर लग गया है," नीचे से कबीर की मम्मी की प्यारी सी आवाज़ गूंजी।
"आए मम्मी!" कबीर ने चिल्लाकर जवाब दिया और अयान का कंधा हिलाते हुए बोला, "चल भाई, भूख के मारे मेरे पेट में चूहे कूद रहे हैं। आज तो मम्मी ने तेरे आने की खुशी में लाजवाब शाही पनीर और पुलाव बनाया है।"
अयान ने एक गहरी सांस ली, अपने बिखरे बालों को ठीक किया और कबीर के पीछे-पीछे नीचे हॉल की तरफ चल दिया। उसका दिल अंदर ही अंदर इस बात से घबरा रहा था कि नीचे डाइनिंग टेबल पर रुद्र भी मौजूद होगा।
जब वे दोनों नीचे पहुँचे, तो डाइनिंग एरिया की भव्यता देखकर अयान एक बार फिर हैरान रह गया। एक बड़ी सी कांच की छह सीटों वाली डाइनिंग टेबल सजी हुई थी, जिस पर चांदी के बर्तनों में गरमा-गरम खाना परोसा गया था। टेबल के मुख्य हिस्से पर कबीर के पापा बैठे थे, जो अखबार देख रहे थे। उनके बगल में रुद्र बैठा हुआ था, जो अब अपने चश्मे को हटाकर बेहद शांति से अपने फोन में कुछ चेक कर रहा था। उसने ब्लैक शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल रखे थे, जिससे उसकी पर्सनालिटी और भी रफ-एंड-टफ लग रही थी।
"आओ अयान बेटा, बैठो। कबीर हमेशा तुम्हारे बारे में बताता रहता है," कबीर के पापा ने मुस्कुराते हुए अयान का स्वागत किया।
"नमस्ते अंकल," अयान ने बहुत ही शालीनता से हाथ जोड़कर कहा और कबीर के बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया। इत्तेफाक से, अयान की कुर्सी ठीक रुद्र के सामने थी।
जैसे ही अयान बैठा, रुद्र ने अपना फोन साइड में रखा और अपनी वो गहरी, तीखी आँखें सीधे अयान के चेहरे पर टिका दीं। अयान ने घबराकर तुरंत अपनी नजरें नीचे झुका लीं और अपनी उंगलियों को आपस में भींचने लगा।
कबीर की मम्मी ने अयान की प्लेट में खाना परोसते हुए कहा, "अयान बेटा, बिल्कुल शर्माना मत, अपना ही घर समझो। लखनऊ का खाना तो वैसे भी बहुत मशहूर है, उम्मीद है तुम्हें हमारे हाथ का स्वाद भी पसंद आएगा।"
"जी आंटी, थैंक यू," अयान ने धीमे से कहा।
पूरे डिनर के दौरान अयान का पूरा ध्यान सिर्फ अपनी प्लेट पर था। वह बहुत संभालकर चम्मच उठा रहा था, क्योंकि उसे महसूस हो रहा था कि सामने बैठा रुद्र बिना पलक झपकाए सिर्फ उसी को देख रहा था। जब भी अयान गलती से अपनी नजरें ऊपर उठाता, रुद्र की गहरी आँखें उसकी आँखों से टकरा जातीं। रुद्र के चेहरे पर कोई भाव नहीं था, लेकिन उसकी नज़रों में एक ऐसा अजीब सा आकर्षण था कि अयान का गोरा चेहरा शर्म से हल्का गुलाबी पड़ने लगा था।
"यार मम्मी, पानी खत्म हो गया, मैं किचन से और बोतलें लेकर आता हूँ," कबीर ने अपनी प्लेट साफ करते हुए कहा और उठकर किचन की तरफ चला गया। इसी बीच कबीर के पापा का कोई जरूरी फोन आया, तो वे भी बात करते हुए बाहर लॉन की तरफ चले गए। आंटी पहले ही किचन में कुछ काम से जा चुकी थीं।
अचानक, उस बड़ी सी डाइनिंग टेबल पर अयान और रुद्र अकेले रह गए। केबिन में एक गहरा सन्नाटा छा गया।
अयान ने घबराहट में पानी का गिलास उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन उसकी उंगलियां कांप रही थीं। जैसे ही उसने गिलास उठाया, वह उसकी पकड़ से छूटने लगा। लेकिन इससे पहले कि गिलास गिरता, सामने से एक मजबूत और लंबा हाथ आया और उसने हवा में ही गिलास को और अयान के हाथ को एक साथ थाम लिया।
वह रुद्र था। उसने टेबल पर आगे झुककर अयान का हाथ पकड़ रखा था।
"इतने नर्वस क्यों हो, अयान? क्या मैं तुम्हें इतना डरावना लगता हूँ?" रुद्र की वो भारी, मर्दाना आवाज़ अयान के कानों के पास गूंजी। रुद्र की आँखों में इस वक्त एक शरारती चमक थी।
अयान की सांसें जैसे गले में ही अटक गईं। रुद्र के हाथ की सख्त और गर्म छुअन से उसके बदन में एक मीठा सा दर्द दौड़ गया। वह कुछ बोल ही नहीं पा रहा था, बस उसकी आँखों में खोया हुआ था।
तभी पीछे से कबीर के वापस आने के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।