छुपा हुआ एहसास: एक अनकही कहानी` - एपिसोड 1 Pihu Patel द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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छुपा हुआ एहसास: एक अनकही कहानी` - एपिसोड 1

छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात

लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी खुशबू से दिन की शुरुआत होती थी। इसी कस्बे के एक छोटे से पक्के मकान में अयान अपने माता-पिता के साथ रहता था। अयान के पापा सरकारी स्कूल में मास्टर थे, और माँ पूरी तरह घरेलू महिला थीं। अयान उनका इकलौता और बेहद लाडला बेटा था।
"अयान... अरे ओ अयान! उठो लाल, तुम्हारी चाय ठंडी हो रही है," रसोई से पूड़ियाँ तलते हुए माँ ने आवाज़ लगाई।
अयान अपनी किताबों से सर उठाकर मुस्कुराया। 20 साल का अयान स्वभाव से इतना सीधा और शर्मीला था कि पूरे कस्बे में लोग उसकी सादगी की तारीफ करते थे। पढ़ाई में वह हमेशा अव्वल आता था, इसीलिए जब दिल्ली के एक बड़े कॉलेज में उसका एडमिशन हुआ, तो पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन साथ ही, माँ का दिल अपने मासूम बेटे को इतने बड़े शहर अकेले भेजने में घबरा रहा था।
स्टेशन पर जब अयान ट्रेन में बैठ रहा था, तो उसकी माँ ने उसकी जेब में कुछ पैसे रखे, माथा चूमा और रोते हुए कहा था, "अपना ख्याल रखना बेटा। वहाँ बड़े शहर के लोग बहुत तेज़ होते हैं, किसी अजनबी से ज़्यादा बात मत करना।"
अयान माँ के आँसू पोंछकर दिल्ली तो आ गया, लेकिन इस भागदौड़ और ऊंची-ऊंची इमारतों वाले शहर में वह खुद को बहुत अकेला पाता था। उसे अपने कस्बे की वो शांति और घर की याद सताती थी। लेकिन कॉलेज के पहले ही दिन उसकी किस्मत बदली, जब उसकी मुलाकात कबीर से हुई। कबीर दिल्ली के एक बहुत अमीर खानदान से था, लेकिन दिल का साफ और एकदम बिंदास था। अयान की शर्मीली फितरत और कबीर के चुलबुलेपन का ऐसा मेल बैठा कि दोनों की दोस्ती कॉलेज में मिसाल बन गई।
एक शाम, कॉलेज की कैंटीन में कबीर ने समोसे की प्लेट टेबल पर रखते हुए कहा, "यार अयान, तू आज मेरे घर साउथ दिल्ली चल रहा है और बस! कोई बहाना नहीं सुनूँगा। मम्मी ने तेरे लिए खास खाना बनाया है।"
अयान ने हिचकिचाते हुए अपनी किताबें बैग में रखीं, "भाई, तेरे घर आने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन तू जानता है ना मुझे नए लोगों से मिलने में थोड़ा संकोच होता है। मैं छोटे शहर का हूँ, तेरे बड़े घर में..."
"अरे चुप कर! मेरे घर में कौन सा मेला लगा है? सिर्फ मम्मी-पापा हैं, और... हाँ, मेरा बड़ा भाई रुद्र। वैसे वो अपने काम में इतना बिजी रहता है कि तुझे दिखेगा भी नहीं," कबीर ने अयान का हाथ पकड़कर गाड़ी की तरफ खींचते हुए कहा।
**रुद्र की आलीशान हवेली**
शाम के करीब 7 बजे कबीर की चमचमाती कार साउथ दिल्ली के एक बेहद पॉश इलाके में रुकी। अयान ने कार से उतरकर सामने देखा, तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं। उसने अपनी ज़िंदगी में इतनी बड़ी कोठी कभी नहीं देखी थी। सामने जो सफेद रंग की तीन मंजिला मॉडर्न हवेली खड़ी थी, वह कबीर के परिवार का पुश्तैनी बंगला था। घर के बाहर काले रंग का एक भारी सा रिमोट वाला गेट लगा था।
जैसे ही वे गेट के अंदर गए, पैरों के नीचे मखमली हरी घास का एक बड़ा सा लॉन था, जहाँ रंग-बिरंगे विदेशी पौधे लगे थे और कोने में एक छोटा सा फव्वारा चल रहा था। मुख्य दरवाजे से अंदर कदम रखते ही भव्य हॉल दिखाई दिया। हॉल का फर्श सफेद इटालियन मार्बल का था, जो इतना चमक रहा था कि उसमें अयान को अपना चेहरा दिख जाए।
हॉल के बीचों-बीच एक आलीशान गहरे भूरे (dark brown) रंग का मखमली सोफा सेट रखा था और छत से एक बेहद खूबसूरत कांच का झाड़ू-फानूस (chandelier) लटक रहा था, जिससे छनकर आ रही पीली और सुनहरी रोशनी पूरे घर को एक राजसी लुक दे रही थी। इस पूरे आलीशान घर से 'चंदन और मिंट' की एक महंगी सी खुशबू आ रही थी।
"आजा भाई, ऊपर मेरे कमरे में चलते हैं," कबीर अयान को सीढ़ियों से ऊपर ले गया। कबीर का कमरा भी किसी लग्जरी सुइट जैसा था। दोनों बेड पर बैठ गए और कॉलेज के प्रोजेक्ट पर बात करने लगे। अयान अभी भी इस आलीशान घर की भव्यता को देखकर थोड़ा नर्वस था। तभी अचानक कमरे का भारी लकड़ी का दरवाज़ा खुला।
"कबीर, मेरी गाड़ी की दूसरी चाबी कहाँ रखी है...?"
एक गहरी, मर्दाना और बेहद रौबदार आवाज़ कमरे में गूंजी। अयान ने जैसे ही अपनी नज़रें ऊपर उठाईं, उसकी सांसें वहीं की वहीं थम गईं।
दरवाजे पर जो लड़का खड़ा था, वह कबीर का बड़ा भाई रुद्र था। उम्र 25 साल, लंबा-चौड़ा कद (करीब 6 फीट), सलीके से सँवारे हुए घने काले बाल, and आँखों पर लगा ब्लैक-फ्रेम चश्मा उसकी पर्सनालिटी को और भी अट्रैक्टिव बना रहा था। वह ब्लैक शर्ट पहने हुए था, जिसकी स्लीव्स को उसने कोहनी तक मोड़ रखा था, जिससे उसकी कलाई की महंगी घड़ी और मजबूत हाथ साफ दिख रहे थे। रुद्र दिल्ली का एक बहुत बड़ा आर्किटेक्ट था। वह जितना हैंडसम था, उतना ही गंभीर और रहस्यमयी भी। जो 'चंदन और मिंट' की खुशबू नीचे आ रही थी, वो असल में रुद्र के परफ्यूम की ही थी।
"ओह भाई! आप आ गए? मिलिए, ये मेरा बेस्ट फ्रेंड है, अयान," कबीर ने खड़े होते हुए इंट्रोडक्शन कराया।
रुद्र ने अपनी वो गहरी, तीखी आँखें सीधे अयान पर टिका दीं। अयान को लगा जैसे वह उस नज़र के सामने पूरी तरह जम गया हो। उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ हो गई कि उसे डर था कहीं कबीर को उसकी आवाज़ न सुनाई दे जाए। 20 साल की उम्र में अयान ने कभी किसी के लिए अपने दिल में ऐसी हलचल महसूस नहीं की थी।
रुद्र के गंभीर चेहरे पर एक बहुत ही हल्की सी मुस्कान आई। उसने अयान की तरफ अपना मजबूत हाथ आगे बढ़ाया और कहा, "हाय अयान। मैं रुद्र। कबीर का बड़ा भाई। सुना है तुम लखनऊ से हो?"
अयान ने कांपते हुए हाथों से उससे हाथ मिलाया। जैसे ही अयान की उंगलियां रुद्र की सख्त हथेली से छुईं, रुद्र के हाथ की मर्दाना गर्माहट अयान के पूरे बदन में बिजली की तरह दौड़ गई। रुद्र ने अयान के छोटे और नर्म हाथ को एक限制 के लिए थोड़ा कसकर पकड़ा, मानो वह अयान के दिल का हाल पढ़ रहा हो, और फिर छोड़ दिया।
"चाबी वहीं साइड टेबल पर है भाई," कबीर ने कहा।
रुद्र ने चाबी उठाई, जाने से पहले अयान को आखिरी बार सिर से पैर तक एक गहरी निगाह से देखा और कमरे से बाहर चला गया।
रुद्र के जाते ही अयान ने अपनी छाती पर हाथ रखा और बेड पर बैठ गया। कबीर ने हंसते हुए कहा, "क्या हुआ भाई? मेरे भाई को देखकर डर गया क्या? वो थोड़ा सीरियस रहता है, पर दिल का अच्छा है।"
अयान ने कबीर की तरफ देखा, लेकिन मन ही मन सोचा—'डर नहीं कबीर... इस आलीशान घर में मुझे तुम्हारे भाई रुद्र से पहली ही नज़र में वो एहसास हो गया है, जिसे मैं शायद कभी लफ्ज़ों में बयान न कर पाऊँ...'