बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 7 July Writes द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 7

रोहित का दूसरा चेहरा -


उस रात किसी को भी नींद नहीं आई। आरिफ़ और आईशा ने पहली बार रोहित का यह रूप देखा था और उसकी ये बातें कि "घर तो उसे लौटना ही पड़ेगा... " जिस अंदाज में उसने कहा था, वो आवाज़ अब भी आरिफ़ के कानों में घंटि की तरह बज रही थी !


रिया भी सारी रात रोती रही और आईशा उसे संभालने में लगी रही...! और इस बीच कब पुरी रात गुज़र गया पता ही नहीं चला ।


रात का सन्नाटा अभी टूटा भी नहीं था । और सुबह कि पहली किरण के दस्तक के साथ साथ  बाहर कार के ब्रेक की तीखी आवाज़ भी आने लगी ।


रिया खिड़की के पास ही खड़ी थी। कार को सामने रुकते हुए देख कर उसका चेहरे का रंग पीला पड़ गया।


“वो आ गया…” उसने आईशा की तरफ देखते हुए धीरे से  कहा----
आईशा ने भी उसका हाथ थाम लिया। “डरो मत...। हम हैं ना।”


दरवाज़े पर ज़ोरों  से दस्तक की आवाज़ आई । डोरबेल बजने लगि...डिंग-डॉन्ग! डिंग-डॉन्ग! डिंग-डॉन्ग!
आरिफ़ ने दरवाज़ा खोला। तो रोहित सामने खड़ा था ।


साफ़ सुथरे कपड़े पहना हुआ, सलीकेदार रूप… लेकिन आँखों में लालिमा और बेचैनी साफ साफ दिख रही थी ।
“रिया, घर चलो।” उसकी आवाज़ में सख्ती थी।
रिया ने भी हिम्मत जुटाकर कह दिया,
“मैं अभी नहीं जाऊँगी।”


ये सुनते ही रोहित का चेहरे का रंग जैसे उड़ गया। “ये तुम्हारा घर है… या वो?”  उसने आईशा की तरफ देखते हुए ये कहा ।
आईशा ने भी शांत स्वर में जवाब देते हुए कहा---
“ये यहाँ अपनी मर्ज़ी से आई है।”


रोहित हँस पड़ा --- लेकिन उसकी वो हँसी बिल्कुल बनावटी लग रही थी।
“तुम नहीं जानतीं रिया… दुनिया कितनी गंदी है,” उसने धीमे स्वर में कहा...।


“मेरे जो दुश्मन हैं… और वो मुझे तो चोट नहीं पहुँचा सकते… लेकिन…” कहते हुए उसने बात अधूरी छोड़ दी। "तुम हालात को समझने कि कोशिश करो..."!


कमरे में उस समय तनाव घिर गया।
आरिफ़ आगे बढ़कर कहने लगा ---
“अगर तुम्हें अपनी पत्नी की इतनी ही परवाह है, तो पहले खुद को संभालो।”


रोहित की आँखों में  जैसे गुस्सा उतर आया।
“तुम मुझे सिखाओगे?” रिया काँप उठी और उसके बिल्कुल सामने आ कर खड़ी हो गई।
“रोहित, बस करो…” 
कुछ पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।


फिर रोहित ने धीमे लेकिन खतरनाक स्वर में कहने लगा ---
“तुम सबको लगता है कि गलती मेरी है…
लेकिन असली खेल कोई और खेल रहा है।”


“कौन है वह...?” आईशा ने पूछा।
रोहित ने अपनी मुट्ठी भींचते हुए कहा।
“तेजस्वी...।”
ये नाम कहते हुए ही उसके चेहरे पर नफरत साफ़ झलक रही थी।


“ पहले वो मेरा पार्टनर था। जब से मैंने उसके गलत कामों को पकड़ लिया है…
तब से वो मुझे बर्बाद करने पर तुला हुआ  है।”


रिया की साँसें जैसे अटकने लगी।
“तो वो धमकियाँ… और वो सब…?”
“हाँ... वही!,” कहते हुए रोहित ने सिर झुका लिया। “वो चाहता है कि मैं टूट जाऊँ।
और उसे पता है… कि मेरी सबसे बड़ी कमजोरी तुम हो रिया...!”
कमरे में एक बार फिर से  भारी खामोशी फैल गई। ये सुनते ही आईशा के दिल में डर उतर आया।


तेजस्वी…
एक ऐसा नाम जो अब उनकी जिंदगी में तूफान बनकर आने वाला है ।
रोहित ने आख़िरी बार रिया की तरफ देखा...
“मैं यहां  फिर से आऊँगा, तुम्हें लेने।
लेकिन अगली बार… हालात इतने शांत नहीं होंगे।” कहते हुए वो चला गया।


दरवाज़ा बंद होते ही रिया की आँखों से आँसू बहने लगें । आरिफ़ ने गंभीर हो  कर कहा---
“ये मामला शायद साधारण नहीं है।”


बाहर आसमान फिर से घिरने लगी थी।
आईशा ने खिड़की से बाहर देखते हुए मन ही मन में सोचा —
पहली बारिश ने उसे प्यार दिया था…
लेकिन शायद अगली बारिश
उसकी हिम्मत का परीक्षा लेने वाली है।


और कहीं दूर,
कोई शख्स मुस्कुरा रहा था ---
और उसका नाम बिजली के साथ चमक रही थी - तेजस्वी...!