दुश्मन से पहला प्यार: द मिस्टीरियस क्वीन - भाग 7 Pihu Patel द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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दुश्मन से पहला प्यार: द मिस्टीरियस क्वीन - भाग 7

"मायरा! रुको!" रुद्र की आवाज़ पूरे केबिन में गूंजी, लेकिन मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरे आँसू अब मेरी पलकों को तोड़कर गालों पर बहने लगे थे। मैं तेज़ी से कदम बढ़ाती हुई लिफ्ट की तरफ चली गई।
रुद्र वहीं अपनी टेबल के पास खड़ा कांप रहा था। उसके सामने वो पेन ड्राइव पड़ी थी, जिसमें उसके परिवार का काला सच था। उसने कांपते हाथों से पेन ड्राइव उठाई और अपने लैपटॉप में लगा दी। जैसे ही फाइलें खुलीं, रुद्र के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मायरा का एक-एक शब्द सच था। उसके पिता ने सचमुच मायरा के परिवार को सड़क पर लाने के लिए साज़िशें रची थीं।
रुद्र ने गुस्से और ग्लानि में आकर लैपटॉप को ज़ोर से बंद कर दिया। उसने अपनी आँखें मूंद लीं। "मैंने यह क्या कर दिया... जिस लड़की के परिवार को मेरे अपनों ने बर्बाद किया, मैं उसी से नफ़रत करता रहा? और वह... वह मुझसे प्यार..."
रुद्र का दिल तड़प उठा। वह जान गया था कि अब वह मायरा के बिना नहीं जी सकता। नफ़रत की जो दीवार सात साल से खड़ी थी, उसे मायरा के आँसुओं ने एक पल में ढहा दिया था।
इस बात को बीते तीन दिन हो चुके थे। मैंने खुद को अपने छोटे से कमरे में बंद कर लिया था। मैंने तय कर लिया था कि मैं यह शहर छोड़कर हमेशा के लिए दूर चली जाऊँगी। पापा को इंसाफ़ दिलाने की इस जंग में मैं अपना दिल हार बैठूंगी, ऐसा मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
शाम के वक्त जब मैं अपना सूटकेस पैक कर रही थी, तभी मेरे घर के बाहर एक महंगी गाड़ी के रुकने की आवाज़ आई। थोड़ी ही देर में मेरे कमरे का दरवाज़ा ज़ोर-ज़ोर से खटखटाया जाने लगा।
मैंने डरते हुए दरवाज़ा खोला। सामने रुद्र खड़ा था। उसकी शर्ट की आस्तीनें मुड़ी हुई थीं, बाल बिखरे हुए थे और आँखों में एक अजीब सी दीवानगी थी।
"आप यहाँ क्या कर रहे हैं मिस्टर रुद्र? प्लीज चले जाइए," मैंने दरवाज़ा बंद करना चाहहा, लेकिन रुद्र ने अपना मजबूत हाथ बीच में अड़ा दिया और ज़बरदस्ती कमरे के अंदर दाखिल हो गया।
"मैं कहीं नहीं जाने वाला, मायरा! और न ही तुम्हें कहीं जाने दूंगा," रुद्र ने आगे बढ़कर सीधे मेरा सूटकेस बंद कर दिया।
"आपको कोई हक नहीं है मुझ पर हुक्म चलाने का!" मैं चिल्लाई। "हम दुश्मन हैं, याद है न?"
"हाँ, याद है! और तुमने ही कहा था कि यह तुम्हारा पहला प्यार है," रुद्र ने एक झटके में मुझे अपनी तरफ खींचा। उसकी मजबूत बाहें मेरी कमर के गिर्द कस गईं। "मेरे पिता ने जो किया, उसका पछतावा मुझे ज़िंदगी भर रहेगा। मैं रॉयल कॉर्पोरेशन का आधा हिस्सा तुम्हारे नाम करने के पेपर्स तैयार करवा चुका हूँ। तुम्हारे पापा का इंसाफ़ तुम्हें मिलकर रहेगा।"
मैं उसकी आँखों में देखते हुए हैरान रह गई।
"लेकिन मुझे छोड़कर जाने की सज़ा मुझे मत दो, मायरा," रुद्र की आवाज़ भारी हो गई और उसकी आँखों से एक आँसू टपक कर मेरे गाल पर गिरा। "अगर तुम 'द मिस्टीरियस क्वीन' हो, तो मैं भी रुद्र प्रताप सिंह हूँ। अपनी क्वीन को इतनी आसानी से हारने नहीं दूंगा। अब चाहे पूरी दुनिया हमारे खिलाफ हो जाए, मैं तुम्हें खुद से दूर नहीं होने दूंगा।"
रुद्र के इस बदले रूप और उसके बेइंतहा प्यार को देखकर मेरे दिल की बची-खुची दीवार भी टूट गई। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर उसके मजबूत सीने पर रख दिया। लेकिन हम दोनों इस बात से अनजान थे कि रुद्र के इस फैसले से उसके अपने ही परिवार में एक नया और ख़तरनाक दुश्मन पैदा होने वाला था, जो हमारी जान लेने के लिए तैयार बैठा था।