तेज़ रोशनी के धमाके ने मेरी आँखों को कुछ पलों के लिए चौंधिया दिया। सामने खड़ा रुद्र किसी जीते हुए शिकारी की तरह मुस्कुरा रहा था। उसने बहुत आराम से केबिन का दरवाज़ा अंदर से लॉक किया और चाबी अपनी जेब में डाल ली। इस बार उसके हाथ में कोई पिस्तौल नहीं थी, लेकिन उसका यह शांत और खतरनाक अंदाज़ कल रात की बंदूक से कहीं ज़्यादा जानलेवा था।
"तुम्हें क्या लगा मिस्टीरियस क्वीन... कि रुद्र प्रताप सिंह को इतनी आसानी से बेवकूफ बनाया जा सकता है?" रुद्र धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगा। उसकी भारी आवाज़ खाली केबिन में गूंज रही थी। "बिजनेस ट्रिप का नाटक सिर्फ तुम्हें इस बिल से बाहर निकालने के लिए था। और देखो, तुम कितनी आसानी से मेरे बिछाए जाल में फंस गईं।"
मेरा दिमाग बिजली की तेज़ी से काम कर रहा था। भागने के सारे रास्ते बंद थे। खिड़की पीछे थी, लेकिन वहाँ तक पहुँचने से पहले ही रुद्र मुझे दबोच लेता। मैंने बिना डरे अपनी कमर पर हाथ रखा और थोड़ा सा पीछे हटकर लॉकर के पास खड़ी हो गई।
"जाल बहुत अच्छा बुना मिस्टर रुद्र," मैंने अपनी बदली हुई भारी आवाज़ में कहा। "लेकिन आप भूल रहे हैं कि क्वीन को पिंजरे में कैद करना नामुमकिन है। मुझे जो चाहिए था, वह मेरे हाथ में है।" मैंने चुपके से वह पेन ड्राइव अपनी जेब में सरका दी।
"तुम्हारे हाथ में सिर्फ वही चीज़ आ सकती है, जो मैं तुम्हें देना चाहूँ," रुद्र ने कड़क लहजे में कहा और अचानक एक तेज़ झटके के साथ मेरी तरफ लपका।
उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन मैं नीचे की तरफ झुकी और उसकी बांह के नीचे से निकलकर दूसरी तरफ आ गई। रुद्र ने तुरंत मुड़कर मेरी कॉलर पकड़नी चाही, पर मैंने उसके सीने पर एक ज़ोरदार किक (लात) मारी। रुद्र दो कदम पीछे हटा, लेकिन वह रुका नहीं। उसने दोबारा मुझ पर हमला किया और इस बार उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरी दोनों कलाइयों को पीछे की तरफ घुमाकर मुझे सीधे दीवार से सटा दिया।
इस हाथापाई में हमारा बैलेंस बिगड़ा और हम दोनों दीवार के सहारे टिक गए। रुद्र का पूरा वजन मुझ पर था। उसकी तेज़ होती सांसें सीधे मेरे नकाब को छू रही थीं। इस बेहद करीबी मोड़ पर, रुद्र की आँखें अचानक मेरी कलाई के उस निशान पर टिक गईं जिसे उसने सुबह ही देखा था।
उसका शरीर एक पल के लिए जम गया। उसकी आँखों में फैली जीत की चमक पल भर में गहरे सदमे और दर्द में बदल गई। उसने बड़ी ही धीमी, कांपती हुई आवाज़ में कहा, "यह निशान... मायरा? तुम..."
रुद्र के हाथों की पकड़ ढीली पड़ गई। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की की सादगी और मासूमियत पर उसका दिल धीरे-धीरे पिघल रहा था, वही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन 'द मिस्टीरियस क्वीन' है।
मैंने इस सदमे का फ़ायदा उठाया। मैंने अपने सिर से उसके माथे पर ज़ोरदार प्रहार किया। रुद्र दर्द से पीछे हटा। मैंने तुरंत ज़मीन पर पड़ा अपना दूसरा स्मोक बम पटका। कमरे में एक बार फिर घना धुआं फैल गया। रुद्र खांसते हुए चिल्लाया, "मायरा! रुक जाओ! मुझे सच जानना है!"
लेकिन जब तक धुआं साफ हुआ, केबिन की खिड़की खुली हुई थी और मैं रात के अंधेरे में गायब हो चुकी थी। रुद्र वहीं घुटनों के बल बैठ गया। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरा धोखा और तड़प थी। उसने पहली बार किसी से प्यार करना शुरू किया था, और वही लड़की उसकी सबसे बड़ी दुश्मन निकली।