में और मेरे अहसास - 154 Dr Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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में और मेरे अहसास - 154

राज

दिल में क्या राज छुपाया हैं l

रिश्ता शिद्दत से निभाया हैं ll

 

जिगर में तिश्नगी उठी और l

निगाहों ने अश्क बहाया हैं ll

 

मोहब्बत की ठंड उतारने को l

दर्द को तड़के सुकाया हैं ll

३१-५-२०२६ 

उम्र भर में लिखता रहा 

उम्र भर में लिखता रहा दिल की आवाज़ l

कहानी में लिखने जैसा ही था आग़ाज़ ll

 

 

ताउम्र लिखने वाले होते ही है जांबाज ll 

आँचल की वह छांव 

ममता का वह गांव 

खेलो ना तुम दाव 

सुन लो दिल की राव 

१-६-२०२६ 

 

 

मुराद

सफ़ल जिदगी का सपना साकार नहीं हो पाया l

मुराद दिल में रह गई सच्चा प्यार नहीं हो  

पाया ll

 

ताउम्र मजलिस और महफिलों में ही घूमता 

रहा l

ग़ज़ले तो बहुत लिखी पर कलमकार नहीं हो पाया ll

 

कहीं हुस्न वाले इन्कार ना कर दे उसी डर से 

कभी l

बहुत हौसलों के बाद भी कभी इजहार नहीं हो  

पाया ll

 

ना जाने क्या हो गया था उस वक्त के कुछ न 

कहा l

सामने से हाथ मिलाने आए पर इकरार नहीं हो  

पाया ll

 

बड़ी हसरते रखी एक छोटी सी झलक की 

हुस्न की l

आज मुलाकात का कोई भी चमत्कार नहीं हो 

पाया ll

२-६-२०२६ 

मंज़िल, रास्ता और मुसाफ़िर 

मंज़िल, रास्ता और मुसाफ़िर सभी भटक गये हैं l

ना जाने किसकी तलाश में हैं कि छटक गये 

हैं ll

 

क़ायनात में चारो ओर बयार ही एसी बह रही है l

लोगोँ के दिलोंदिमाग हालात के मारे सटक गये 

हैं ll

 

जिंदगी की भागदौड में इन्सान जीना भूल गया 

और l

रोज चैन और सुकून की सांसों को तरस गये 

हैं ll

 

जन्म से लेकर मृत्यु तक सफ़र ही करता रहा 

हैं l

रास्ता भटका हुआ मुसाफिर मंज़िल तड़प गये 

हैं ll

 

कोई किसीका नहीं इस दुनिया में समझकर 

ही l

खुद के आत्मविश्वास- आत्मबल से पनप गये 

हैं ll

३-६-२०२६ 

थकान

अफसाने कोरे काग़ज़ पर रहते हैं l

मुझे भी गुनगुनाओ वह कहते हैं ll

 

कोई आके पढ़ लेगा आशा में वो l

इंतजार का दर्द बखूबी सहते हैं ll

 

अक़्सर राह ताकते हुए सालों से l

समय की धारा के संग बहते हैँ ll

 

भीतर की थकान बढ़ती जाती है l

अनकहे बातों का बोझ ढहते हैं ll

४-६-२०२६ 

दिखाव

तमाम जिस्म ही घायल था घाव ऐसा था l

देखतें ही डर लग गया दिखाव ऐसा था ll

 

इस पार या उस पार तय कर लिया था l

आख़िर तक लड़ते रहे लगाव ऐसा था ll

 

जुनून ए आशिकी में आगे बढ़ने लगे ओ l

घायल होना ही था की दाव ऐसा था ll

 

सब का साथ सब का विकास करना है l

चैन और सुकून मिला की राव ऐसा था ll

 

जिदगी आसान, स्वच्छ और सुरक्षित थी l

जहा हर कोई खुशहाल के गाव ऐसा था ll

५-६-२०२६ 

इज्जत हो जाए

आँखें थक चुकी है राह तकतें तकतें l

हौसलों ने जवाब दे दिया घटते घटते ll

 

मंजिल की ओर चल पड़े हैं अकेले ही l

बड़ी दूर तक निकल आए चलते चलते ll

 

गुफ़्तगू सुबह शाम दोनों करते रहे ओ l

इज्जत हो जाए साथ पलते पलते ll

 

जिंदगी में एक ठहराव आ चुका है कि l

हालात के साथ साथ लड़ते लड़ते ll

 

ना जाने क्या हो गया कि एकदम से l

होठ थरथरा गए कुछ कहते कहते ll

६-६-२०२६ 

मुस्कान

एक नशीली मुस्कान से दूर हो गई सारी थकान हैं l

खूबसूरत हुस्न की मल्लिका की प्यारी सी 

मुस्कान हैं ll

 

कितने दिनों के चाँद सितारों से घर आँगन 

रोशन हुआ ll

कायनात में रंगते छाई की लगता है ख़ुदा भी 

मेहरबान हैं ll

 

लोगों से नज़रे बचते बचाते आँखें जब चार हुई 

तो आज l

फिझाओ में मधुर गीत गाया धड़कनों में आया 

तूफान हैं ll

 

इश्क वालों की मौजूदगी में सारा आलम बहका 

और जब l

मुलाकात की बात चली खिला खिला ख़ुशनुमा 

आसमान हैं ll

 

इश्क ये कैसा एजाज़ किया है दिलों दिमाग 

पर कि l

दो दिल मिले तो मुस्कराता सारा आलम ए

जहान हैं ll

७-६-२०२६ 

मेहरबान

मेहरबान होके बुला लो दौड़ा चला आऊँगा l

एक बार आया तो मुड़के वापिस ना जाऊँगा ll

 

इशारो से मिलने की हामी भर दी है तो आज l

साथ अपने क़ायनात की खुशियाँ लाउँगा ll

 

कई दिनों के बाद फ़िज़ाओं में बहार आई कि l

चहेरे पर रोनक देखकर सुकून सा पाउँगा ll

 

बादलों से माहताब निकला हो एसे ही जब l

मुलाकात को आया तो ढेर सारा भाउँगा ll

 

हुस्न जाना की तारीफ़ में नशीले से माहौल में l

मजलिस में सब के सामना गाना गाउँगा ll

८-६-२०२६ 

मुस्कान 

खूबसूरत हसीन मुस्कान पर ज़मीर हार गया l दिलों जान हुस्न ए मल्लिका पर वार गया ll

 

दिन दहाड़े गहरी नींद में सोया पड़ा था कि l

ख्वाबों में चाँद सितारों के उस पार गया ll

 

दो घड़ी की मुलाकात की बात हुई थी और l

सुकून के पल छीन के इतवार मार गया ll

 

उसकी नाराजगी में भी हौसला बुलंद करके l

दीदार को आश में गली में बार बार गया ll

 

धड़कने बेकाबू हुई जा रहीं है आज जब से l

नज़रे मिलाके जानिब तक़दीर संवार गया ll

९-६-२०२६  

ज़मीन 

दो गज ज़मीन के लिए सारी भेजामारी हैं l

सब की जन्म से ले मौत तक की सवारी हैं ll

 

जिंदगी में सुख दुख का चक्र चालू रहता है l

सुख के बाद दुख ओ फ़िर सुख की बारी हैं ll

 

अपनी जी जान लगा देता पालनपोषण में तो l

बागबान की मेहनत से खिली हुई क्यारी हैं ll

 

कोई किसी के लिए नहीं जीता है दुनिया में l

हर एक इंसान को ख़ुद की जान प्यारी हैं ll

 

हर कहानी का किरदार अलग अलग होता है l

यहाँ सब की बात ही निराली और न्यारी हैं ll

१०-६-२०२६ 

बागबां 

बागबां की तरह इबादत करनी चाहिए l

जिन्दगी शज़र पे इनायत करनी चाहिए ll

 

आशा का दीपक दिल में जलाये रखिये l

रिश्ता बनाये रखने बात करनी चाहिए ll

 

कल से आज को बहतरीन बनाकर अब l

खूबसूरत सी क़ायनात करनी चाहिए ll

 

हालात चाहे जैसे भी हो सकता है पर l

हसी खुशी को आयात करनी चाहिए ll

 

रंग ओ नूर की महफिल को सजाकर l

हसी चांद से रोशन रात करनी चाहिए ll

११-६-२०२६ 

अनजान 

अनजान राहों में निकल पड़े हैं l

दिल के अरमान मचल पड़े हैं ll

 

मजलिस में यार दोस्तों के संग l

थोड़े से प्यार में संभल पड़े हैं ll

 

मुहब्बत मुकम्मल रंग लाई कि l

बिन मौसम बादल गरज़ पड़े हैं ll

 

धड़कने बेपनाह प्यार में बेकाबू l

जुदाई की बात में लरज पड़े हैं ll

 

ईश की रहमत तो देखिये आज l

इश्क की पनाह में पनप पड़े हैं ll

१२-६-२०२६ 

जुस्तजू 

जुस्तजू जिसकी थी उसको तो पा लिया l

जो भी था पास वह सब कुछ दे ही दिया ll

 

एक बार जो कह देते है वो करके दिखाते l

साथ देने का वादा मरते दम तक निभाया ll

 

चार दिन की मिली है उसमे सब के साथ l

जिंदगी को खुशियों के शज़र से सजाया ll

 

कभी मोहब्बत का जाम कभी कडवा घूँट l

जिस वक्त जहां जो मिला खुशी से पिया ll

 

वैसे तो बड़ी मेहरबानी रही है ईश की l

जितना हो सके उतना आसान बनाया ll

१३-६-२०२६ 

तन्हाई

मेरी तन्हाई की वजह कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा।

मेरी धड़कन की सगड़ कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा ll

 

हर लम्हा तेरे नाम की माला जपता रहेता है 

तो l

मेरे जिगर की तड़प कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा ll

 

हर मुलाकात के बाद भी कुछ ना कुछ बाकी 

रहता l

कई सालो की तरस कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा ll

 

एक लम्हा में लगता है कई साल बीत गए 

हो जैसे l

बिछडे हुए कितने बरस कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा ll

 

लाख कोशिस करने बाद भी छलक ही जाती 

है कि l

आँखों में अश्क की वजह कोई पूछे नहीं तो अच्छा होगा ll

१४-६-२०२६ 

सुबह हो गई मामू 

नींद में से जाग ज़रा सुबह हो गई मामू l

हों जा सजाग ज़रा सुबह हो गई मामू ll

 

कब तलक गद्दे पर सोया पड़ा रहेगा उठ l

जीने को भाग ज़रा सुबह हो गई मामू ll

 

नई शुरुआत नई ऊर्जा लेकर आया है तो l

सूरज को ताक ज़रा सुबह हो गई मामू ll

 

बीच दरिया मंज़िल ना देखा करो कि l

जा उस पार ज़रा सुबह हो गई मामू ll

 

कल न आएगा आज के आज सारे कर l

काम तमाम उठ ज़रा सुबह हो गई मामू ll

१५-६-२०२६