आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसा रिश्ता, एहसास, भावना जिसे हर किसी ने महसूस किया ही होगा। कभी डांट तो कभी प्यार बनकर हमें सहलाती । वो एहसास है मां। मां कोई भी हो केसी भी हो अमीर हो या गरीब, जवान हो या व्रृध्धा पर उसका प्यार हमेशा सभी बच्चों के लिए एक सा ही रहता है।
मां के बारे में कई लेखकों, कवियों ने बहुत सुंदर व्याख्या की है । पर हर रूप में मां की अलग पहचान बहार आई है। मां एक बच्चे के लिए उसका पुरा संसार होती है । मेंने अपनी मां को बहुत करीब से जानने की कोशिश तो की है पर कहते हैं ना मां एक शब्द, एक इंसान नहीं है एक सुंदर वातावरण है जिसकी छांव में बच्चे अपना पूरा बचपन बिताते हैं। दुनिया की हर मां स्पेशल होती है।
हम अपनी मां से प्यार तो बहुत करते हैं लेकिन उनका दिल भी बहुत दुखाते है। में यहां सबकी बातें नहीं कर रही क्योंकि में किसी के बारे में कुछ भी नहीं जानती इसलिए में अपनी बात कर रही हुं। में कई बार अपनी मां से एसी बातें कह देती हु जो कहने के बाद मुझे खुद को पछतावा होता है। मुझे पता कि आपके साथ ऐसा होता है या नहीं पर मेरे साथ अक्सर होता है जब मेरी मां मुझे कुछ करने से मना करती है तभी भी में वही करती हूं और आखिरी में किसी मुश्किल में पड़ जाती हु । हर मां अपने बच्चे की पहली शिक्षक होती है। मेंने भी अपनी मां से बहुत कुछ सीखा है। मेंने मेरी मां दिन रात मजदुरी करते देखा है। वो भी इसलिए की हम दोनों बहनें जिंदगी में कुछ बनकर दिखाये ।मेरी मां हमेशा से यह चाहती थी कि हम खुब पढ़ें क्योंकि वो कभी पढ़ नहीं पायी उनके उपर उनके भाई की जिम्मेदारी थी और वो ये बिलकुल भी नहीं चाहती थी हम उनकी तरह अपनी जिंदगी में कभी आगे न बढ़ पाए। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मेरी मां पढ़ी लिखी नही थी तो सिर्फ घर के काम करती थी,नहीं वो खेत में काम करने जाती थी पुरा दिन खेत में काम करने के बाद घर का काम भी करना आसान नहीं होता पर मेरी मां ने ये सबकुछ किया और आज भी करती हैं। उनकी आंखों में एक ही सपना है कि उनकी बेटीयां इतनी काबिल हो कि उन्हें किसी से कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं है। मुझे ये देखकर बहुत दुख होता है कि आज भी हमारे परिवार में मेरी मां कि जितनी इज्जत होनी चाहिए उतनी नहीं है पर कोई बात नहीं में अपनी मां को वो इज्जत जरूर दुगी जो उन्होंने इन सालो में नहीं मिली । अब मैं अपनी मां की बात कर ही रही तो में बता दु मेरे पापा भी मजदुरी ही करते हैं। बहुत छोटी उम्र में उनके पिताजी का देहांत हो गया और पुरे घर की जिम्मेदारी उन पर आ गयी। मेरे पापा की आंखे बहुत कमजोर थी और अब बहुत ज्यादा कमजोर हो गई है। फिर भी वह मजदुरी करके पैसे कमा रहे हैं क्योंकि हम आगे बढ़े ,हमें किसी के सामने लाचार ना होना पड़े । मेरी मां हमेशा मुझे एक बात कहती हैं कि इस दुनिया में कोई अपना नहीं है जब तक पैसे हो तभी लोग बुलाएंगे, इज़्ज़त करेंगे वरना कोई पुछेगा भी नहीं। ये दुनिया मतलबी है। मुझे पता है कि उनके काम में कोई इज्जत नहीं है कोई कुछ भी बोलकर चला जाता है। मुझे पता है उनकी मजबूरी है इसलिए वह काम छोड़ भी नहीं सकते। पर में अपने माता-पिता की इज्जत उन्हें जरूर लोटाउगी।
I hope you guys are agree with me
Thank you