The Last Page of the Diary - 3 Anshika Naithani द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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The Last Page of the Diary - 3

​पूरी रात समर्थ करवटें बदलता रहा। आन्या का वो हंसता हुआ चेहरा और डायरी की वो आखिरी डरावनी लाइनें उसकी आँखों के सामने घूम रही थीं। सुबह होते ही उसने फैसला कर लिया कि वह इस बात को ऐसे ही नहीं छोड़ सकता। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, इसलिए उसने सीधा दुकान के मालिक, 'दीनानाथ जी' के घर जाने की सोची। दीनानाथ जी उम्रदराज इंसान थे और सालों से उस इलाके में रह रहे थे।
​समर्थ जब उनके घर पहुँचा, तो दीनानाथ जी बरामदे में बैठकर चाय पी रहे थे। समर्थ को अचानक वहां देखकर वो थोड़ा चौंक गए, "अरे समर्थ? आज इतनी सुबह यहाँ? कोई जरूरी काम है क्या भाई?"
​समर्थ ने एक गहरी सांस ली। उसने इधर-उस देखा और सीधे उनके पास जाकर बैठ गया। उसने बिना कोई बात छुपाए रात की पूरी कहानी और उस नीली डायरी के बारे में सब कुछ सच-सच बता दिया। उसने जैसे ही आन्या का नाम लिया और दुकान के पीछे मिलने वाली बात बताई, दीनानाथ जी के हाथ से चाय का कप छूटते-छूटते बचा।
​उनके चेहरे की हवाइयाँ उड़ चुकी थीं। जो इंसान हमेशा शांत रहता था, उसके माथे पर अचानक पसीने की बूंदें चमकने लगी थीं। उन्होंने कांपती हुई आवाज में कहा, "त... तुम्हें वो डायरी कहाँ से मिली समर्थ? मैंने तो उसे..." वो बोलते-बोलते अचानक रुक गए, जैसे उन्हें अहसास हुआ हो कि वो कुछ ऐसा बोल गए जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए था।
​समर्थ ने उनकी घबराहट को तुरंत भांप लिया। उसने पूछा, "मालिक, आप आन्या को जानते थे ना? दुकान के पीछे उस रात क्या हुआ था? प्लीज मुझे सच बताइए।"
​दीनानाथ जी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, मानो वो किसी पुराने खौफनाक मंजर को याद कर रहे हों। उन्होंने समर्थ का हाथ पकड़ा और दबी आवाज में बोले, "समर्थ, तुम अभी बच्चे हो। उस डायरी को वहीं दफना दो जहाँ से वो मिली है। आन्या एक बहुत अच्छी लड़की थी, पर उस रात... उस रात जो हुआ, उसके बाद से वो कभी किसी को नहीं दिखी। पुलिस आई, छानबीन हुई, पर कुछ हाथ नहीं लगा। सबने मान लिया कि वो शहर छोड़कर भाग गई, लेकिन सच कुछ और ही है।"
​"क्या सच है मालिक?" समर्थ की जानने की इच्छा और तड़प अब सातवें आसमान पर थी।
​दीनानाथ जी ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, "उस दुकान के पीछे जो पुराना गोदाम है ना, जहाँ आज कोई नहीं जाता... आन्या आखिरी बार वहीं देखी गई थी। और उस राज के पीछे इस शहर के बहुत बड़े और रसूखदार लोगों का हाथ है। अगर तुम इसमें पड़े, तो तुम्हारी जान को भी खतरा हो सकता है।"
​समर्थ का दिल बैठ गया। दुकान का वो पुराना बंद गोदाम, जिसके ताले को उसने कभी खुलते नहीं देखा था, आज उसकी हर उलझन का कारण बन चुका था।

पाठकों के लिए एक ज़रूरी बात:
दोस्तों, कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है जहाँ से आगे का रास्ता बहुत खतरनाक है। दीनानाथ जी ने आन्या को लेकर जो बातें बताई हैं, उसने समर्थ के साथ-साथ हम सबके होश उड़ा दिए हैं। अब समर्थ के मन में उस बंद गोदाम के पीछे छिपे राज को जानने की इच्छा सौ गुना बढ़ गई है। वो पुराना बंद गोदाम ही अब उसकी हर परेशानी और उलझन का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
​पर सवाल यह है कि समर्थ को अब आगे क्या करना चाहिए? एक तरफ दीनानाथ जी की वो डरावनी चेतावनी है कि इसमें शहर के बड़े-बड़े लोगों का हाथ है और समर्थ की जान को खतरा हो सकता है। दूसरी तरफ आन्या का वो रोता हुआ चेहरा और वो नीली डायरी है जो इंसाफ मांग रही है।
​आप लोग समर्थ की जगह होते तो क्या करते? क्या उसे चुपचाप मालिक की बात मान लेनी चाहिए और अपनी जान बचाने के लिए पीछे हट जाना चाहिए? या फिर डर का सामना करके, अपनी जान जोखिम में डालकर उस पुराने बंद गोदाम का ताला तोड़ देना चाहिए? आपको क्या लगता है, उस धूल से भरे अंधेरे गोदाम के अंदर ऐसा कौन सा खौफनाक सच छुपा है जो पूरे शहर को हिला सकता है?
​अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखिएगा, क्योंकि आपका एक-एक कमेंट समर्थ का अगला कदम तय करने में मदद करेगा। और हाँ, इस सस्पेंस, थ्रिलर और डर से भरे अगले भाग 4 सबसे पहले पढ़ने के लिए मुझे अभी फॉलो करना बिल्कुल मत भूलना! आपकी क्या राय है, जल्दी-जल्दी कमेंट्स में बताइए! 🚪🗝️🗣️