The Last Page of the Diary - 2 Anshika Naithani द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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The Last Page of the Diary - 2

रात के ग्यारह बज चुके थे। घर के सब लोग सो गए थे। समर्थ अपने छोटे से कमरे में लेटा हुआ था, पर उसकी आँखों में नींद का एक कतरा भी नहीं था। उसका पूरा ध्यान कोने में रखे उस पुराने बैग पर था। आखिर उससे रहा नहीं गया। वह चुपचाप उठा, बैग की ज़िप खोली और उस नीली डायरी को बाहर निकाल लिया।
​टेबल लैंप की हल्की पीली रोशनी में डायरी के पन्ने चमके। समर्थ का दिल एक बार फिर तेजी से धड़कने लगा। उसने पहला पन्ना पलटा, जहाँ आधा हिस्सा फटा हुआ था। उसके ठीक अगले पन्ने पर एक लड़की की धुंधली सी पासपोर्ट साइज फोटो चिपकी हुई थी। गोल चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें और एक प्यारी सी मुस्कान—फोटो के नीचे नाम लिखा था, 'आन्या'।
​समर्थ ने गहरी सांस ली और आगे पढ़ना शुरू किया। डायरी में कोई भारी-भरकम शब्द नहीं थे, बल्कि एक बेहद साधारण मिडिल क्लास लड़की के जज्बात थे।
​आन्या ने लिखा था: “आज कॉलेज का पहला दिन था। पापा ने बड़ी मुश्किल से पैसे जोड़कर मेरा एडमिशन इस बड़े शहर के कॉलेज में कराया है। सब कुछ कितना नया है यहाँ। बस डर इस बात का है कि कहीं मैं यहाँ की भीड़ में खो न जाऊँ। पापा का भरोसा नहीं तोड़ना है।”
​समर्थ को लगा जैसे वह आन्या की नहीं, बल्कि खुद अपनी कहानी पढ़ रहा हो। वही मिडिल क्लास का संघर्ष, वही अपनों की उम्मीदों का बोझ। वह पन्ने पलटता गया। आन्या ने अपने कॉलेज, अपनी सहेलियों और अपने सपनों के बारे में लिखा था। कहानी बिल्कुल नॉर्मल चल रही थी, लेकिन जैसे ही समर्थ आखिरी के पन्नों पर पहुँचा, डायरी की लिखावट बदल गई। ऐसा लग रहा था जैसे लिखते वक्त आन्या के हाथ काँप रहे थे।
​आंन्या ने आखिरी तारीख वाले पन्ने पर लिखा था: “वो लोग मेरा पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं किससे मदद माँगू? अगर पापा को पता चला तो वो टूट जाएंगे। आज रात वो मुझे उस पुरानी किताबों वाली दुकान के पीछे मिलने बुला रहे हैं... मुझे बहुत डर लग रहा है। अगर मुझे कुछ हो गया तो...”
​बस, इसके आगे के पन्ने फिर से गायब थे।
​समर्थ के माथे पर पसीना आ गया। "पुरानी किताबों वाली दुकान के पीछे?" यह तो वही दुकान थी जहाँ वह खुद काम करता था! इसका मतलब आन्या का इस दुकान से कोई बहुत गहरा और डरावना कनैक्शन था।

​✍️ Readers के लिए Note:
दोस्तों, कहानी में अब एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने समर्थ के होश उड़ा दिए हैं। आन्या के साथ आखिर ऐसा क्या हुआ था जो वो इतनी ज्यादा डरी हुई थी? और वो कौन लोग थे जो एक मासूम सी लड़की का साए की तरह पीछा कर रहे थे? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर उस पुरानी किताबों वाली दुकान के पीछे ऐसा क्या राज छुपा है, जिसके बारे में समर्थ खुद आज तक कुछ नहीं जानता था?
​क्या समर्थ को आन्या के इस खौफनाक राज का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए, या फिर एक आम लड़के की तरह खुद को इस बड़ी और जानलेवा मुसीबत से दूर रखना चाहिए? अगर समर्थ आगे कदम बढ़ाता है, तो क्या वह आन्या के दुश्मनों के जाल में खुद नहीं फंस जाएगा? आपको क्या लगता है, समर्थ को अब अगला कदम क्या उठाना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट में लिखकर मुझे जरूर बताएं, क्योंकि आपके कमेंट्स मुझे आगे लिखने की हिम्मत देते हैं।
​अगर आपको यह दूसरा भाग भी पसंद आया है और आप इस गहरे राज की तह तक पहुँचना चाहते हैं, तो कहानी के अगले रोमांचक भाग (पार्ट 3) के लिए मुझे अभी फॉलो करें। जैसे ही अगला भाग आएगा, आपको सबसे पहले उसका पता चल जाएगा। अपना प्यार इसी तरह बनाए रखें, धन्यवाद! 🤫🔥