The Last Page of the Diary - 1 Anshika Naithani द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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The Last Page of the Diary - 1

दोपहर के तीन बज रहे थे। जून की इस चुभती हुई गर्मी में ऐसा लग रहा था मानो आसमान से आग बरस रही हो। दुकान इतनी छोटी थी कि वहां ढंग से खड़े होने की भी जगह नहीं थी, ऊपर से पुरानी किताबों और गाइड लेने वालों की भीड़ ऐसी थी कि पूरी दुकान खचाखच भरी हुई थी। बाहर सड़क पर गाड़ियों का शोर और लोगों की चीख-पुकार दिमाग खराब कर रही थी। दुकान का वो पुराना पंखा हवा कम दे रहा था और अजीब सी आवाजें ज्यादा कर रहा था।
​समर्थ ने अपनी सस्ती सी टी-शर्ट के गले से चेहरे का पसीना पोंछा। उसका दिमाग दुकान के काम से ज्यादा अपनी जिंदगी की उलझनों में फंसा हुआ था। अगले हफ्ते फोन का रिचार्ज खत्म होने वाला था, घर के छोटे-मोटे खर्चे सिर पर खड़े थे, और सबसे बड़ी आफत—भविष्य की टेंशन। "क्या पूरी जिंदगी ऐसी ही छोटी दुकानों पर धूल साफ करते हुए निकल जाएगी?" उसने खुद से सवाल किया।
​तभी, सबसे ऊपर वाले रैक से एक भारी किताब निकालते वक्त, उसके पीछे फंसी एक पुरानी, नीले रंग की डायरी तेजी से नीचे गिरी।
​डायरी सीधे जमीन पर जाकर खुली। उसके पन्नों से एक अजीब सी पुरानी खुशबू आ रही थी। भीड़ के धक्के से बचते हुए समर्थ ने झुककर उसे उठाया। जैसे ही उसकी नजर पहले पन्ने की पहली लाइन पर पड़ी, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन पन्नों पर नीली स्याही से साफ-साफा लिखा था:
​"अगर आप यह पढ़ रहे हैं, तो समझ लीजिए मैं अब इस दुनिया में नहीं हूँ... और मेरी मौत का जिम्मेदार..."
​इतना लिखकर अगला आधा पन्ना बेरहमी से फाड़ा हुआ था!
​समर्थ का दिल तेजी से धड़कने लगा। चारों तरफ लोग चिल्ला रहे थे, कोई किताब के दाम कम करा रहा था, तो कोई जल्दी करने को बोल रहा था। पर समर्थ के कानों में अब सन्नाटा छा चुका था। उसके अंदर एक अजीब सी तड़प, एक गहरी जिज्ञासा जाग उठी थी। उसे थोड़ा डर भी लग रहा था, पर उस अधूरी लाइन ने उसे अपने जाल में बांध लिया था। उसने चुपके से उस डायरी को अपने पुराने बैग में छिपा दिया। वह नहीं जानता था कि यह डायरी उसकी आम सी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलने वाली थी।

​✍️ पाठकों के लिए जरूरी बात:

दोस्तों, यह मेरी नई सस्पेंस और थ्रिलर कहानी "डायरी का आखिरी पन्ना" का पहला भाग है। कहानी की शुरुआत आपको कैसी लगी? क्या आपको भी समर्थ की तरह यह जानने की बेचैनी हो रही है कि उस फटे हुए पन्ने के पीछे किसका नाम छुपा था?
​मुझे नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं कि समर्थ को उस रहस्यमयी डायरी में आगे क्या मिलने वाला है? क्या वह डायरी में लिखे उस अधूरे सच का पता लगा पाएगा, या फिर वह किसी बहुत बड़ी और खतरनाक मुसीबत में फंस जाएगा? क्या उसे यह डायरी अपने पास न रखकर दुकान के मालिक को लौटा देनी चाहिए थी, या उसने इसे अपने बैग में छिपाकर बिल्कुल सही फैसला किया? आपके दिमाग में जो भी थ्योरी आ रही हो, कमेंट में खुलकर लिखें।
​अगर आपको यह पहला भाग पसंद आया है और आप जानना चाहते हैं कि आगे क्या हुआ, तो कहानी के अगले भाग (पार्ट 2) के लिए मुझे अभी "जुड़ें" (फॉलो करें)। जैसे ही इस कहानी का अगला भाग पोस्ट होगा, आपको तुरंत उसका नोटिफिकेशन मिल जाएगा। अपना प्यार और सपोर्ट इसी तरह बनाए रखें, धन्यवाद!