कलिंगेश राघव को बताते हुए कहता है, "यहां से कई मिलो दूर काली पहाडी है जोकि खतरों और जादूई शक्तियों से भरी हुई है पहाडी के ऊपर घना जंगल है. उसके बाद में एक नीली झील है जिसको तैर कर पार नहीं किया जा सकता है।"
तैर कर पार नहीं सकते है क्यूँ? सौरव ने हैरानी से कहा। इस पर कलिंगेश कहता है, ऐसा नदी की शक्ति के कारण है. अगर कोई उसे तैर कर पार करने की कोशिश करता है, तो वह नदी उसको अपने अंदर डूबाकर मार देती है. उस नदी के पार दिव्य गिरी नामक एक विशाल पर्वत है उस पर्वत के ठीक ऊपर एक बडी गुफा है.
जहां पर वह मारकेश तांत्रिक अपनी काली विद्या कर रहा है और उसी गुफा में एक जादुई पानी से भरा हुआ कलश है। इसी कलश के पानी से हमें मुक्ति मिल सकती है वह कलश मारकेश ने उसी गुफा में छुपा कर रख रखा है. और वही मेरे पोते वीर के बारे मे बता सकता है कि वह अब कहाँ है?
"उस काली पहाडी पर मै जाउगा!" राघव ने दृढ़ता भरी आवाज़ में कहा। तभी लिली कहती है, नहीं तुम उस पहाडी पर नहीं जाओगे, मधु भी बोली हाँ लिली ठीक कह रही है, तुम उस पहाडी पर नहीं जाओगे, वो पहाडी खतरों से भरी हुई है. "हाँ उस पहाडी पर जाना मौत के मुँह मे जाने जैसा है. तुम वहाँ नहीं जाओगे" सौरव ने कहा...
तुम्हारे दोस्त ठीक बोल रहे है. वहाँ से जिन्दा बचकर आना इतना आसान नहीं है एक बार फिर सोच लो लड़के.... " अलीना ने कहा।
राघव अपने दोस्तों की ओर देखते हुए बोला, फिर इन दोनों को मुक्ति कैसे मिलेगी? "हमें क्या फर्क पढता है, इन्हे मुक्ति मिले या नहीं" लिली ने गुस्से में कहा। राघव ने कहा, हमें इन्हे मुक्ति दिलवानी ही होंगी, नहीं तो ये फिर मुक्ति पाने के लिए निर्दोष बच्चों की बलि देंगे.
ये सुनकर सौरव ने कहा, राघव! अगर तुझे जाना ही है तो तुम अकेले नहीं जाओगे. हम सब भी तुम्हारे साथ चलेंगे. तभी लिली और मधु भी बोलती है हाँ हाँ हम भी चलेंगे.
सौरव और लिली तुम दोनों यही रुकोगे. उस पहाडी पर सिर्फ मै और मधु जाएगे.राघव ने कहा। ये सुनकर सौरव बोलता है, क्यों? हम भी साथ चलेंगे!
राघव बोलता है, तुम दोनों को इन दोनों जिन्नो पर नजर रखनी है, कही ये बच्चों को बलि के लिए न उठा ले."इनको जादू आता है, अगर इन दोनों ने हम पर हमला कर दिया तो हम किया करेंगे?" सौरव ने डरते हुए कहा।
ये सुनकर राघव अपने गले से लॉकेट निकाल कर सौरव को थमा देता है और कहता है, "जब तक तुम्हारे पास यह लॉकेट रहेगा ये तुम्हें कुछ नहीं कर सकते"। राघव ने आगे कहा, चलो मधु हम दोनों को काली पहाडी की ओर चलना चाहिए। मधु हाँ में सिर हिलाती है और वे दोनों हवेली के बाहर की ओर चलने लगते है।
कलिंगेश जिन्न राघव को रोकते हुए कहता है, एक बार और सोच लो वह खतरों से भरी हुई जगह है. राघव पीछे की ओर घूमते हुए कहता है, "मैं काली पहाडी पर जाऊंगा"। अगर तुमने जाने की सोच ही ली है तो थोडी देर रुको! कलिंगेश ने कहा।
यह बोलकर वह मंत्र पढने लगता है और तभी हवा में एक मायावी शक्तियों से भरी एक तलवार प्रकट होती है. जिसकी शक्तियों का तेज बहोत ज्यादा था. "ये तलवार तुम्हारे लिए है" कलिंगेश ने राघव की ओर देखते हुए कहा... राघव एकटक बिना पलकें झपकाए तलवार को अच्छे से देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका तेज़ ही इतना था कि उसे साफ़-साफ़ देखा पाना संभव नहीं था। "मेरे लिए है?" राघव ने हैरानी से कहा। कलिंगेश बोला, ये तुम्हारी इस सफर मे मदद करेगी...
ये सुनकर राघव उस तलवार को पकड़ने की कोशिश करता है। जैसे ही राघव ने तलवार छुई एकदम से उसकी चीख निकल गई और एक झटके से हाथ पीछे की ओर हट गया, उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई तलवार को नहीं साक्षात् बिजली को ही हाथ में पकड़ लिया हो। और साथ ही वह तलवार भी गायब हो जाती है. "बहुत घमंडी तलवार थी मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। और अगर तलवार को गायब ही करना था, तो मुझे दी क्यूँ थी...."राघव ने गुस्से में कहा।
कलिंगेश जिन्न ज़ोर-ज़ोर से हसने लगता है, "वह कोई आम तलवार नहीं थी. वह तलवार उन्ही दिव्य अस्त्रों मे से एक है, जिसका नाम महिमा है. जोकि जादुई दुनिया और जिन्नात की दुनिया मे शक्तिशाली तलवार मे से एक है." कलिंगेश ने कहा।
ये सुनकर चारो दोस्त हैरान हो जाते है. "सबसे शक्तिशाली तलवार, महिमा तलवार! और मै उसको कैसे चलाऊंगा. मुझे तो जादू के बारे मे कुछ भी नहीं पता? और वह मेरी तलवार है भी या नहीं? वैसे भी वह तो गायब हो गयी है." राघव ने पूछते हुए कहा।
कलिंगेश जिन्न ने कहा, "वह तलवार तुम्हारी ही है, वह कोई आम तलवार नहीं है, जो भी उसको पहली बार अपने हाथ मे पकडता है, वह उसी को अपना स्वामी मानती है, और उसी के कहे अनुसार चलती है।" अब राघव ना चाहकर भी महिमा तलवार से जुड़ चुका है" आखिर क्या लिखा है उसकी किस्मत में.....
"मेरी तलवार मेरे हाथ मे आजा....लेकिन वह तलवार नहीं आती है। तुम झूठ बोल रहे हो देखो वह तो नहीं आई। राघव ने गुस्से में कहा।
कलिंगेश बोलता है, वह ऐसे नहीं आएगी, तुम्हे उसे अपने दोस्त की तरह मानना होगा. और उसकी शक्ति को सँभालने के लिए शारीरक रूप से मजबूत भी होना होगा...
राघव ने कहा, जो मेरे बुलाने से भी नहीं आती ऐसी तलवार को अपनी दोस्त नहीं बना सकता और वैसे भी कितना Attitude दिखाती है छूते ही गायब हो गई, चलो मधु पहले हम घर चलना है। सफर काफी लम्बा होने वाला है कुछ तैयारी कर लेते. दोनों घर की ओर निकल जाते है. लेकिन सौरव और लिली उसी हवेली मे थे. वे दोनों उन दोनो जिन्नो के ऊपर नजर रखे हुए थे.
राघव और मधु घर पहुंच जाते है. तभी दादा जी राघव से कहता है, "कहाँ रह गए थे. पता है तुम्हारी दादी और मुझे कितनी चिंता हो रही थी. और वे तुम्हारे दो दोस्त कहाँ है?
ये सुनकर राघव बोलता है, "वे एक दोस्त के पास है, और हम दोनों को भी अभी निकलना होगा." ये सुनकर राघव की दादी बोलती है, अभी?
राघव ने कहा, हाँ अभी मुझे कोई जरुरी काम याद आ गया है. जिसको पूरा करना जरुरी है। वरना मैं कभी ऐसे नहीं जाता... ये सुनकर उसका दादा बोलता है, अपना ध्यान रखना... राघव और मधु कमरे मे तैयारी करने के लिए चले जाते है. तभी मधु राघव से पूछती है, "तुमने अपने दादा दादी से झूठ क्यों बोला?"
राघव ने कहा, अगर मै उन्हें सच बता देता, तो वे मेरी चिंता करने लगते और अपनी तबियत खराब कर लेते. मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से उनकी तबियत खराब हो. राघव ने आगे कहा, कुछ खाने का समान भी रख लेना, क्या पता रास्ते मे कुछ मिले या नहीं. और अपना फोन भी...
तैयारी पूरी करने के बाद दोनों घर से काली पहाडी के लिए निकल जाते है. आगे काली पहाडी पर उन दोनों के साथ क्या हुआ?