Episode - 21 ( नफरत का जहरीला स्पर्श)
गौरव ने जब रिया के मां - बाप की जान लेने की धमकी दी , तो रिया के शरीर की सारी ताकत जैसे एक पल में निचोड़ ली गई हो । वह जो अब तक शेरनी की तरह लड़ रही थी, एक बेबस परिंदे की तरह शांत हो गई । उसकी आंखों में छाई वो वीरानी देखकर गौरव के भीतर का शैतान जाग उठा ।
उसने रिया की गर्दन के पीछे हाथ डालकर उसे झटके से अपनी ओर खींचा । रिया का चेहरा गौरव के चेहरे से महज कुछ इंच दूर था । गौरव की आंखों में नफरत की सुर्ख लाल लहरे तैर रही थी ।
"तो अब समझ आया कि तुम्हारी औकात क्या है ? तुम न भाग सकती हों , न मर सकती .... और नाही मेरे साए से पीछा छुड़ा सकती हो ," गौरव की भारी आवाज रिया के चेहरे पर गर्म भाप की तरह लग रही थी ।
रिया ने घृणा से अपनी आंखे बंद कर मुंह फेर लिया , लेकिन अगले ही पल गौरव ने अपनी मजबूत पकड़ उसके गालों पर जमाई और उसके चेहरे को अपनी ओर मोड़ा । उसने बिना किसी चेतावनी के, अपने कठोर और ठंडे होठ रिया के नरम, कांपते हुए होठों पर बेरहमी से दबा दिए ।
वह कोई चुंबन नहीं था , वह एक हमला था । गौरव ने उसके होठों को इतनी जोर से भींचा कि रिया के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली । उसे महसूस हुआ कि गौरव के दांत उसके निचले होठ पर गड़ रहे है , जिससे खून का स्वाद उसके मुंह में घुलने लगा । वह चुंबन के जहर से भरा था - गौरव उसे चख नहीं रहा था , बल्कि उसे नीचा दिखा रहा था ।
रिया का पूरा वजूद इस छुवन से कांप उठा, उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके जिस्म को गंदे नाखूनो से खुरच रहा हो । गौरव ने अपनी पकड़ और कड़ी कर दी , उसके होठ रिया के होठों को मसल रहे थे , जैसे वह रिया की पहचान मिटा देना चाहता हो ।
रिया ने अपने हाथ मुट्ठियों में भींच लिए , उसके नाखूनों ने उसकी अपनी ही हथेलियों को जख्मी कर दिया , पर वह हिल भी नहीं सकी ।
कुछ सेकेंड बाद , जो रिया के लिए सदियों जैसे थे , गौरव पीछे हटा । उसने अपने अगूंठे से अपने होठों पर लगे रिया के खून को पोछा और एक घिनौनी मुस्कान के साथ कहा -
" कैसा लगा? तुम्हारे उस आर्यन की याद आई? अब हर रोज , हर पल... मै तुम्हे इसी तरह याद दिलाऊंगा कि तुम किसकी अमानत हो । और हा रिया अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारे मां - बाप चैन से जिए और सुखी रहे, तो तुम्हे चुप - चाप एक अच्छी पत्नी बनकर मेरे इस घर में रहना होगा । तुम अपनी जान तभी दोगी , जब मैं हुक्म दूंगा । वरना, लाशे गिनने के लिए तैयार रहना । "
गौरव ने उसे घृणा से छोड़ा और खड़ा हो गया । रिया बिस्तर पर सिमट गई , उसकी आखरी उम्मीद भी मर चुकी थी । वह अब एक ऐसी कैदी थी जिसकी चाबी उसके अपनो की जान के पास थी ।
रिया ने अपनी बाह से अपने होठों को पागलों की तरह रगड़ - रगड़ कर साफ करना शुरू कर दिया , जैसे वह उस गंदी छुवन को उतार फेंकना चाहती हो । पर गौरव का वह जहरीला निशान उसकी रूह तक उतर चुका था ।
रिया उठी और खुद को संभालते हुए बाथरूम में चली गई और अपने ऊपर से पानी डालने लगी उसने अपने आप को पूरी तरह से भीगा दिया उसकी आँखें पथरा गई थी बस दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि किसी तरह से मुझे यहां से निकल कर अपने माता - पिता के पास जाना होगा और गौरव का सच सबके सामने लाना होगा ।
उस खौफनाक रात के बाद , जब सूरज की पहली किरण कमरे में दाखिल हुई , तो वह रिया के टूटे हुए वजूद पर नहीं , बल्कि एक नए संकल्प पर पड़ी । रिया ने आईने में अपने जख्मी होठों और नीली पड़ी कलाईयों को देखा । उसने तय कर लिया था कि वह अब और नहीं रोएगी । अगर उसे अपने माता - पिता को बचाना है और इस जेल से आजाद होना है , तो उसे शिकार बन कर नहीं , बल्कि शिकारी बन कर रहना होगा ।
रिया ने कपड़े बदले और लंबी सांस लेते हुए अपने आप से कहने लगी " चल रिया अपने पापा का भरोसा जीतने के लिए तैयार हो जा, खुद को मजबूत बना और गौरव के हर वार को सहन करने के लिए हिम्मत जुटा । तुझे हार नहीं मानना है तुझे अपने पापा की नजरो में फिर से वहीं सम्मान और प्यार लाना होगा ।
जब गौरव सुबह कमरे में आया , तो उसे लगा था कि रिया उसे नफरत से देखेगी या फिर से मरने की कोशिश करेगी । पर रिया शांत थी ।
रिया गौरव के सामने सलीके से खड़ी थी ....
"मै समझ गई हूं गौरव," रिया ने अपनी आवाज को स्थिर रखते हुए कहा।" मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है। अगर मेरे माता - पिता की खुशी तुम्हारी खुशी में है , तो मैं इस घर को और तुम्हे अपनाने के लिए तैयार हूं। बस मुझे थोड़ा वक्त चाहिए ।"
गौरव को अपनी जीत पर यकीन नहीं हो रहा था । पर उसकी सनक को सुकून मिल रहा था ।
रिया कमरे से बाहर जाने लगी तभी गौरव ने रिया का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ झटके से खींच लिया रिया की सांसे बढ़ गई उसकी बढ़ती धड़कने उसे कमजोर करने लगी पर रिया ने खुद को साध लिया ।
रिया गौरव की बाहों में कैद हो गई , गौरव उसे देख रहा था कि ये कोई विरोध नहीं कर रही । तब रिया बोली " छोड़ो मां जी अभी गुस्सा करेंगी रसोई में काम है।"
गौरव ने उसे छोड़ दिया । पर उसे सक था कि , रिया सच में बदल गई है या बदलने का दिखावा कर रही है वह उसे परखने के लिए ... नई - नई तरकीब इस्तेमाल करने लगा ।
रिया ने अपने सीने पर हाथ रख कर लंबी सांस ली और रसोई में चली गई । उसके शरीर का रोम - रोम कल रात के जुल्म से कराह रहा था , पर चेहरे पर उसने एक पथरीली शांति ओढ़ ली थी ।
वह चाय बना रही थी , तभी उसे अपने पीछे किसी की भारी मौजूदगी का अहसास हुआ...
क्या वो गौरव था ? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर बताएं। कहानी पसंद आए तो रेटिंग जरूर करें।