- एक अधूरी सच्चाई :
दस साल की खुशियों के बाद भी,
कुछ कहानीयों में एक ऐसा पन्ना भी आता है…
जो शायद कभी पलटा भी नहीं जाता ।
उस रात बारिश तो रुक चुकी थी। ठंडी-ठंडी हवाएं भी बह रही थीं और आशा किसी परियों के सपनों के साथ गहरी नींद में सो चुकी थी !
आरिफ़ और आईशा बालकनी में बैठे एक दूसरे से बातें कर रहे थे ----
“आरिफ़…” आईशा धीरे से कहती है....,
“तुमने कभी सोचा है…? अगर उस दिन रिया हमसे ना मिलती...? तो हमारा परिवार कितना अधुरा अधुरा सा लगता, है ना...!”
आरिफ़ हल्का सा मुस्कुरा कर कहने लगा---
"हां तुम ने सही कहा, उसके रहने से हमारा घर भी कितना हरा - भरा सा लगता था , लेकिन जब से वह गई है हमारा घर बिल्कुल सुना - सूना सा लग रहा था, लेकिन शुक्र है कि हमारी जिंदगी में अब आशा आ चुकी है , वरना हमारी मुहब्बत कि कहानी थोड़ी अधुरी अधुरी सी लगती !”
"पहले तो रिया हर हफ्ते में एक बार आजाया करती थी लेकिन पिछले कुछ महीनों से वो बहुत कम ही आती-जाती है। आईशा थोड़ा चिंतित होते हुए कहने लगी..."
"लेकिन उसकी शादी को भी तो तीन साल हो चुके हैं।" आरिफ़ ने कहा ---
"रोहित देखने में तो काफी सुलझा हुआ और शांत स्वभाव का आदमी लगता है ।
अच्छी खासी बिज़नेस भी है , अच्छी गाड़ी, अच्छा घर, ऊपरवाले का दिया सबकुछ है!"
लेकिन…
"पिछली बार जब रिया आई थी, उसकी आँखों में मैंने वो चमक नहीं देखी..., मैंने पूछा भी था--
“सब ठीक है ना?”
रिया ने हँसकर टाल दिया था,
“हाँ दीदी… बस काम का तनाव है।”
"लेकिन.. मैं सिर्फ उसकी शब्दों को ही नहीं, उसकी खामोशियों को भी समझती हूं, बहन जो हुं...!"
तुम बेकार में ही परेशान हो रही हो, चलो अब बहुत रात हो गई, सो जाते हैं.." आरिफ़ ने उसका हाथ पकड़ कर उठाते हुए कहा ----
तीन दिन के बाद…
रात के ग्यारह बजे दरवाज़े की घंटी बजी।
आईशा ने दरवाज़ा खोला तो सामने सामने रिया खड़ी थी भीगी हुई। चेहरा डरा हुआ लग रहा था और हाथ काँप रहे थे।
“दीदी…” बस इतना कहकर वो आईशा से लिपट गई।
आरिफ़ ने तुरंत दरवाज़ा बंद कर किया।
“क्या हुआ?” आईशा ने हैरानी से पूछा ---
लेकिन रिया ने कोई जवाब नहीं दिया चुप रही।
उसके हाथों से शराब की गंध आ रही थी -- लेकिन वो खुद की नहीं, किसी और की....
“रोहित…” उसकी आवाज़ टुटने लगी ।
“दीदी...वो पहले जैसा नहीं रहा।”
धीरे-धीरे सच सामने आने लगा----
रोहित को शराब की बुरी लत लग गई है।
कई बार देर रात नशे में घर आया ।
उसके कुछ पुराने दुश्मन हैं — बिज़नेस की दुनिया के।
कभी फोन पर धमकियाँ, तो कभी बाहर गाड़ी का पीछा किया जाना।
“मुझे लगता था के कुछ दिनों के बाद सब ठीक हो जाएगा…” कहते हुए रिया रोने लगी।
आईशा ने उसके चेहरे को प्यार से छुते हुए कहा---- ,
“तुम अकेली नहीं हो , हम तुम्हारे साथ हैं ।” आरिफ़ चुपचाप सब सुन रहा था। उसके चेहरे पर चिंता साफ़ झलक रही थी।
“क्या रोहित ने तुम्हें कभी…?” कहते हुए वो रुक गया---
रिया ने सिर झुका लिया।
“वो बुरा इंसान नहीं है दीदी… लेकिन शराब ने उसे बदल दिया है।” कमरे में सन्नाटा फैल गया।
बाहर फिर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी --
जैसे हर मोड़ पर वही गवाह बनकर खड़ी हो।
अगली सुबह रोहित का फोन आया।
“रिया कहाँ है?” उसकी आवाज़ में गुस्सा साफ झलक रहा था।
आरिफ़ ने फोन लिया और कहा---- “वो बिल्कुल सुरक्षित है।” कुछ पल की चुप्पी रही।
फिर दूसरी तरफ से ठंडी आवाज़ आई —
“उसे समझाओ… घर तो उसे लौटना ही होगा।”
और फोन कट गया।
आईशा के दिल में एक अनजाना सा डर उतर आया। वो सोचने लगी के ---
ये सिर्फ पति-पत्नी के बीच का झगड़ा नहीं है…
इसके पीछे कुछ और बात है...!
और शायद अब… आने वाली बारिश सिर्फ यादों की ही नहीं, बल्कि कोई भयंकर तूफ़ान की खबर लाने वाली है।
दोस्तों मेरी कहानी को पसंद करने के लिए आप लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया, आगे कहानी और भी बहुत रोमांचक होने वाला है और बहुत से राज़ से पर्दा उठने वाले है तो इस कहानी से जुड़े रहें और अपना फीडबैक देना न भूलें शुक्रिया....