महिमा: शक्तिशाली तलवार (सीजन 1) चैप्टर 4 Ashish Taak द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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महिमा: शक्तिशाली तलवार (सीजन 1) चैप्टर 4

राघव देखता है कि आग का बहोत बडे गोले जैसी जादुई शक्ति उसकी और बढ रही है. और फिर तभी अचानक से एक बडे धमाके के साथ फट जाता है. और चारो और गहरा धुआँ फैल जाता है. यह देखकर पुरुष जिन्न और स्त्री जिन्न दोनों जोर- जोर से हंसने लगते हैं।


थोडी देर बाद धुआँ हटता है. और वे दोनों जिन्न देखते हैं, लॉकेट की शक्ति से राघव के चारों ओर एक जादुई सुरक्षा कवच बना हुआ था। जिसके कारण राघव को कुछ भी नहीं हुआ था और वह ज्यो का त्यों ऐसे ही खडा हुआ था।


ऐसे ही उन दोनों जिन्नो ने राघव को मारने के लिए अनेक जादूई शक्तियों का इस्तेमाल किया पर वे शक्तियां राघव का कुछ नहीं बिगाड सकी. तभी राघव स्त्री जिन्न की ओर आगे बढता है. वह जैसे- जैसे स्त्री जिन्न के पास जा रहा था, स्त्री जिन्न को ऐसा लग रहा था, जैसे उसका शरीर आग के समान जल रहा हो।


यह सब उस लॉकेट की दिव्य शक्ति से हो रहा था जो राघव ने अपने गले मे पहन रखा था. तभी अचानक से स्त्री जिन्न दर्दनाक आवाज में चिल्लाती हुई बोलती है, मुझसे दूर रहो मेरे पास मत आओ मेरा शरीर जल रहा है मुझसे दूर रहो" तभी दोनों जिन्न बोलते है, हम हार मानते हैं तुम अपने दोस्तों को लेकर चले जाओ।


यह बोलकर पुरुष जिन्न दोबारा से एक मंत्र पडता है और उसके दोस्तों की और फूंक मारता है. उसके ऐसा करते ही राघव के दोस्त होश में आ जाते हैं. होश में आने के बाद लिली डरती हुई कहती है राघव जल्दी चलो वरना ये हमें मार देंगे इन्होने ही मुझे अपनी शक्तियों से बेहोश कर दिया था।


राघव लिली की बात को बीच में ही काटते हुए कहता है, हमें अब इनसे कोई खतरा नहीं है. यह बात सुनकर सौरव बोलता है, कोई खतरा नहीं है मतलब! यह हमारी तरह तुम्हारे दोस्त थोडी ना है ये जिन्न है जान से मार देंगे।


राघव लॉकेट की ओर इशारा करते हुए बोलता है, इस लॉकेट में जरूर कोई दिव्य शक्ति है. आज इसी के कारण हम सब की जान बच पाई है यह सुनकर मधु बोलती है, यह तो वही लॉकेट है ना जो दादी जी तुम्हारे लिए लेकर आई थी. राघव बोलता है हाँ ये वही लॉकेट है।


चारों दोस्त हवेली से बाहर जाने लगते है, तभी उन्हें रोने की आवाज सुनाई देती है, रोने की आवाज को सुनकर राघव रुक जाता है और वह देखता है कि यह आवाज तो स्त्री जिन्न के रोने की है. जो रोते हुए बोल रही होती है" अब हमें मुक्ति कैसे मिलेगी?


यह सुनकर राघव कहता है, मुक्ति! तुम तो निर्दोष बच्चों की बलि देकर शक्तिशाली बनना चाहते हो और सभी को अपने अधीन करना चाहते हो. यह सुनकर पुरुष जिन्न बोलता है, नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम बोल रहे हो यह एक तांत्रिक विद्या है. अगर हम आज बलि दे देते तो हमें मुक्ति मिल जाती।


हम ये तांत्रिक विद्या शक्तिशाली बनने के लिए नहीं कर रहे थे और ना ही किसी को अधीन करने के लिए. यह सुनकर लिली बोलती है, फिर क्या वह गांव में रहने वाले बुजुर्ग जो बातें कर रहे थे वह झूठ बोल रहे थे. तभी स्त्री जिन बोलती है, हमें नहीं पता कि हमारे बारे में तुम्हे किसने क्या बताया है?


राघव ने कहा, क्या तुम हमें सही से बता सकते हो. तुम दोनों के साथ क्या हुआ और तुम इस हवेली मे कैसे? क्या पता हम कुछ मदद कर दे आप दोनों की. यह सुनकर पुरुष जिन्न ने कहा, तुम हमारी मदद करोगे. राघव बोलता है, पहले तुम बताओ अगर मुझे तुम सही लगे तो मैं जरुर मदद करूंगा।


राघव के ये शब्द सुनते ही पुरुष जिन्न की आँखों में आशा की एक चमक साफ दिखाई दे रही थी उसने भावुक होकर कहा, पता नहीं क्यों मुझे तुम ओरो से अलग लगते हो? तो आज मैं उजागर करता हूँ इतिहास के वे पन्ने जो हमारे इस रूप का कारण बना. मेरा नाम कलिंगेश है, आज से करीब एक सौ बीस साल पहले मैं इस प्रदेश का राजा था और मेरे नाम पर ही इसका नाम कलिंग रखा गया था. यह मेरी पत्नी अलीना है. और यह हवेली मेरी है. राघव और उसके दोस्त उसकी बाते बहुत ध्यान से सुन रहे थे।


कलिंगेश जिन्न भावुक होकर आगे कहा, मेरा एक बेटा था जिसका नाम हरमीत था. जोकि युद्ध कला मे निपुण था. अलीना जोकि कलिंगेश की पत्नी थी वह कहती है, हमारे पास कुछ ऐसे शक्तिशाली अस्त्र ओर ग्रन्थ थे, जिसमे दिव्य ओर अलौकिक शक्तियो की सर्वोच्चतम विधि लिखी हुई थी।


शक्तिशाली अस्त्र और ग्रंथ ये तुम्हे कहाँ से मिले? सौरव ने हैरानी के साथ पूछा. सौरव की बात सुनकर कलिंगेश नामक जिन्न बताते हुए कहा, ये मेरे पूर्वर्जो के थे. उन्होंने ये कठोर तप ओर साधना के फलस्वरूप मिले थे. यह सुनकर राघव पूछते हुए कहा, अब ये अस्त्र और ग्रंथ कहाँ है?


तभी कलिंगेश जिन्न ने कहा, वे अस्त्र और ग्रंथ मेरे अंदर ही है. यह सुनकर मधु बोलती है तुम्हारे अंदर कैसे?


कलिंगेश बोलता है, मैंने अपनी शक्तियों से उन्हें अपने अंदर ही सुरक्षित रखा है. राघव ने कहा, फिर तो तुम सभी दिव्य और अलौकिक शक्तियों को हासिल कर चुके होंगे?


ये सुनकर कलिंगेश जिन्न निराशा भरी आवाज मे कहता है, नहीं! मैं शक्तियों के उस शिखर तक नहीं पहुंच सका, दिव्य शक्तियों के उस शिखर तक पहुंचना बहुत मुश्किल है?


अगर कोई शक्तियों के उस शिखर तक पहुंच जाए तो? मधु ने हैरानी से पूछा...


कलिंगेश जिन्न बोला, शक्तियों के उस शिखर पर पहुंचना नामुमकिन है, अगर कोई उस शिखर तक पहुंच जाता है, तो इस पृथ्वी पर उसे कोई नहीं हरा सकता. वो एक तरह से अपराजित हो जायेगा।


ये सुनकर राघव ओर उसके दोस्त हैरान हो जाते है. राघव ने कहा, अगर ये शक्ति किसी गलत हाथो मे लग जाए तो हमारा लिए ही नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.


कलिंगेश जिन्न की पत्नी अलीना ने कहा, हाँ, फिर वो व्यक्ति अगर चाहे तो पूरी पृथ्वी पर हुकुमत कर सकता है.


ये सुनकर कलिंगेश जिन्न ने कहा, पर शक्तियों के उस शिखर पर पहुंचना नामुमकिन- सा है। तो तुम्हारे बेटा हरमीत कहाँ है? सौरव ने पूछते हुए कहा...


ये सुनकर कलिंगेश जिन्न और उसकी पत्नी अलीना भावुक हो जाते है....