अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान। - एपिसोड 28 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान। - एपिसोड 28

अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान
एपिसोड 28: छाया द्वार का चुना हुआ नाम
राजगढ़ महल की टूटी हुई दीवारें लगातार काँप रही थीं।
धूल हवा में फैल चुकी थी।
दूर पहाड़ों के बीच उठी काली रोशनी अब और भी तेज़ हो गई थी।
ऐसा लग रहा था जैसे धरती के भीतर कोई विशाल शक्ति जाग रही हो।
अनन्या की नज़र अब भी नोटबुक के अंतिम पन्ने पर जमी हुई थी।
"अनन्या"
उसका अपना नाम।
छाया द्वार के निशान के नीचे।
उसका गला सूख गया।
“यह... कैसे संभव है?”
विराज कुछ क्षण तक चुप रहा।
फिर उसने आँखें बंद कर लीं।
जैसे वह किसी ऐसी सच्चाई को स्वीकार कर रहा हो जिससे वह वर्षों से बचता रहा हो।
“मुझे डर था कि यही होगा।”
“मतलब?”
अनन्या ने कठोर स्वर में पूछा।
विराज ने धीरे-धीरे उसकी ओर देखा।
“छाया द्वार कभी किसी को यूँ ही नहीं चुनता।”
“चुनता?”
“हाँ।”
हवा अचानक और ठंडी हो गई।
महल के आसपास फैले पेड़ों की शाखाएँ अजीब तरह से हिलने लगीं।
“हजारों वर्षों से छाया द्वार सोया हुआ था।”
विराज बोला।
“लेकिन जब भी वह जागता है, वह एक नाम चुनता है।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसे एक कथावाहक चाहिए।”
सन्नाटा।
“कथावाहक?”
“वह व्यक्ति जिसके माध्यम से वह दुनिया में प्रवेश कर सके।”
अनन्या का दिल बैठ गया।
“और अब...”
विराज ने सिर झुका लिया।
“उसने तुम्हें चुना है।”
महल के नीचे से फिर गड़गड़ाहट सुनाई दी।
इस बार पहले से अधिक शक्तिशाली।
धड़ाम!
ज़मीन में लंबी दरार पड़ गई।
अनन्या और विराज तुरंत पीछे हट गए।
उस दरार के भीतर से काला धुआँ निकलने लगा।
लेकिन यह साधारण धुआँ नहीं था।
उसके भीतर आकृतियाँ थीं।
चेहरे थे।
आवाज़ें थीं।
हजारों फुसफुसाहटें एक साथ सुनाई देने लगीं।
“हमें याद करो...”
“हमें पूरा करो...”
“हमें मुक्त करो...”
अनन्या का सिर दर्द से फटने लगा।
उसने अपने कान बंद कर लिए।
लेकिन आवाज़ें रुक नहीं रही थीं।
तभी नोटबुक के पन्ने तेजी से पलटने लगे।
एक नया संदेश उभरा।
"छाया द्वार कहानियों को नहीं खाता।"
"वह उन्हें जन्म देता है।"
अनन्या का दिल धड़क उठा।
यह बात पूरी तरह अलग थी।
अब तक वह सोचती रही थी कि यह कोई दुष्ट शक्ति है।
लेकिन अगर यह कहानियों को जन्म देता है...
तो फिर खतरा कहाँ था?
जैसे उसकी सोच पढ़कर,
नोटबुक पर अगली पंक्ति उभरी—
"हर कहानी एक भावना से जन्म लेती है।"
"लेकिन छाया द्वार उन भावनाओं को जन्म देता है जिन्हें कभी जीना नहीं चाहिए था।"
अचानक उसके सामने दृश्य बदल गया।
वह फिर उसी प्राचीन मंदिर के सामने खड़ी थी।
हजारों वर्ष पहले का समय।
मंदिर के नीचे वही विशाल दरवाज़ा।
और उसके सामने सैकड़ों लोग।
लेकिन इस बार उसने कुछ और देखा।
उन लोगों में एक लड़की भी थी।
लगभग उसकी उम्र की।
उसके हाथ में भी वैसी ही नोटबुक थी।
और उसकी आँखों में वही जिज्ञासा थी।
दृश्य आगे बढ़ा।
लड़की धीरे-धीरे दरवाज़े के पास गई।
बाकी लोग उसे रोक रहे थे।
लेकिन वह नहीं रुकी।
फिर उसने दरवाज़े को छुआ।
और उसी क्षण—
दरवाज़े के भीतर से काला प्रकाश निकला।
चीखें गूँज उठीं।
मंदिर टूटने लगा।
और वह लड़की...
गायब हो गई।
दृश्य टूट गया।
अनन्या हाँफने लगी।
“वो कौन थी?”
विराज का चेहरा गंभीर हो गया।
“पहली कथावाहक।”
“क्या हुआ उसके साथ?”
“कोई नहीं जानता।”
“लेकिन उसके बाद से हर युग में छाया द्वार एक नया नाम चुनता रहा।”
“और हर बार...”
उसकी आवाज़ धीमी हो गई।
“दुनिया बदल गई।”
अनन्या को यह उत्तर बिल्कुल पसंद नहीं आया।
“तुम सच छिपा रहे हो।”
विराज ने उसकी आँखों में देखा।
और पहली बार वह असहज दिखाई दिया।
“हाँ।”
सन्नाटा।
अनन्या चौंक गई।
उसे उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी आसानी से मान लेगा।
“क्यों?”
विराज कुछ पल तक चुप रहा।
फिर बोला—
“क्योंकि मैं भी एक कथावाहक था।”
अनन्या का दिल जैसे रुक गया।
“क्या?”
“चार सौ साल पहले।”
“मुझे भी चुना गया था।”
महल के चारों ओर अचानक हवा तेज़ हो गई।
जैसे स्वयं दुनिया यह कहानी सुनना चाहती हो।
“मैं एक साधारण इंसान था।”
“मैंने सोचा कि मैं छाया द्वार की शक्ति को समझ सकता हूँ।”
“मैंने सोचा कि मैं उसे नियंत्रित कर सकता हूँ।”
वह कड़वाहट से मुस्कुराया।
“और हर मूर्ख की तरह... मैं गलत था।”
उसकी आँखों में दर्द चमक उठा।
“मैंने दरवाज़ा खोल दिया।”
अनन्या के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
“तुमने क्या देखा?”
विराज का चेहरा अचानक सफेद पड़ गया।
“कुछ ऐसा...”
“जिसका कोई नाम नहीं।”
“निराकार?”
विराज ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
महल के नीचे से फिर धमाका हुआ।
इस बार इतना शक्तिशाली कि मुख्य मीनार का एक हिस्सा टूटकर गिर पड़ा।
धड़ाम!
धूल का विशाल बादल उठ गया।
विराज ने जल्दी से कहा—
“हमें यहाँ से निकलना होगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि छाया द्वार पूरी तरह जागने वाला है।”
लेकिन तभी...
नोटबुक चमकने लगी।
उसके पन्ने अपने आप खुल गए।
और बीचोंबीच एक नक्शा उभर आया।
पहाड़।
जंगल।
नदी।
और उनके बीच एक लाल निशान।
नक्शे के नीचे शब्द लिखे थे—
"पहला ताला"
अनन्या ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“ताला?”
विराज की आँखें फैल गईं।
“असंभव...”
“क्या?”
“मुझे लगा था कि वे नष्ट हो चुके हैं।”
“कौन?”
“छाया द्वार की मुहरें।”
सन्नाटा।
विराज ने जल्दी-जल्दी समझाना शुरू किया।
“हजारों साल पहले छाया द्वार को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था।”
“उसे सात मुहरों से बाँधा गया था।”
“सात ताले।”
“सात संरक्षक।”
अनन्या ध्यान से सुन रही थी।
“अगर सभी ताले टूट जाएँ...”
विराज की आवाज़ काँप गई।
“तो निराकार इस दुनिया में प्रवेश कर जाएगा।”
“और अगर हम ताले बचा लें?”
“तो शायद...”
वह पहली बार आशा से मुस्कुराया।
“शायद अभी भी समय है।”
नोटबुक का नक्शा और स्पष्ट हो गया।
लाल निशान धीरे-धीरे चमकने लगा।
और उसके नीचे एक नया नाम उभरा।
"कालवन"
जैसे ही यह नाम दिखाई दिया—
अनन्या के दिमाग में अचानक एक अजीब दृश्य चमका।
एक काला जंगल।
पेड़ों पर लटके हुए हजारों खाली मुखौटे।
और जंगल के बीच खड़ा एक बच्चा।
जिसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
वह सीधे उसकी ओर देख रहा था।
और मुस्कुरा रहा था।
अनन्या ने घबराकर आँखें खोल दीं।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
“मैंने उसे देखा...”
“किसे?”
अनन्या की आवाज़ फुसफुसाहट से भी धीमी थी।
“पहले संरक्षक को...”
🔚 Episode 28 Ending Hook
उसी क्षण—
दूर पहाड़ों के बीच उठी काली रोशनी अचानक फट गई।
और आसमान में एक विशाल छाया दिखाई दी।
इतनी विशाल कि उसने बादलों को ढक लिया।
विराज का चेहरा भय से भर गया।
“नहीं...”
“यह नहीं हो सकता...”
अनन्या ने ऊपर देखा।
और उसे महसूस हुआ—
वह छाया उन्हें देख रही थी।
सीधे।
फिर पूरे आकाश में एक आवाज़ गूँजी—
“सात में से पहला जाग चुका है...”
“कथावाहक, तुम्हारा स्वागत है।”