*1. पहले कारण समझो, फिर डांटो*
बच्चा बिना वजह ज़िद नहीं करता। कभी उसे भूख लगी होती है, कभी नींद आ रही होती है, कभी बस माँ का ध्यान चाहिए होता है। मेरा बेटा जब रो-रोकर खिलौना मांगता था, मैं पहले चिल्ला देती थी। फिर मैंने समझा कि उसे बोर हो रहा था, खेलना चाहता था।
*2. उसे विकल्प दो, हुक्म मत दो*
"ये सब्ज़ी खाओ" - बच्चा तुरंत मना कर देगा। क्योंकि उसे लगता है उसकी मर्ज़ी नहीं पूछी गई।
तरीका ये है: उसे 2 विकल्प दो। बोलो "बेटा आज रोटी खाओगी या पराठा?" "नीला कुर्ता पहनोगी या लाल वाला?" दोनों विकल्प में तुम्हारी मर्ज़ी है, पर बच्चे को लगता है फैसला उसने लिया है।
*3. बेकार की ज़िद को नज़रअंदाज़ करो*
कुछ ज़िद सिर्फ ध्यान पाने के लिए होती है। बच्चा ज़मीन पर लेटकर पैर पटक रहा है, खिलौना चाहिए। अगर वो खिलौना ख़तरनाक नहीं है, तो 2 मिनट नज़रअंदाज़ कर दो।
मैं पहले तुरंत मान जाती थी। फिर बेटा रोज़ यही करता था। अब मैं चुप-चाप अपना काम करती हूँ। 2 मिनट बाद वो खुद उठकर मेरे पास आ जाता है।
*4. अच्छा काम करने पर शाबाश दो*
बच्चा जब बिना ज़िद किए बात मान ले, तो उसे इग्नोर मत करो। तुरंत गले लगाओ और बोलो "वाह मेरा बेटा कितना समझदार है। मम्मी की कितनी मदद करता है।"
तारीफ़ का असर डांट से 10 गुना ज़्यादा होता है। बच्चा सोचता है "मम्मी खुश हो गई, कल भी ऐसे ही करूंगा"
बच्चा बिना वजह ज़िद नहीं करता। कभी उसे भूख लगी होती है, कभी नींद आ रही होती है, कभी बस माँ का ध्यान चाहिए होता है। मेरा बेटा जब रो-रोकर खिलौना मांगता था, मैं पहले चिल्ला देती थी। फिर मैंने समझा कि उसे बोर हो रहा था, खेलना चाहता था।
अब मैं पहले प्यार से पूछती हूँ "बेटा क्या हुआ? क्या चाहिए तुम्हें?" 2 मिनट बात करने से आधी ज़िद वही खत्म हो जाती है। चिल्लाने से बच्चा और ज़िद्दी हो जाता है। प्यार से बात करो, वो खुद समझ जाएगा।
*5. पहले कारण समझो, फिर डांटो*
ज़िद के पीछे हमेशा कोई कारण होता है। हो सकता है बच्चे का मूड खराब हो, या वो थका हुआ हो, या उसे आपसे थोड़ा समय चाहिए हो। हम माँएँ भागदौड़ में ये भूल जाती हैं कि बच्चा भी इंसान है। उसकी भी फीलिंग्स हैं।
जब मेरा बेटा स्कूल जाने से मना करता था, मैं पहले डांट देती थी। फिर एक दिन मैंने उससे पूछा तो पता चला उसे क्लास का एक बच्चा तंग करता था। कारण पता चलते ही आधी समस्या हल हो गई। इसलिए अगली बार जब बच्चा ज़िद करे, तो डांटने से पहले 1 मिनट रुककर पूछो "क्या बात है बेटा?"।
*6. उसे विकल्प दो, हुक्म मत दो*
"ये सब्ज़ी खाओ" - बच्चा तुरंत मना कर देगा। क्योंकि
मेरा बेटा अब बिना रोए खाना खा लेता है। क्योंकि उसे लगता है "मम्मी ने मुझसे पूछा था"। छोटी सी बात है, पर असर बहुत बड़ा है। बच्चे को कंट्रोल में रखने का सबसे आसान तरीका यही है कि उसे लगे वो खुद फैसला ले रहा है।
*7. बेकार की ज़िद को नज़रअंदाज़ करो*
कुछ ज़िद सिर्फ ध्यान पाने के लिए होती है। बच्चा ज़मीन पर लेटकर पैर पटक रहा है, खिलौना चाहिए। अगर वो खिलौना ख़तरनाक नहीं है, तो 2 मिनट नज़रअंदाज़ कर दो।