दिन के समय पौधे सूरज की रोशनी से अपना खाना बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। इसमें पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इसलिए दिन में हवा साफ रहती है।
लेकिन रात को सूरज नहीं होता। रोशनी के बिना प्रकाश संश्लेषण बंद हो जाता है। तब पौधे भी हम इंसानों की तरह सांस लेते हैं। सांस लेने के लिए वो ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
इसीलिए बड़े लोग कहते हैं कि रात को पेड़ के नीचे मत सोया करो। लेकिन घर में 1-2 पौधे रखने से कोई नुकसान नहीं होता।
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पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। सुबह-सुबह जब हम उठते हैं तो चारों तरफ हरियाली देखकर मन खुश हो जाता है। बचपन से हमें सिखाया जाता है कि "पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ"। स्कूल में भी टीचर यही पढ़ाती हैं कि पौधे दिन में ऑक्सीजन देते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फिर बड़े लोग रात को पेड़ के नीचे सोने या बैठने से क्यों मना करते हैं? क्या रात को पौधे सच में नुकसान करते हैं? आइए आज इसे आसान भाषा में समझते हैं।
दरअसल पौधों में एक प्रक्रिया होती है जिसे प्रकाश संश्लेषण यानी Photosynthesis कहते हैं। दिन के समय जब सूरज की रोशनी पौधों की पत्तियों पर पड़ती है, तब पौधे हवा में से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और सूर्य की ऊर्जा की मदद से अपना भोजन बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पौधे ऑक्सीजन बाहर छोड़ते हैं। इसीलिए दिन में पार्क या जंगल में जाने से हमें ताज़ी हवा मिलती है और साँस लेना आसान लगता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर जितनी ऑक्सीजन है उसका 70% हिस्सा समुद्र के अंदर मौजूद छोटे-छोटे पौधे यानी फाइटोप्लैंक्टन से आता है और बाकी 30% जंगल और पेड़-पौधों से।
लेकिन जैसे ही सूरज डूब जाता है, वैसे ही प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक जाती है। रात को पौधों के पास सूरज की रोशनी नहीं होती, इसलिए वे खाना नहीं बना पाते। अब उन्हें भी इंसानों की तरह ज़िंदा रहने के लिए ऊर्जा चाहिए होती है। इसलिए रात में पौधे भी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इसे श्वसन यानी Respiration कहते हैं। मतलब दिन में पौधे ऑक्सीजन देने वाले बन जाते हैं और रात में ऑक्सीजन लेने वाले।
अब सवाल आता है कि क्या रात को पेड़ के नीचे सोना सच में खतरनाक है? इसका जवाब है – छोटे स्तर पर नहीं। एक-दो पौधे या गमले वाले पेड़ रात में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं वो बहुत कम होती है और हमारे कमरे की हवा से मिलकर बैलेंस हो जाती है। इसलिए घर के अंदर लगे तुलसी या मनीप्लांट से कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन घने जंगल में या बहुत बड़े बरगद-पीपल के पेड़ के नीचे रात भर सोने से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा थोड़ी बढ़ सकती है। पुराने समय में गाँव के लोग इसी वजह से रात को बड़े पेड़ों के नीचे सोने से मना करते थे, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।
आज के समय में प्रदूषण बहुत बढ़ गया है। गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ हवा को खराब कर रहा है। ऐसे में पेड़-पौधे हमारे लिए और भी ज़रूरी हो गए हैं। अगर हम हर घर के बाहर 2-4 पौधे लगा लें तो गर्मी भी कम लगेगी और हवा भी साफ रहेगी। NASA की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ इनडोर प्लांट जैसे एलोवेरा, स्नेक प्लांट और पीस लिली रात में भी थोड़ी बहुत ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इसलिए इन्हें बेडरूम में रखना फायदेमंद माना जाता है।
निष्कर्ष यही है कि पौधे हमारे सच्चे दोस्त हैं। दिन हो या रात, वे हमें जीवन देते हैं। बस हमें समझना होगा कि प्रकृति का हर नियम संतुलन पर टिका है। दिन में पौधे हमें ऑक्सीजन देते हैं और रात में थोड़ी सी लेते हैं। अगर हम पेड़ काटना बंद कर दें और ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं, तो धरती पर जीवन हमेशा हरा-भरा रहेगा। याद रखो, एक पेड़ लगाना मतलब आने वाली पीढ़ी को साँस देना।
इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि रात को पेड़ के नीचे मत बैठो, तो डरना मत। बस इतना समझो कि घने जंगल में रात गुजारना ठीक नहीं, पर घर के आँगन में लगे तुलसी के पौधे से प्यार करना हमेशा शुभ है। पौधे लगाओ, जीवन बचाओ