अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 6 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 6


अधूरी किताब – सीजन 2
एपिसोड 6 : असली अनन्या
अनन्या की साँसें तेज़ चल रही थीं।
उसके सामने खड़ी लड़की बिल्कुल उसी जैसी दिख रही थी।
वही चेहरा।
वही आँखें।
वही कद।
यहाँ तक कि उसके चेहरे पर मौजूद छोटा-सा तिल भी बिल्कुल उसी जगह था।
कुछ सेकंड तक अनन्या सिर्फ उसे देखती रही।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह सपना देख रही है या सचमुच यह सब हो रहा है।
फिर उसने हिम्मत जुटाकर पूछा—
"तुम कौन हो?"
लड़की मुस्कुराई।
"मैंने अभी बताया तो था।"
"मैं असली अनन्या हूँ।"
यह सुनकर अनन्या का सिर चकरा गया।
"नहीं... यह असंभव है।"
"असंभव?"
लड़की हँस पड़ी।
उसकी हँसी पूरे विशाल पुस्तकालय में गूँजने लगी।
"इस जगह पर असंभव जैसी कोई चीज़ नहीं होती।"
अनन्या ने चारों तरफ नज़र दौड़ाई।
जहाँ तक उसकी आँखें देख सकती थीं, वहाँ तक किताबें ही किताबें थीं।
ऊँची-ऊँची अलमारियाँ।
अनगिनत गलियारे।
और हर किताब के कवर पर एक ही नाम—
"अधूरी किताब"
उसका दिल घबराने लगा।
"यह जगह क्या है?"
लड़की धीरे-धीरे उसके करीब आई।
"यह कहानियों का संसार है।"
"यहाँ वे कहानियाँ रहती हैं जो कभी पूरी नहीं हुईं।"
"वे लोग रहते हैं जिनकी किस्मत अधूरी रह गई।"
"और वे आत्माएँ भी..."
उसने मुस्कुराकर कहा—
"जिन्हें दुनिया भूल चुकी है।"
अनन्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था।
उसने फिर पूछा—
"अगर तुम असली अनन्या हो..."
"तो मैं कौन हूँ?"
लड़की की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
उसने गंभीर स्वर में कहा—
"यही तो सवाल है।"
"जिसका जवाब तुम्हें ढूँढना है।"
अचानक पुस्तकालय की एक अलमारी अपने आप खुल गई।
धड़ाम!
उसके अंदर से एक किताब बाहर निकलकर हवा में तैरने लगी।
किताब धीरे-धीरे अनन्या के सामने आकर रुक गई।
उसके कवर पर लिखा था—
"अनन्या शर्मा"
अनन्या का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
"यह क्या है?"
"तुम्हारी कहानी।"
लड़की ने जवाब दिया।
"हर इंसान की एक किताब होती है।"
"उसका जन्म, उसका जीवन, उसकी मौत..."
"सब कुछ।"
"और यह तुम्हारी किताब है।"
अनन्या ने काँपते हाथों से किताब खोली।
पहले पन्ने पर उसका जन्म लिखा था।
दूसरे पर उसका बचपन।
तीसरे पर उसके स्कूल के दिन।
जो कुछ उसने जिया था...
सब कुछ शब्दशः लिखा हुआ था।
उसकी आँखें फैल गईं।
"यह कैसे संभव है?"
"क्योंकि यह तुम्हारी किस्मत की किताब है।"
अनन्या तेजी से पन्ने पलटने लगी।
फिर अचानक उसका हाथ रुक गया।
आगे के पन्ने खाली थे।
पूरी तरह खाली।
"यहाँ कुछ लिखा क्यों नहीं है?"
लड़की की आँखों में एक अजीब चमक उभरी।
"क्योंकि तुम्हारा भविष्य अभी तय नहीं हुआ।"
"और इसी वजह से लेखक तुम्हारे पीछे पड़ा है।"
"लेखक?"
अनन्या को तुरंत उस सफेद आँखों वाले आदमी की याद आ गई।
"वह आखिर है कौन?"
लड़की कुछ क्षण चुप रही।
फिर बोली—
"वह इस संसार का कैदी है।"
"लेकिन वह खुद को मालिक समझता है।"
"वर्षों पहले उसने अधूरी किताब पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी।"
"लेकिन किताब ने उसे स्वीकार नहीं किया।"
"तब से वह हर कहानी को अपने अनुसार बदलना चाहता है।"
अचानक पूरे पुस्तकालय में भूकंप जैसा कंपन होने लगा।
अलमारियाँ हिलने लगीं।
किताबें गिरने लगीं।
धड़ाम!
धड़ाम!
धड़ाम!
अनन्या डर गई।
"क्या हो रहा है?"
लड़की का चेहरा गंभीर हो गया।
"वह यहाँ पहुँच गया है।"
"कौन?"
"लेखक।"
अचानक पुस्तकालय के दूर वाले हिस्से में काला धुआँ फैलने लगा।
धीरे-धीरे।
तेज़ी से।
और फिर उस धुएँ के बीच दो सफेद आँखें चमकने लगीं।
अनन्या का दिल बैठ गया।
वह वही था।
सफेद आँखों वाला आदमी।
"मैंने तुम्हें ढूँढ लिया।"
उसकी आवाज पूरे पुस्तकालय में गूँज उठी।
हजारों किताबें काँपने लगीं।
अलमारियों पर दरारें पड़ने लगीं।
लड़की तुरंत अनन्या के सामने आकर खड़ी हो गई।
"तुम उसे नहीं ले जा सकते।"
आदमी हँस पड़ा।
"अब मुझे कोई नहीं रोक सकता।"
उसने अपना हाथ हवा में उठाया।
अचानक कई किताबें उड़कर उसकी तरफ जाने लगीं।
उनके पन्ने अपने आप फटने लगे।
शब्द हवा में बिखरने लगे।
मानो कहानियाँ मर रही हों।
अनन्या भय से सब देखती रही।
"यह क्या कर रहा है?"
"कहानियों को खत्म कर रहा है।"
लड़की ने कहा।
"जितनी कहानियाँ खत्म होंगी..."
"उतना ही शक्तिशाली वह बनता जाएगा।"
तभी अनन्या की नज़र एक अलमारी पर पड़ी।
वहाँ एक किताब चमक रही थी।
बाकी सभी किताबों से अलग।
उसका कवर सुनहरे रंग का था।
और उस पर लिखा था—
"आर्या"
अनन्या चौंक गई।
"आर्या की किताब!"
वह उसकी तरफ बढ़ी।
लेकिन लड़की ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं!"
"उसे मत छूना।"
"क्यों?"
लड़की के चेहरे पर डर उभर आया।
"क्योंकि उसमें वह सच है..."
"जिसे जानकर सब कुछ बदल जाएगा।"
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
अनन्या का हाथ किताब को छू चुका था।
जैसे ही उसने किताब खोली—
एक तेज़ रोशनी पूरे पुस्तकालय में फैल गई।
उसकी आँखों के सामने अजीब दृश्य उभरने लगे।
उसे दिखाई दिया—
एक छोटी लड़की।
लगभग दस साल की।
वह रो रही थी।
उसके सामने एक बूढ़ा साधु खड़ा था।
और उसके हाथ में वही अधूरी किताब थी।
फिर साधु ने कहा—
"आज से तुम्हारा नाम आर्या नहीं रहेगा।"
"आज से तुम..."
"अनन्या कहलाओगी।"
अनन्या का दिल जैसे रुक गया।
"क्या?"
दृश्य अचानक गायब हो गया।
किताब उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गई।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
"नहीं..."
"यह झूठ है..."
लेकिन उसके मन में डर पैदा हो चुका था।
अगर वह दृश्य सच था...
तो इसका मतलब था—
आर्या और अनन्या का संबंध सिर्फ किताब से नहीं था।
बल्कि उससे कहीं गहरा था।
उसी समय सफेद आँखों वाला आदमी ज़ोर से हँसा।
"अब तुम सच के करीब पहुँच रही हो।"
"और जब तुम्हें पूरा सच पता चल जाएगा..."
उसने मुस्कुराते हुए कहा—
"तब तुम्हारी दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी।"
अचानक पूरा पुस्तकालय टूटने लगा।
अलमारियाँ गिरने लगीं।
किताबें जलने लगीं।
और अनन्या के सामने सिर्फ एक सवाल बचा था—
क्या वह वास्तव में अनन्या है... या कभी वह खुद आर्या थी?
क्रमशः...
अगले एपिसोड 7 में आर्या और अनन्या के रिश्ते का सबसे बड़ा रहस्य खुलना शुरू होगा, और कहानी का मुख्य ट्विस्ट सामने आएगा।