💓हम फिर से मिले मगर इस तरह💓
🌹ऐपीसोड़ - 27🌹
वे दोनों उस ताज़ा गिरी हुई बर्फ पर पागलों की तरह दौड़ रहे थे। अरुण ने हँसते हुए बर्फ का एक गोला उसकी तरफ उछाला, और रुपाली की खिलखिलाहट उस शांत वादी में संगीत की तरह गूँज उठी। गिरते-संभलते जब वे एक-दूसरे की बाहों में आए, तो उनकी तेज़ होती धड़कनें एक ही लय में बज रही थीं। उनके पैरों के निशान बर्फ पर बन रहे थे, जैसे वे सफेद पन्ने पर अपनी मोहब्बत की नई कहानी लिख रहे हों।”
फिर रूपाली अरुण की बाहो से निकल खितखिलाती हुए फिर से पिछे दौड़ लगाती है और बर्फ के कई गोले अरुण की तरफ उछालती है, तभी अरुण देखता है कि जैसे ही रूपाली ने हवा में हाथ लहराया, उसका शरीर किनारों से धुंधला पड़ने लगा। देखते ही देखते वह गायब होने लगी और फिर अचानक से अपनी सामान्य अवस्था में वापस लौट आई। रूपाली इस बात से अनजान, अपनी ही मस्ती में मगन उस पर बर्फ के गोले उछाल रही थी!
अरुण हैरान-परेशान था, मगर इन दिनों उसने इतना कुछ देख लिया था कि अब उसे हैरान करने के लिए कुछ बचा न था। फिर आज का वह खूबसूरत, मगर दुखों और मुश्किलों से भरा दिन बीत गया और दोनों घर की ओर निकल पड़े। अरुण ने रूपाली को उसके गाँव के रास्ते तक छोड़ा, और आज उससे ज़्यादा कुछ न पूछते हुए बस 'बाय' कहा और अपने वुडन हाउस की ओर चल दिया।
वुडन हाउस पहुँचकर वह कितनी ही देर अपने दिमाग पर ज़ोर डालकर सब कुछ एनालाइज़ करने की कोशिश करता रहा, मगर हर बार वह उसी एक्सीडेंट तक ही पहुँच पाता—जिसके सपने मात्र से वह खौफ में आ जाता था। इस सब का नाता कहीं न कहीं इस जगह के अजीब होने से और रूपाली से जुड़ा हुआ था। वह एक्सीडेंट कब हुआ, कैसे हुआ, उसके बाद क्या हुआ... उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। उसे बस इतना याद था कि वह यहाँ क्यों आया था, और अब वह मकसद भी खत्म हो चुका था।
अब उसका सिर्फ एक ही मकसद था—रूपाली को उसकी ज़िंदगी की हर वह खुशी देना जिसकी वह हकदार थी। हालांकि, अभी जो उसके सामने था, वह कितना सच था और कितना फसाना, उसे नहीं पता था। उसने अपने दिल पर पत्थर रखा और खुद को कल के लिए तैयार किया। अब उसे रूपाली से उसकी हकीकत के बारे में हर कीमत पर जानना था, मगर वह उसे दुखी भी नहीं देखना चाहता था... फिर चाहे वह एक आत्मा ही क्यों न हो!
वह खौफनाक सपना और अतीत का सच रात का काफी समय हो चुका था और अरुण नींद के आगोश में था, तभी उसी भयानक सपने ने उसे फिर से अपनी चपेट में ले लिया.....
अरुण कार ड्राइव कर रहा था, गाड़ी में धीमा म्यूज़िक चल रहा था। मुंबई के शोर-शराबे से दूर, वह पहाड़ों और जंगलों से घिरे प्रकृति के खूबसूरत नज़ारों का लुत्फ़ उठाते हुए आगे बढ़ रहा था। तभी उसके दोस्त विक्रम का कॉल आता है। दोनों के बीच थोड़ी बहस होती है, पर वह विक्रम को किसी तरह समझाकर कॉल डिस्कनेक्ट कर देता है।
वह फिर से ड्राइविंग में मगन ही था कि अचानक उसे अपना नाम पुकारती हुई किसी की आवाज़ सुनाई दी। उसने गाड़ी का म्यूज़िक सिस्टम बंद किया, तो आवाज़ और साफ़ हुई। जब उसने साइड मिरर में देखा, तो दंग रह गया—एक लाल रंग की स्कूटी पर कोई लड़की उसकी गाड़ी का पीछा कर रही थी। ध्यान से देखने पर पता चला कि वह कोई और नहीं, बल्कि रूपाली थी, जो चिल्ला-चिल्लाकर कुछ कह रही थी!
रूपाली को इस तरह अपना पीछा करते देख वह घबरा गया। उसने गाड़ी रोकने के लिए ब्रेक दबाया, मगर... ब्रेक फेल हो चुके थे! गाड़ी अपनी रफ्तार में आगे भागी जा रही थी। अरुण असमंजस में पड़ गया, उसे अपना अंत साफ़ नज़र आ रहा था।
उधर रूपाली को लगा कि अरुण उसकी आवाज़ नहीं सुन पा रहा है, तो उसने एक शॉर्टकट लिया जो नीचे की ओर जाता था और सीधे हाईवे के उस पार मिलता था जहाँ से अरुण की गाड़ी आने वाली थी। उसने अपनी स्कूटी उस रास्ते पर मोड़ दी। जब वह हाईवे पर पहुँची, तो उसे ऊपर से अरुण की गाड़ी तेज़ रफ्तार में आती दिखी। वह हाथ हिलाकर उसे गाड़ी रोकने का इशारा करने लगी।
अरुण ने जब रूपाली को दोबारा अपने सामने देखा, तो उसके होश उड़ गए। रूपाली की स्कूटी उसकी कार के बेहद करीब आ चुकी थी। कार के ब्रेक काम नहीं कर रहे थे और रूपाली भी उसी की तरफ बढ़े आ रही थी। उसे डर था कि कहीं उसकी कार रूपाली को कुचल न दे! अपनी तरफ से गाड़ी को बचाने के लिए उसने पूरी ताकत से स्टेयरिंग घुमा दिया ताकि कार सामने के पेड़ से टकरा जाए। इस चक्कर में गाड़ी बीच सड़क पर बुरी तरह घिसटने लगी।
सामने से आती रूपाली यह देखकर घबरा गई, डर के मारे उसका हाथ ब्रेक पर नहीं गया और वह अरुण की कार से टकराकर सीधे नीचे गहरी खाई की तरफ गिर गई!
इधर अरुण की गाड़ी पहले स्कूटी से टकराई और फिर पेड़ में जा घुसी, जिससे वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। गाड़ी से धीरे-धीरे धुआँ और आग की लपटें उठने लगीं।
सन्नाटा और बेबसी टक्कर के बाद जब अरुण की आँखें खुलीं, तो उसे पहले दर्द नहीं, बल्कि एक अजीब सा सन्नाटा महसूस हुआ। कानों में एक तीखी सी सीटी बज रही थी। धुएँ और जलते हुए लोहे की गंध के बीच उसे बस एक ही चेहरा याद आया—रूपाली! उसने फटी आँखों से सामने देखा, तो उसका दिल धड़कना भूल गया।
अरुण बुरी तरह घायल था, उसका पूरा शरीर खून से लथपथ था। मगर उसे अपनी परवाह नहीं थी, उसका ध्यान सिर्फ रूपाली पर था। तभी उसे रूपाली की हल्की सी कराह सुनाई दी। उसने गाड़ी के टूटे हुए शीशे से बाहर झांका, तो देखा कि रूपाली पहाड़ी के किनारे धँसे एक पत्थर को पकड़े लटकी हुई थी! वह डर और घबराहट से काँप उठा। वह कभी भी खाई में गिर सकती थी।
अपने टूटे और घायल पैरों की परवाह न करते हुए, वह पूरी ताकत लगाकर गाड़ी से बाहर निकला। वह सही से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, फिर भी हिम्मत न हारते हुए घिसटते-घिसटते रूपाली की ओर बढ़ने लगा।
रूपाली डर के मारे रोए जा रही थी। उसके हाथ उस नुकीले पत्थर को थामे हुए थे, और गला एक दूसरे पत्थर से दबा हुआ था। मगर जैसे ही उसने लहूलुहान अरुण को अपनी तरफ आते देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सा सुकून तैर गया—वह अरुण को ज़िंदा देख खुश थी, भले ही खुद मौत के मुहाने पर खड़ी थी। आख़िर में दोनों की आँखें मिलीं... और दर्द व थकान के मारे रूपाली की पकड़ ढीली पड़ गई।
अरुण चिल्लाते हुए आगे बढ़ा, मगर उसके पहुँचने से पहले ही रूपाली का हाथ पत्थर से छूट गया और वह उस गहरी, खौफनाक खाई में गिर गई। अरुण के हलक से एक चीख निकली—"रूपाली!"
तभी एक झटके से अरुण की नींद टूट गई। उसका शरीर पसीने से तर-बतर था, सिर दर्द से फटा जा रहा था और सांसें उखड़ी हुई थीं। वह इस खौफ से उबर भी नहीं पाया था कि अचानक उसकी आँखों के सामने अस्पताल का वह फ्लैशबैक तैर गया…
अस्पताल में उसे स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था। उसकी अर्धचेतन आँखें किसी को ढूँढ रही थीं। तभी कुछ लोग रूपाली को भी स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल के अंदर आते हैं। उसे देखकर अरुण ने थोड़ी राहत की सांस ली।
फिर अरुण को ऑपरेशन थिएटर (OT) में ले जाया गया, जहाँ वह ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। उसके ठीक बगल वाले बेड पर रूपाली का भी इलाज चल रहा था।
डॉक्टर 1: "डॉक्टर, इस लड़के को बहुत गंभीर चोटें आई हैं, अंदरूनी ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा हो चुकी है। इसका बचना मुश्किल है।"
डॉक्टर 2: "डॉक्टर, इस लड़की की हालत भी बहुत नाज़ुक है। सिर पर गहरी चोट है, खून बहना बंद नहीं हो रहा और पल्स लगातार गिर रही है। जल्दी बताइए, क्या करें?"
अरुण बेहोशी की हालत में भी यह सब सुन रहा था। और तभी उसे वो शब्द सुनाई दिए जिसने उसकी दुनिया उजाड़ दी…
डॉक्टर 1: "डॉक्टर! इस लड़की की सांसें रुक गई हैं... हार्टबीट भी बंद हो चुकी है... ओ माई गॉड, वी लॉस्ट हर (हमने इसे खो दिया)!"
यह सुनते ही जैसे अरुण की अपनी सांसें उखड़ने लगीं, उसकी भी हार्टबीट बंद होने लगी। डॉक्टरों ने घबराकर उसे इलेक्ट्रिक शॉक (Defibrillator) देना शुरू किया... और तभी अरुण झटके से उस फ्लैशबैक से बाहर आ गया!
इस बार उसकी आँखों से आँसू थम नहीं रहे थे। वह एक गहरे सदमे और अंधकार में डूब चुका था। वह पत्थर की मूरत बना उस सपने और फ्लैशबैक के बारे में सोच रहा था, जिसने उसे अंदर से बुरी तरह तोड़ दिया था। वह काफी देर तक इसी आत्मग्लानि और दुख में डूबा रहा, क्योंकि वह खुद को ही इस सब का गुनहगार मान रहा था!
तो क्या सच में... रूपाली अब इस दुनिया में नहीं है?
कहानी जारी है.......✍️