जहाँ पर इन्हे एक नहीं बल्कि दो जिन्न दिखाई देते है। एक पुरुष जिन्न ओर एक स्त्री जिन्न… जो बहुत भयानक दिखाई दे रहे थे. उनके बडे- बडे सींग थे, और लम्बाई मे काफी बडे, जोकि तांत्रिक विद्या कर रहे थे, ओर उस तंत्र के पास मे उन्हें लिली भी पडी हुई दिखाई दे रही थी. जोकि बेहोश लग रही थी. तांत्रिक स्थान के चारो ओर जादुई शक्तियों से एक चक्कर बना हुआ था.
तभी पुरुष जिन्न भयानक आवाज मे लिली की तरफ इशारा करते हुए कहता है एक बलि तो ये रही अब हमे सिर्फ कुछ ओर की जररूरत है. ये सुनकर स्त्री जिन्न बोलती है, पहले हम इसकी बलि दे देते है. फिर गाँव मे जाकर बची हुई बलियो के लिए भी बच्चों को अपने जादू से उठा कर ले आएंगे…
ये सब देखकर मानो उन तीनो के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी हो, पुरुष जिन्न ओर स्त्री जिन्न दोनों ने बलि की प्रकिर्या करनी शुरू कर देते है. पुरुष जिन्न स्त्री जिन्न से बोला, जाओ उस लडकी को बली के लिए उठा कर लेके आओ. ये सब होता हुआ तीनो दूर से चुप चाप देख रहे थे.
स्त्री जिन्न लिली को पुरुष जिन्न के पास लेकर चली जाती है. पुरुष जिन्न बलि देने वाला होता ही है, कि तभी राघव ने ऊँची में दहाड़ते हुए कहा, हमारी दोस्त को छोड दो वरना तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। राघव के ऐसा बोलने पर पुरुष जिन्न ओर स्त्री जिन्न का ध्यान राघव ओर उसके दोस्तों पर चला जाता है।
राघव ओर उसके दोस्तो को देखकर पुरुष जिन्न ओर स्त्री जिन्न दोनों जोर- जोर से हसने लग जाते है। पुरुष जिन्न बोलता है, तुम सभी ने तो हमारा काम ओर भी आसान कर दिया।
स्त्री जिन्न खुशी के साथ बोलती है, हाँ अब हमे बलि के लिए कही जाने की जरुरत नहीं है, बली खुद चलकर हमारे पास आयी है। तभी राघव ने कहा, बहुत हो गया तुम दोनों का हमें हमारी दोस्त दे दो…
हम यहाँ से चले जाएंगे। सौरव और मधु डरे हुए चुप चाप खडे थे। तभी पुरुष जिन्न ने आगे कहा, अब तुम तीनो भी इसके साथ ही मरोगे… कोई भी जिन्दा नहीं बचेगा! ये बोलकर दोनों वापिस से हसने लगते है। राघव को तभी एक तरकीब याद आती है।
वह सौरव और मधु से बोलता है, मैं किसी तरह इन दोनों का ध्यान भटकाता हूँ। तुम दोनों लिली को यहाँ से बाहर ले जाना। तभी राघव उसके पास मे पडे कंकालो की खोपडी उठाकर पुरुष जिन्न और स्त्री जिन्न को मारता है. राघव के ऐसा करने से पुरुष जिन्न और स्त्री जिन्न आग बबूला हूँ उठते है।
और राघव की ओर बढने लग जाते है, तभी मधु और सौरव चुप-चाप से लिली को उठाते है, और उस खुफिया कमरे से बाहर निकल आते है। राघव भी उन दोनों जिन्न को अपने पास आता देख जल्दी से तांत्रिक भभूत उठाता है और उन दोनों की आँखों मे मारकर उस खुफिया कमरे से बाहर आ जाता है।
तब तक लिली को भी होश आ जाता है। तभी राघव भी आ जाता है और अपने दोस्तों से बोलता है, जल्दी चलो हमें इस हवेली से जल्द से जल्द बाहर निकलना है। सौरव डरी हुई आवाज मे बोलता है, हाँ चलो….
राघव और उसके दोस्त जा ही रहे होते है, कि तभी वहा पर वे दोनों जिन्न भी पहुंच जाते है। और तभी पुरुष जिन्न एक मंत्र बोलता है, और अपने जादू से उन्हें हवेली से बाहर जाने से रोक देता है।
स्त्री जिन्न ने कहा, तुम सभी बच्चों ने हमारा काफी समय खराब कर दिया है। अब तुम सबको मरना होगा…. ये बोलकर वे दोनों जिन्न राघव और उसके दोस्तों को अपने जादू से हवा मे उडा देते है. और उनको हवेली मे इधर उधर पटकने लग जाते है।
ऐसा करते हुए वे दोनों जिन्न जोर-जोर से हस रहे थे। उनके बार-बार पटकने के कारण राघव और उसके दोस्तों को काफी चोट लग जाती है। जिसके कारण राघव के दोस्त बेहोश हो जाते है। तभी राघव उन्हें उठाते हुए कहता है, सौरव, मधु, लिली उठो, उठो…
राघव को भी काफी चोट लगी हुई थी. उसके माथे पर से खून निकल रहा था।
तभी पुरुष जिन्न ने खौफ भरी आवाज़ में कहा, अब बलि देने का समय हो गया है। राघव जिसके माथे पर से खून निकल रहा होता है उसको अपने चारो तरफ धुंदला-सा दिखने लगता है. और जोकि अपने दोस्तों को बोल रहा होता है उठो सौरव, उठो लिली उठो!
तभी पुरुष जिन्न स्त्री जिन्न से बोलता है, चलो इन्हे बलि के लिए लेकर चलो! राघव का ज्यादा खून निकल जाने के कारण उसे भी चक्कर आने लगता है।
राघव अपना खून रोकने के लिए पॉकेट से रुमाल निकालता है कि तभी हनुमान जी का लॉकेट रुमाल में से झटक कर गिर पडता है. स्त्री जिन्न जो कि बलि के लिए उसके दोस्तों को लेने जा रही थी। वह और पुरुष जिन्न दोनों ही उस लॉकेट को देखकर डर जाते हैं।
तभी राघव उस लॉकेट को उठाता है। और मन ही मन बोलता है, यह लॉकेट तो मैंने मधु को दिया था? यह मेरे रुमाल मे कैसे? राघव यह सोच ही रहा था कि तभी उस लॉकेट से अचानक एक दिव्य तेज निकलता है और स्त्री जिन्न और पुरुष जिन्न दूर जाकर गिरते है। तभी राघव उस लॉकेट को गले में पहन लेता है और खून रोकने के लिए रुमाल को अपने माथे पर बांध लेता है।
तभी पुरुष जिन्न सहमी हुई आवाज में बोलता है, हमसे दूर रहना नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा... तभी पुरुष जिन्न ने एक मंत्र पढकर अपनी शक्ति से राघव पर प्रहार कर दिया. वह शक्ति राघव तक पहुंचने वाली होती ही थी कि तभी फिर लॉकेट से एक दिव्य तेज निकलता है और जिन्न की शक्ति को नष्ट कर देता है.
ये सब देखकर पुरुष जिन्न जोर से चिल्लाते हुए बोलता है, तू यहाँ से जिंदा बचकर नहीं जा सकता…
यह बोलकर पुरुष जिन्न और स्त्री जिन्न दोनों मंत्र पढने लगते हैं, ओम ह्रीं कृम जिन्नात ए बादशाह शक्ति समावेश: और पहले से भी ज्यादा शक्ति के साथ दोनों राघव पर प्रहार कर देते हैं।