मैनेजर पुलिस वालों के आगे-आगे लपककर अयान के इतने करीब आ खड़ा हुआ कि दोनों के बीच की हवा भी भारी हो गई।
मैनेजर का चेहरा पसीने से तर था, उसकी पुतलियाँ कभी पुलिस वालों के जूतों पर टिकतीं तो कभी अयान के चेहरे पर, जैसे वो किसी अनहोनी के डर से रास्ता ढूंढ रहा हो।
उसने गर्दन झुकाकर अपना चेहरा अयान के कान के पास ले आया और बोला" अयान... ये सब क्या हो रहा है भाई? ये लोग तुझे ही ढूंढते हुए आए हैं। तूने ऐसा क्या कर दिया है कि ये खाकी वर्दी वाले सीधे यहाँ तक पहुँच गए?"
मैनेजर के हलक से जो शब्द निकल रहे थे, वह बस एक ऐसा खौफ था, जो अयान के कानों में पड़ते ही उसके खून को सर्द कर गया और उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे।
अयान के सूखे होंठ कुछ कहने के लिए बस खुले ही थे कि, तभी सिपाही का मजबूत पंजा झपट्टा मारकर उसकी कॉलर पर जा टिका। अयान की गर्दन पीछे की तरफ झुकी और गले की नसें उभर आईं।
तभी... 'कच-कच'।
अयान की कलाई पर ठंडी और फौलादी कड़ियाँ जकड़ गईं। उसने झटके से अपनी कलाइयों को अलग करना चाह, पर दोनों हाथ एक-दूसरे में इस कदर उलझ चुके थे कि वह चाहकर भी उन्हें हिला नहीं पा रहा था।
वह बार-बार अपनी कलाई को झटक रहा था, पर लोहे की वो मज़बूत कड़ी, हर झटके के साथ उसकी खाल में और गहराई से धंसती जा रही थी। मैनेजर की आँखें अयान के उन बेबस हाथों पर जम गई थीं, जो अब सिर्फ़ फड़फड़ा रहे थे।
पास की मेज पर बैठी एक जवान लड़की ने नफरत से अपना मुंह फेर लिया और अपने साथ बैठे लड़के के कान में फुसफुसाई, "छी...
शकल से कितना मासूम लगता था न? पक्का कोई लड़कियों वाला केस होगा, या फिर किसी का मर्डर करके भाग रहा है। ऐसे लोगों को तो बीच सड़क पर ही सजा मिलनी चाहिए।"
पुलिस वाले की मुट्ठी उसकी कॉलर पर और कसी, और उसे अपनी सांसों की घरघराहट के बीच, उस लड़की के वो ज़हरीले शब्द साफ़ सुनाई देने लगे।
पास ही बैठा एक आदमी, अपनी थाली धकेल कर पीछे हुआ, "पुलिस सीधे हथकड़ी डाल रही है, मतलब मामला बहुत संगीन है। जरूर ये वही डाकू है जिसके बारे में कल खबर आई थी।"
अयान अपने उन बेजान हाथों को देख रहा था, जो अब एक-दूसरे के कैदी बन चुके थे। वह उन्हें ऊपर उठाना चाहता था, पर कंधों में ऐसी अकड़न उतरी कि हाथ वहीं लटके रह गए।
उसने अपनी जकड़ी हुई कलाइयां पुलिस वाले के सामने कर दीं, "साहब, मेरा जुल्म क्या है? मैंने किया क्या है?" उसकी आवाज़ में कोई डर नहीं था, बस एक तीखा सवाल था।
पुलिस वाले ने अयान की कॉलर को और जोर से भींचा और नफरत से उसके चेहरे की तरफ देखकर बोला, "जुल्म कोर्ट में गिन लेना। फिलहाल तेरे खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ है और तुझे हमारे साथ चलना होगा।”
तभी बगल में आकर खड़ा हुआ नितिन काँपती आवाज़ में बोल पड़ा। वह काम छोड़कर भागा-भागा अयान के पास आया था, उसके हाथों में अभी भी साबुन का सफेद झाग लगा था जो फर्श पर टपक रहा था।
"सा... साहब, अयान तो सुबह से मेरे साथ यहीं ड्यूटी पर है। इसने कुछ नहीं किया साहब!"
पुलिस वाले ने तिरछी नज़रों से, नितिन के उन झाग भरे हाथों को देखा। फिर उसके चेहरे पर, अपनी खूनी नज़रें गड़ा दीं, "ज़्यादा वकालत मत कर, वरना तू भी अंदर जाएगा!"
सिपाही की दहाड़ सुनकर, नितिन की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसके कदम वहीं जम गए। वह बेबसी से, अयान को ले जाते हुए देखता रहा।
अयान ने नितिन की तरफ एक आख़िरी नज़र डाली, जैसे उसे वहीं रुकने का इशारा कर रहा हो।
बाहर खड़ी वैन का दरवाज़ा एक सिपाही ने झटके से खींचा। दूसरे सिपाही ने अयान को बाजू से पकड़ा और पिछली सीट की तरफ धकेलते हुए भीतर बैठा दिया।
अयान का कंधा वैन की ठंडी लोहे की जाली से जा टकराया। अभी वह संभल भी न पाया था कि 'धप्प' की आवाज़ के साथ दरवाज़ा बंद। वैन धूल उड़ाती हुई पुलिस स्टेशन की ओर दौड़ पड़ी।
नितिन ने पलट कर मैनेजर की तरफ देखा और तेज़ी से बोला, "सर, मैं अयान के चाचा के पास जा रहा हूँ उन्हें सब बताने... पुलिस वाले उसे ज़बरदस्ती ले गए हैं!
इतना बोलते ही नितिन बिना रुके होटल से बाहर निकल गया। उसके कदम अब सीधे करीम चाचा की तरफ दौड़ रहे थे। अयान ने वैन के भीतर बैठे सिपाहियों के चेहरों को गौर से देखा, वे बाहर की तरफ देख रहे थे। उसने बड़ी होशियारी से अपनी जेब से मोबाइल निकाला और हाथ की ओट में छुपाते हुए तेज़ी से टाइप किया—
"दिया, तुम तुरंत पास वाली पुलिस चौकी पर आ जाओ।"
मैसेज लिखकर उसने मोबाइल वापस जेब में सरका लिया और लोहे की जाली से सर टिका कर बाहर देखने लगा। वैन पुलिस स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी।
वैन के भीतर बैठे एक बड़े अफसर ने अयान की तरफ देखा, और एक ठंडी मुस्कुराहट के साथ बोला, "आर्यन रॉय के पिता, विवेक रॉय का नाम सुना है? उनके खिलाफ जाने का मतलब है अपनी कब्र खुद खोदना।
तुझे अंदाज़ा भी नहीं है कि तूने किस आग में हाथ डाला है। अब उनके गुस्से का नंगा नाच शुरू होगा और उस मौत के तांडव में तेरा वजूद तक मिट जाएगा।"
बड़े अफसर की बातें सुनकर अयान के चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कुराहट फैल गई। उसने अफसर की आँखों में आँखें डालकर बड़े बेपरवाह अंदाज़ में कहा, "अच्छा! तो 'चाचा' ने भेजा है? तो ठीक है... वर्दी सँभाल के रखना साहब, हिसाब अब बड़ा होगा।"
( लेखक की कलम से...)
"हथकड़ियों की आवाज़ और समाज की नफरत ने अयान को कमज़ोर नहीं, बल्कि एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ से वापसी का रास्ता सिर्फ तबाही की तरफ जाता है।
अभी तो सिर्फ खाकी ने अपना पंजा कसा है, लेकिन जब विवेक राय की 'नफरत की आग' अपना असली रंग दिखाएगी, तब क्या अयान अपनी उस कातिलाना मुस्कुराहट को बरकरार रख पाएगा?
कहानी अभी शुरू हुई है... क्योंकि जहाँ दुनिया को लग रहा है कि अयान का अंत हो गया, असल में वहीं से एक खौफनाक शुरुआत होने वाली है।
क्या करीम चाचा की खामोशी और दिया का वो रहस्य अयान को इस दलदल से निकाल पाएगा? या फिर विवेक राय का वो 'नंगा नाच' सब कुछ राख कर देगा?
साँसें थाम कर रखिए, क्योंकि 'हिसाब' अब शुरू होने वाला है।" जिन लोगों ने अब तक फॉलो नहीं किए ही वो फॉलो कर लो दोस्त क्योंकि सस्पेंस अभी बाकी है। बने रहिए नफरत की आग पार्ट 31 में।