राघव बोलता है, चलो एक बार जाकर देख लिया जाए क्या है, उस हवेली में? सौरव कहता है, हां सही है चलो चलते है लिली मधु को बोलती है तुम्हें जाना हो तो तुम जाओ घर हम हवेली पर जाकर देख कर ही आएंगे कितनी सच है कितनी झूठ. मधु भी अपने दोस्तों के साथ हवेली के लिए चल पडती है, ये सोच कर की दोस्तों के साथ ही घूमने आयी थी अगर अकेले घर गयी तो अच्छा नहीं लगेगा और दादा-दादी भी राघव के बारे मे पूछेंगे. चारों दोस्त हवेली जाने के लिए निकल पडे रास्ता सुनसान था।
कोई व्यक्ति भी उस रास्ते के दूर- दूर तक नजर नहीं आ रहा था, चारों दोस्त हवेली के दरवाजे पर पहुंचे वहां उन्होंने देखा बडा-सा दरवाजा है।
और जिस पर कंकाल के चित्र से बने हुए हैं। पूरी हवेली खंडर के समान थी. चारों दोस्त दरवाजा खोलने की कोशिश करते हैं पर वह चारों से मिलकर भी नहीं खुल रहा था। फिर अचानक से एक आवाज आई, कौन है जिसने मेरे तंत्र को भंग करने की कोशिश की…
हवेली का दरवाजा अचानक से खुल गया मधु ने कहा, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा। हमें घर चलना चाहिए लिली उसका मजाक उडाते हुए बोलती है मैंने बोला थ ना… यह डरपोक है,
चलो अंदर जाकर देखते हैं। अंदर बढते ही हवेली का दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है, तभी मधु दरवाजे को खोलने की कोशिश करती है पर वह खुल नहीं रहा था। मधु डरते हुए कहती है, मैंने बोला था ना यहाँ नहीं आना पर तुम सब मेरी बात नहीं मान रहे थे। तभी सौरव बोलता है, चलो हवेली के अंदर जाकर देखते है कुछ कमरे दिखाई दे रहे है.
सभी दोस्त कमरों के अंदर जाकर देखने लगे… कमरे जालो और अजीब से तस्वीरों से भरे हुए थे कही कही हड्डियों के ढांचे और कंकाल दिखाई दे रहे थे ऐसे कमरे देखते- देखते ही लिली अंतिम कमरे में पहुंच जाती है उस कमरे मे एक अजीब-सी ख़ामोशी थी।
वह देख ही रही थी तभी वह एक शीशे को देखती हैं, और तभी उसकी चीख निकल जाती है बचाओ बचाओ लिली की चीख सुनकर सभी दोस्त उसके पास पहुंच गए और देखा की शीशे पर खून से कुछ लिखा हुआ था। मधु डरी हुई आवाज में पढ़ती है, तुम सभी मारे जाओगे कोई भी जिंदा नहीं बचेगा!
तभी राघव बोला, ये जरूर किसी की शरारत है। मुझे तो लगता है, ये जरूर किसी बच्चे की या उन बुजुर्गो का फैलाया हुआ एक ओर झूठ है. सौरव बोलता है, सही बोल रहा है राघव भाई, पहले तो पता नहीं वे किस जिन्न ओर अमावस्या की अजीब-सी बात कर रहे थे ओर अब ये खून से लिखा हुआ….
तभी लिली बोलती है, क्या पता यहाँ कुछ छुपा कर रख रखा हो. मधु कहती है, अगर वह सच बोल रहे हो…
तभी अचानक पूरी हवेली मे अंधेरा हो जाता है। तभी किसी के हसने की हसीं सुनाई पडती है, ये हसीं बहुत डरावनी सुनाई दे रही थी। अंधेरा इतना था कि अपने साथ खडे हुऐ दोस्त भी उन्हें साफ दिखाई नहीं दे रहे थे। तभी सौरव बोला किसी के पास लाइटर या माचिस है क्या? राघव ने कहा, हाँ शायद… मेरे पास है। राघव अपनी पॉकेट से लाइटर निकालता है।
उस लाइटर की मदद से वह किसी लकडी को ढूंढते है, पर वहा पर सिर्फ हड्डिया थी. तभी लिली कही से एक छोटा सा कपडे का टुकडा लेकर आती है। राघव उसको एक हड्डी पर लपेटकर आग लगा लेता है। तभी फिर से किसी के हसने की आवाज सुनाई पडती है…
तुम सभी ने तो मेरा काम ओर आसान कर दिया. राघव ओर उसके दोस्त डरते हुए कहते है, कौन….कौन है? ऐसा बोलते ही फिर वह डरावानी आवाज सुनाई पडती है" तुम सब की मौत" तभी अचानक हवेली के अंदर तेज हवाए चलने लगती है।
चारों दोस्त डर के कारण हवेली में इधर- उधर भागने लगते हैं। तभी राघव कहता है, वहां पर एक खिडकी है, जिसकी मदद से हम इस हवेली से बाहर निकल सकते हैं। राघव, सौरव और मधु तो खिडकी से इस हवेली से बाहर निकल जाते हैं पर, लिली अंदर ही फंसकर रह जाती है।
हवेली से कुछ दूर जाने के बाद सौरव कहता है, लिली कहां है? इस पर मधु बोलती है, मुझे लगा कि वह सबसे पहले निकल गई होंगी. यह सब सुनकर राघव ने कहा, कहीं वह हवेली के अंदर ही तो नहीं रह गई है। लिली हवेली के अंदर अकेली थी और डरी हुई आवाज में बोलती है, राघव सौरव तुम कहां हो? उसे पता नहीं था कि वह हवेली से बाहर निकल गए हैं।
राघव ने कहा, हमें लिली को लाने के लिए वापस उस हवेली में जाना होगा। यह सुनकर मधु बोलती है, वापस उस सापित हवेली में जाना होगा, तुम्हें पता भी है तुम क्या बोल रहे हो? इस पर सौरव बोलता है, राघव सही बोल रहा है, हमें लिली को लाने के लिए हवेली मे जाना ही होगा।
राघव सौरव और मधु तीनों डरते-डरते वापस उस हवेली के अंदर चले जाते हैं। और लिली को ढूंढने लग जाते है लिली.. लिली कहां हो तुम? लेकिन काफी देर तक खोजने के बाद भी लिली उन्हें नहीं मिलती। तभी उन्हें मंत्रो की आवाज सुनाई पडती है. मधु कहती है, ये तांत्रिक मंत्रो की आवाज कहां से आ रही है?
तीनों मिलकर इस आवाज का पीछा करने लगते है। वे तीनों मिलकर हवेली के हर कमरे में जाकर देखते हैं पर कोई नहीं मिलता सिर्फ आवाज सुनाई दे रही थी।
तभी सौरव, राघव को ढूंढते हुए हवेली में बनी सीढ़ियों से नीचे जाता है ओर बोलता है, राघव… राघव कहां हो तुम? तभी सौरव का पैर किसी से टकरा जाता है।
और एक दर्दनाक चीख के साथ वह नीचे गिर जाता है। सौरव की चीख सुनकर राघव और मधु भी उसके पास पहुंच जाते हैं। तभी राघव बोलता है, क्या हुआ तुम चीखे क्यों? सब ठीक है ना!
सौरव कहता है, हां मैं ठीक हूं पता नहीं मेरा पैर किससे टकरा गया और मैं एकदम से नीचे गिर गया. यह सुनकर मधु बोलती है, यहां तो कुछ है भी नहीं जिससे तुम टकरार कर गिर जाओ. वहां पर एक लाल कालीन बिछी हुई थी।
राघव मधु को चुप करते हुए बोलता है, रुको… यहां पर मंत्रो की आवाज ज्यादा सुनाई दे रही है। राघव उस कालीन को हटाता है, तो वहां पर एक दरवाजा होता है वे उस दरवाजे को खोलकर हवेली के नीचे बने हुए खुफिया कमरे में चले जाते हैं वह कमरा अंदर से बहुत डरावना था।
वे डरते हुए मंत्रो की आवाज का पीछा करने लगे…. सौरव, राघव से डरते हुए कहता है रात भी काफी हो गयी है, दादा-दादी हमारी आने की राह देख रहे होंगे… इस पर राघव बोलता है, हाँ तुम सही बोल रहे हो…चलो जल्दी से लिली को ढूंढते है, और घर चलते है. मधु ने कहा, हाँ चलो. ये बोलकर तीनो दोस्त आगे बढ जाते है।