रिया के मिलने के बाद जैसे आईशा की दुनिया पूरी हो गई थी। उसके लौटने से परिवार में जैसे जान आ गई थी।
अब बारिश सिर्फ़ मोहब्बत और मिलन की ही निशानी नहीं थी…
बल्कि कुदरत के के करिश्मे की भी थी।
शादी को एक साल पूरा होने वाला था।
उसी दौरान एक और खुशखबरी सामने आई —
आईशा माँ बनने वाली थी। पुरे घर में रौनक और खुशी का माहौल छाया हुआ था।
रिया तो जैसे हर पल उसके साथ रहने लगी ।
आरिफ़ की आँखों में भी एक नई जिम्मेदारी की चमक आ चुकी थी।
“देखा? मैंने कहा था ना… हमारी हर अच्छी खबर बारिश से ही शुरू होती है,” आरिफ़ ने मुस्कुराकर कहा....
लेकिन किस्मत हर बार आसान रास्ता नहीं चुनती। सातवें महीने की एक रात, तेज़ बारिश हो रही थी। और तभी अचानक आईशा की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल की सफेद दीवारों के बीच डर का माहौल घिर चुका था ।
डॉक्टर ने आरिफ़ को अलग ले जाकर कहा —
“स्थिति थोड़ी नाज़ुक है… हमें माँ और बच्चे दोनों का ध्यान रखना होगा।” आप समझ रहे हो न..? बाकी भगवान मालिक है....!
आरिफ़ की दुनिया जैसे रुक सी गई। उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकने लगी थी और दिल जोर जोर से धड़कने लगा...!
वो पहली बार खुद को इतना असहाय महसूस कर रहा था।
रिया ने उसका हाथ पकड़ा, और कहा--- सब ठीक हो जाएगा ।
“डरो मत… दीदी बहुत मजबूत हैं।”
ऑपरेशन थिएटर के बाहर बारिश की आवाज़ अब भी आ रही थी —
जैसे आसमान भी उनके लिए दुआ कर रहा हो।
घंटों इंतज़ार करने के बाद डॉक्टर बाहर आए।
उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
आरिफ़ और रिया दौड़ कर डाक्टर के करीब गए...! वह दोनों बड़ी उम्मीद की नजर से डाक्टर की ओर देख रहे थे।
“माँ और बच्चा दोनों ही सुरक्षित हैं।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा ----
आरिफ़ की आँखों से खुशी की आँसू बहने लगें...
"क्या मैं अंदर जा सकता हूं ...,? अपनी पत्नी से मिल सकता हूं....?"
आप अपनी पत्नी और बच्चे दोनों से ही मिल सकते हैं लेकिन थोड़ी सावधानी रखना।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा...
"थैंक्यू डाक्टर...!" रिया हाथ जोड़ कर कहने लगी ।
वो दौड़कर अंदर गया। रिया के दिल ने भी जैसे चैन की सांस ली
आईशा थकी हुई थी, लेकिन मुस्कुरा रही थी।
उसकी बाँहों में अब एक नन्ही सी जान ने अपना कब्जा जमा लिया था।
“देखो… हमारी बारिश की पहली बूंद,” उसने धीरे से कहा...।
"बच्ची की आँखें बिल्कुल तुम्हारी जैसी है...!"
आरिफ़ ने उसके माथे को चूमा और कहा ,
“हम इसका नाम ‘बारिश’ रखेंगे,” उसने हँसते हुए कहा !
आईशा मुस्कुराते हुए बोली....
“नहीं… इसका नाम होगा ‘आशा’… क्योंकि हर तूफान के बाद उम्मीद ही तो बचती है।”
रिया भी खुशी से फूले नहीं समा रही थी । "तुम दोनों ही इस से बातें करते रहोगे या मौसी को भी बात करने का मौका मिलेगा..." रिया खुशी से झूमते हुए कहा...
उसकी बातों को सुनकर आईशा और आरिफ़ भी हंसने लगे !
बाहर बारिश धीरे-धीरे थम रही थी।
आसमान साफ़ होने लगा था।
कभी शक, कभी जुदाई, कभी डर…
हर मोड़ पर बारिश उनकी कहानी के साथ रही।
लेकिन इस बार,
बारिश ने उन्हें सिखाया था —
प्यार सिर्फ़ पहली मुलाक़ात की धड़कन नहीं,
बल्कि हर मुश्किल में साथ खड़े रहने का नाम है।
और उस दिन,
अस्पताल की खिड़की से गिरती आख़िरी बूंद ने
उनकी कहानी पर मुहर लगा दी —
अब ये सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं रही,
ये एक परिवार की दास्तान बन चुकी थी। ☔🤍
अब आने वाले समय में बारिश इनकी जिंदगी में कौन सी खुशी या कोई बड़ा तुफान लाएगा ये तो वक्त ही बताएगा ।
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