लड़की ने रोटी ले ली थी।
वाह भाई! क्या बात है! मैं अंदर ही अंदर उस लड़के के लिए तालियाँ बजा रहा था।
"मेरा नाम... मेरा नाम गजेंद्र प्रताप सिंह शेखावत है," लड़के ने हड़बड़ाहट में अपना नाम बताया।
भाई मेरे, मैंने मन ही मन अपना लकड़ी का सिर पीटा। तूने अपना नाम बताया है या अपने पूरे खानदान की ज़मीन की रजिस्ट्री पढ़कर सुना दी है? इतना बड़ा नाम कौन रखता है यार? लड़की ने उसकी तरफ देखा, हल्की सी smile दी, पर कुछ नहीं बोली।
गजेंद्र प्रताप — या जो भी उसका लंबा-चौड़ा नाम था — ने बात आगे बढ़ाने की कोशिश की।
"वो... तुम्हारे बैग पर जो anime का keychain है... वो मुझे भी बहुत पसंद है। तुम... तुम भी देखती हो क्या? मतलब... anime?"
अच्छा! तो anime connection से शुरुआत कर रहा है। मुझे लगा अब एक अच्छी खासी conversation शुरू होगी। दोनों के बीच एक cute सा moment बनेगा।
"मुझे... मुझे ना... वो... शिनचैन बहुत पसंद है! और... और मुझे लगता है हम दोनों अच्छे दोस्त बन सकते हैं... क्योंकि..."
गजेंद्र हकलाने लगा और उसने जो बकवास करनी शुरू की, उसे सुनकर मेरे अंदर की दीमक भी शर्म से मर जाए!
अरे नहीं! बेवकूफ़! मैं चीखना चाहता था। गेम ओवर कर दिया यार तूने! आते ही इतनी बकवास! कौन सीधा जाकर ऐसे बात करता है? तेरा 'Rizz' तो माइनस में चल रहा है भाई! कोई लड़की ऐसे impress नहीं होती!
मुझे उस गजेंद्र पर इतना गुस्सा आ रहा था कि क्या बताऊँ। जो लड़का पहली बार बात कर रहा हो और हड़बड़ाहट में कुछ भी बोल दे, उसका कटना तो तय है।
तभी लंच ब्रेक खत्म होने की घंटी बजी — टन-टन-टन!
गजेंद्र तुरंत खड़ा हो गया। "ठीक है, हम फिर मिलेंगे!" उसने एक अजीब सी smile दी और वहाँ से भाग खड़ा हुआ।
इतनी गंदी तरह से बातचीत का सत्यानाश करने के बाद तू 'फिर मिलेंगे' बोल रहा है? मेरा बस चलता तो मैं खुद को उड़ाकर उसके सिर पर दे मारता। भाई, मुझे लगता है तेरी ये 'love story' शुरू होने से पहले ही PG level का कटने वाली है!
यह सब देखकर मुझे अचानक अपने पिछले जन्म की कुछ धुंधली यादें आने लगीं। मुझे याद आया कि मैंने भी पहली बार किसी लड़की से ऐसे ही बात करने की कोशिश की थी। मैं भी घबरा गया था और उसने मुझे पूरी तरह से ignore कर दिया था।
आजकल के लड़कों का यही तो problem है। पहली बार लड़की को देखेंगे और सीधा बोल देंगे, 'आई लव यू!' अरे भाई, लड़की घबरा जाती है। ये बहुत embarrassing होता है। मैंने भी बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उस लड़की ने मुझसे बात ही नहीं की।
और एक सेकंड...
मैंने अभी ध्यान दिया। इस पूरी घटना में गजेंद्र ही बकवास किए जा रहा था। उस लड़की ने तो एक शब्द भी नहीं बोला!
कहीं ये लड़की बिल्कुल खामोश टाइप तो नहीं है? या भगवान... मेरे पिछले जन्म में जिस लड़की से मैंने बात करने की कोशिश की थी, क्या वो भी ऐसी ही खामोश थी?
तभी मेरे अंदर का दुख एक अजीब सी भाषा में बाहर आ गया:
"ई का हो गईल बा हमार भरल जवनिया... अइसे ही बिना लड़की के याद में डूबल बानी..."
रुक जाओ। एक मिनट।
मैं राजस्थानी स्कूल में हूँ तो मेरे मुँह से अचानक ये भोजपुरी कैसे निकल रही है? लगता है मेरे पिछले जन्म का connection कहीं बिहार से जुड़ा है! जो भी है, मेरी तो किस्मत ही खराब है।
तभी बाकी बच्चे क्लास में वापस आने लगे। लड़कियाँ आकर वापस मेरी सीट पर बैठ गईं।
मैं कुछ देर के लिए अपने ख्यालों में खो गया।
लड़कियाँ मेरे ऊपर बैठी हैं... तो क्या इसका मतलब ये है कि मुझे महसूस होगा कि उन्होंने अंदर क्या पहन...
अरे नहीं, नहीं, नहीं!
मैंने तुरंत खुद को रोका।
कैमरा चालू था क्या? राइटर साहब! ये सीन कट कर देना! कट! कट! कट! अगर audience ने मेरे ये विचार सुन लिए तो वो लोग मुझसे नाराज़ हो जाएँगे। वो मुझे main character नहीं, कोई 'दरिंदा बेंच' समझने लगेंगे!
देखो India की audience, please मुझे judge मत करना! माना कि ये सब गलत है, लेकिन मैं तो अभी बस पैदा हुआ हूँ — technically मैं एक बच्चा हूँ! बस थोड़ा सा gender crisis है!
खैर, छोड़ो। इससे क्या ही फर्क पड़ता है?
दिन जैसे-तैसे बीत गया। आख़िरी घंटी बजी और बच्चे अपने-अपने घर जाने लगे। मेरी ये पहली 'commentary' वाली duty खत्म हो रही थी।
सूरज ढलने लगा था और क्लासरूम फिर से खाली हो रहा था।
जैसे-जैसे रोशनी कम हो रही थी, मेरी लकड़ी का शरीर फिर से सुन्न होने लगा। मुझे याद आया कि कल रात क्या हुआ था। वो आवाज़।
क्या मुझे आज रात भी इसी अकेलेपन में गुज़ारनी पड़ेगी? कहीं मैं बैठे-बैठे सच में 'बुद्धत्व' को प्राप्त होकर कोई जादुई पेड़ न बन जाऊँ?
"खड़क्क..."
वही आवाज़। फिर से।
लेकिन इस बार ये आवाज़ कमरे के कोने से नहीं, बल्कि ठीक मेरे पीछे वाले दरवाज़े से आ रही थी। और इस बार, आवाज़ के साथ किसी के भारी कदमों की आहट भी थी।
कोई अंदर आ रहा था। और स्कूल की छुट्टी हुए तो घंटों बीत चुके थे!
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