मगध का गौरव - दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय Anant Dhish Aman द्वारा पत्रिका में हिंदी पीडीएफ

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मगध का गौरव - दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से मेरा जुड़ाव केवल एक विद्यार्थी, नागरिक या दर्शक का संबंध नहीं है, बल्कि उस परिवर्तन यात्रा का साक्षी बनने का अनुभव है जिसने पूरे मगध क्षेत्र की शिक्षा, सामाजिक चेतना और आत्मविश्वास को नई दिशा दी। जब भी इस विश्वविद्यालय का नाम सुनता हूँ, मेरे मन में केवल एक शिक्षण संस्थान की छवि नहीं उभरती, बल्कि संघर्ष, आशा, परिवर्तन और नवजागरण की एक पूरी कहानी जीवंत हो उठती है।

मुझे आज भी वह समय स्मरण है जब मगध क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो चुकी थी। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों का अभाव, सीमित संसाधन और विद्यार्थियों का बड़े शहरों की ओर पलायन एक सामान्य स्थिति बन चुकी थी। गाँवों और कस्बों के युवाओं की आँखों में सपने तो थे, किंतु उन सपनों को दिशा देने वाला कोई सशक्त मंच दिखाई नहीं देता था। ऐसे कठिन समय में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय आशा की एक नई किरण बनकर उभरा।

धीरे-धीरे इस विश्वविद्यालय ने केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा प्रदान की। जब समाचार पत्रों में विद्यार्थियों की सफलता, शोध उपलब्धियों, प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन तथा सामाजिक कार्यों की चर्चा पढ़ता हूँ, तो मन गर्व और प्रसन्नता से भर उठता है। यह केवल किसी विश्वविद्यालय की उपलब्धि नहीं प्रतीत होती, बल्कि ऐसा लगता है मानो मगध की सुप्त चेतना पुनः जागृत हो उठी हो।

विश्वविद्यालय के कुलपति कामेश्वर सिंह का नेतृत्व इस परिवर्तन यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उनकी दूरदृष्टि, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने विश्वविद्यालय को केवल भवनों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने शिक्षा को समाज, गाँवों और आम जनजीवन से जोड़ने का कार्य किया। विद्यार्थियों को गाँवों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों के बीच जाकर कार्य करने, समस्याओं को समझने और समाधान की दिशा में सोचने के अवसर दिए गए। इससे शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का माध्यम बन गई।

मुझे सदैव यह महसूस हुआ कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब उसकी चेतना समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। शायद यही कारण रहा कि मैंने अपने छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से विश्वविद्यालय को समाज से सीधे जोड़ने का निरंतर प्रयास किया। चाहे पितृपक्ष महासंगम का अवसर रहा हो, मगध पुस्तक मेला हो अथवा अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन—हर मंच पर मैंने विश्वविद्यालय और समाज के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की

इन आयोजनों में केवल शिक्षा और साहित्य की चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों की समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। विशेष रूप से किन्नर समाज के उत्थान, सम्मान और सामाजिक सहभागिता के प्रश्न को प्रमुखता से उठाना मेरे लिए केवल सामाजिक सरोकार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का विषय रहा है। मेरा मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह समाज के उन वर्गों तक भी पहुँचे, जिन्हें लंबे समय तक मुख्यधारा से दूर रखा गया है।

साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवेश से जुड़े होने के कारण मेरे भीतर हमेशा यह भावना रही कि अपने क्षेत्र के विकास का सपना देखना, उस पर लिखना और मंचों से भाषण देना ही पर्याप्त नहीं है। समय-समय पर उन गतिविधियों को गति देना तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसमें सक्रिय भूमिका निभाना भी हमारा नैतिक दायित्व है। समाज का वास्तविक परिवर्तन केवल शब्दों से नहीं, बल्कि विचार और कर्म के समन्वय से संभव होता है। जब चिंतन के साथ सहभागिता जुड़ती है, तभी विकास की वास्तविक शुरुआत होती है।

इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहाँ का प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण और शिक्षक-छात्र संबंध भी शामिल हैं। यहाँ के शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने का कार्य भी करते हैं। छात्रों को अपनी बात रखने, नए विचार प्रस्तुत करने और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है। यही कारण है कि यहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी, जागरूक और सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक बनकर निकलते हैं।

मगध क्षेत्र सदियों से ज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक चेतना की भूमि रहा है। यह वही धरती है जिसने इतिहास को दिशा दी और सभ्यता को नई पहचान प्रदान की। ऐसे क्षेत्र में शिक्षा का पुनर्जागरण केवल एक संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि इतिहास को पुनर्जीवित करने जैसा है। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का जो प्रयास किया है, वह निश्चय ही प्रेरणादायक और ऐतिहासिक है।

आज यह विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के सपनों को आकार देने वाला केंद्र बन चुका है। यहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी देश और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। यह परिवर्तन हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो, उद्देश्य स्पष्ट हो और शिक्षा को समाज से जोड़कर देखा जाए, तो कोई भी क्षेत्र विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

निस्संदेह, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय आज मगध क्षेत्र के लिए शिक्षा, सामाजिक चेतना और प्रगति का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है। मेरे लिए यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि मगध के नवजागरण, आशा, संवेदना और आत्मगौरव की जीवंत पहचान है।