संगत भी भाग्य का हिस्सा है !! Anjali kumari Sharma द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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संगत भी भाग्य का हिस्सा है !!

मै ये नहीं कहती कि हर संगति अच्छी होती है या बुरी, हां पर ये जरूर कहूंगी कि संगत से खुद की जिंदगी में भी असर पड़ते हैं।अब आप ही अपने आस पास के बच्चों की ओर झाकी ये , क्या लगता है आपको ? जितने भी बच्चे है या नवजवान सही  संगति में हैं? मै जानती हु आपका जवाब यही होगा 'नहीं '। बिल्कुल सही हैं आप , अब जरा आप अपनी जिंदगी के जवानी  में जाइए और झाकी ये , क्या लगता है आप सही संगति में थे?

देखिए हम अभी जहां जिस परिस्थितियों में हैं , जहां  घर, परिवार,सुख शांति, दौलत हैं ।जहां सारी सुविधाएं है तो उस तौर पर हां! थे हम सही संगत मै। परन्तु आने वाली पीढ़ी मै जितना हम देख रहे है संगति का बुरा प्रभाव वो किस हिसाब से हैं मै आपको बताना चाहती हु कि.....

मेरे ही पास मै नवजवान लड़का जिसका हर एक चीज मालूम है मुझे! वह इतना साफ दिल का, नहीं परिवार के प्रति कपट था, और नहीं दोस्तों के प्रति।किंतु उसका भी नसीब मानो बाबा- ने पराया समझ कर लिखा हो।11वि की परिक्षा में असफल हुआ, उसके बाद उसने निर्णय लिया कि अब मै आगे पढ़ाई नहीं करूंगा , छोटी बहन थी उसकी ! उसके मन में विचार , सपने तो बहुत थे - आगे बहन को शिक्षा देना है , घर संभलना है । जैसे ही वह ये निर्णय लेकर बाहर निकला कमाने ! तो क्या था घर से बाहर निकलो तो संगति का खेल होता है । मै तो कुछ बोल नहीं सकती थी बस सारा भावना को सिर्फ देख और सुन ही सकती थी।अगर मै बीच में बोलती तो क्या पता मुझे बोला जाता तुम परिवार के मामले में न बोलो!!

राज निकल गया बाहर कमाने अपना सपना लेकर, अब वहां क्या था उसकी संगति गलत थी , जिसके वजह से वह हर किस्म का नशा करना शुरू कर दिया। उसकी मां परिवार को कभी खबर तक नहीं लगी, और लगती भी कैसे आखिर इतना नेक शरीफ लड़का था , धीरे धीरे घर पे पैसा तो जाता था परन्तु कुछ साल बाद उसकी पैसा भी खुद के लिए नहीं पूर्ण हो पाती थी। घर से पैसा मांगने पर पापा अलग ही भड़कते थे, भड़कना जायज भी है क्योंकि - पिता को खबर हो ही जाती है कि लकड़ा किस चीज मै ध्यान दे रहा है , खैर ऐसे होते - होते परिवार मै आर्थिक स्थिति ढीली पर गई थी।घर से पैसे तो मिलते रहे परन्तु राज कभी घर पे पैसा न दे सका!! 

नशा और संगति के कारण वह अपने जीवन की राह भटक चुका था!! घर से क्या सपना लेकर निकला था, और क्या हो गया? उसके लिए तो कुछ भी नहीं था उस समय परन्तु परिवार के लिए मानों , "जमीन तले आसमान आ गई हो "।

वक्त,समय,परिवार!जीवन की मूल संकेत है।

जीवन में संगति अगर अच्छा होता तो राज नशा के जगह अपने सपनों को चुनता!! अगर वो खुद के लिए सोचता, परिवार के लिए सोचता, तो आज उसका परिवार सुख में जीवन व्यतीत करता । खैर ! हम तो बस सुन और देख सकते थे ।।


               जीवन में सब कुछ करना मित्र , परन्तु दोस्त हमेशा वही चुन ना जो तुम्हारे मंजिल के बीच पत्थर न बने।।   

                                                  _अंजली शर्मा