शहद कि गुड़िया - प्रकरण 62
" दादू! एक बार हारमोनियम पार अर्जुन ने एक गीत कि धुन सुनाई थी. जो मेरी पसंदीदा थी. मुझे पूछे बिना ऊस ने यह गीत सुनाई थी. मैं हरदम यह गीत गाती थी. शायद ऊस ने सुनी थी. इस लिये मुझे खुश करने के लिये ऊस धुन का इस्तेमाल किया था. "
" दिल के अरमा आंसू ओ में बह गये हम भरी दुनिया में तन्हा रह गये
" यह सुनकर मेरी आंखे भर आई थी. "
" यह गीत मुझे जुबानी याद था. उसे सुनकर मैं खुद उसे गाने लगी थी. "
. " शायद उन का आख़िरी हो ये सितम हर सितम यह सोचकर हम सह गये.
" दादू अर्जुन ने मुझे सिखाया था कि असली रोशनी आँखों में नहीं रूह में होती हैं. ऊस कि वो संगीत वाली धुन कहानी को पेचीदा बना रही हैं. "
" ऊस कि ख़ामोशी मेरी मीठी बातों को तरसती थी.
" अर्जुन ने फिर एक बार मेरा हाथ थामकर अपने चेहरे पर ऱख दिया था. ऊस ने मुझे कहां था कि वह मुझे देख नहीं सकता पर मेरी रूह कि खूबसूरती उसे महसूस होती हैं. "
" ऊस वक़्त मेरी धड़कने ऊस के स्पर्श से मानो थम सी गई थी. यह कहानी का अत्यंत जज्बाती मोड़ साबित हुआ था. "
" अर्जुन ने मेरी उंगलियों को बड़े प्यार से महसूस किया था और कहां था कि मेरी मुस्कान कि खुशबू पुरे कमरे में फ़ैल रही हैं. "
" ऊस ने मेरे लिये वहीं ' लग जा गले से वाला गाना गाया था. "
" दादू! ऊस पल अर्जुन ने धीरे से मेरे होठों पर अपनी ऊँगली रखी थी और मेरी ख़ामोशी को पढना शुरू किया था. "
" ऊस ने कहां था : मेरी आवाज ही ऊस के लिये सवेरा हैं जो कभी नहीं आया था. "
" दादू! अर्जुन ने धीरे से मेरे हाथ थामकर अपने दिल पर ऱख लिया था और कहां था कि वो मेरी धड़कनों को सुनकर ही मेरे चेहरा अपनी कल्पना में सजाता था. "
" ऊस वक़्त ऊस कि आँखों में आंसू थे पर मेरे चेहरे पर एक आश्वस्त मुस्कान. "
" वह एक कलाकार कि बेबसी और प्यार कि बेनमुन मिशाल थी. "
" अर्जुन ने ज़ब मेरे हाथ अपने चेहरे पर पर फेरा तो ऊस कि उंगलियों में ऐसी तङप थी जिस से मेरी रूह झक झोर हो गई थी. लगा वह देखे बिना मेरा सारा वजूद जान गया हो. "
" ऊस ने धीरे से मेरी हथेली को अपने होठों से लगा लिया था, और कहां था मेरी गर्मी ही ऊस कि असली रोशनी हैं. "
" ऊस ने ऊस वक़्त पियानों पर ऐसी धुन छेड़ी थी जो सीधी मेरी रूह को छू गई थी. "
" दादू अर्जुन ने पियानों बजाते हुए अपना सर मेरे कंधो पर टिका दिया था. और धीरे से कहां था मेरी मौजूदगी ऊस के अंधेरों को उजियारा करता हैं. "
" ऊस कि आवाज में छिपी वो थरथराहट मुझे आज भी याद हैं.. "
" दादू! ऊस दिन अर्जुन ने पियानों से अपना हाथ हटाकर मेरा हाथ पकड लिया था. ऊस कि हथेली कि गर्मी बता रही थी वह कितना बेचैन था.
" ऊस ने मुझे धीरे से कहां था कि मेरी धड़कन ही ऊस के गीत कि असली लय हैं. "
" एक अंधे कलाकार कि ऊस रूहानी प्यास को उतारने के प्रयास में सवाल किया था मुझे पूछा था. क्या तुम उसे शब्दों में उतार सकती हो? "
" अर्जुन कि वो प्यास जिस्म कि नहीं बल्कि रूह कि थी. ऊस कि ख़ामोशी में एक ऐसी चीख थी जो मेरी बातों से शांत होती थी. "
" ऊस ने कहां था कि मेरी आवाज ऊस के अंधेरे कमरे में सूरज कि पहली किरण जैसी थी वो बस मेरी धड़कनो में अपनी दुनिया तलाशता था.. "
" दादू अर्जुन ने धीरे से मेरे बालो को. सहलाया था और कहां था कि मेरी खुशबू उसे मेरी सूरत का एहसास कराती थी, ऊस कि उंगलियों का वो स्पर्श बहुत ही कोमल और जज़्बाती था. "
" ऊस पल कि ख़ामोशी में बस अर्जुन कि धड़कने और मेरे एहसास शामिल था. ऊस ने अपनी हr घुन मेरे नाम कर दी थी, ताकि वह कभी अकेला महसूस ना करे "
" ऊस के लिये कोई गाना तुम्हारे पास हो तो बताओ. दादू आप ने पूछा था. "
" और मैंने कहां था. ' हमने देखी है उन आँखों कि महकती खुशबू '.
" उसे आँखों से नहीं बल्कि रूह और रूह और एहसास से देखने कि बात है. "
" वो अक्सर यही धुन बजाता था और कहता था कि मेरी आवाज में ऊस के अंधेरे जीवन कि असली रोशनी थी."
" अर्जुन ने ऊस दिन अपनी आख़िरी धुन पियानों पर बजाई और खामोश हो गया. ऊस ने फिर एक बार मेरे हाथ पकडकर अपनी बात दोहराई थी. "
" ऊस कि आँखों में बेशक अंधेरा था, पर ऊस पल ऊस कि रूह चमक रही थी.. ऊस ने मुझे कहां था.. मेरी मुस्कान ही ऊस के दिल कि धड़कन थी, ऊस के अंधेरे जीवन कि ज्योति थी. वह मेरी आवाज सुनकर मेरे चेहरे कि खुशी महसूस करता था. "
" दादू! अर्जुन ने एक दिन बहुत हिचकिचाते हुए मुझे पूछा था. क्या वह अपनी उंगलियों से ज़ब चाहे तब मेरा छू सकता है? "
" ज़ब ऊस के कांपते हाथों ने मेरे गालों को छुआ तो मानो मेरी धड़कन फिर मानो थम सी गई. लगा जैसे वह अपनी उंगलियों से मेरी रूह तलाश रहा हो. "
" अर्जुन ने एक दिन शाम को पियानों कि चाबियों को छोड़कर मेरा हाथ ऊस के चेहरे पर रखा था और फुटफुट कर रोने लगा था. वह पहले इस तरह कभी मायूस नहीं हुआ था ना तो कभी रोया था.. पूछने पर बताया था कि उसे अपनी आंखे ना होने कि कोई चिंता नहीं थी, केवल एक ही बात का अफ़सोस था कि वह मेरी मुस्कुराहट नहीं देख पायेगा. "
" मैंने धीरे से ऊस का सर गोद में लेकर सहलाया था. ऊस वक़्त मानो मेरे कानो में ऊस कि आवाज गूंज रही थी.
" मेरी दुनिया है मा तेरे आँचल में. "
000000000000 ( क्रमशः)