शहद की गुड़िया - प्रकरण -61
" दादू! अर्जुन एक म्यूझिक टीचर था. वो दर्द नहीं सकता था. पर मेरी आवाज का दिवाना था. "
" ऊस ने मेरे सामने इजहार किया था कि उसे मेरी बातों में वो रोशनी दिखती थी जो ऊस कि आँखों से छिन गई थी. ऊस कि दुनिया सिर्फ सुरों में समाई थी. "
" दादू ने मुझे सवाल किया था : " क्या वह बचपन से अंधा था? "
, " मैंने अपने आंसू पोंछकर जवाब दिया था.."
" नहीं दादू! वो जन्म से अंध नहीं था.. बचपन के एक हादसे ने ऊस कि आँखों कि रोशनी छिन ली थी. "
" ऊस ने पूरी जिंदगी सुरों के नाम कर दी थी. ताकि वह अपना दुःख भूल सके. "
" दादू अर्जुन बचपन में दिवाली के दिन फटाखे जला रहा था. वह आठ साल का था. एक फटाखा ऊस कि आँखों के पास फूटा था जिस कि वजह से ऊस कि आँखों कि रोशनी हमेशा के लिये चली गई थी. ऊस अंधेरे ने अर्जुन को तोड़ दिया था और संगीत ऊस का जीने का बहुत बड़ा सहारा बन गया था.
" ऊस वक़्त घर में कोई नहीं था जो वह अकेले फटाखे फोडने चला गया? "
" दादू ने सहज सवाल किया था. "
मैंने उन्हें बताया था. ऊस वक़्त घर में मेहमान थे, ऊस के मै बाप उन के साथ व्यस्त थे."
" और अर्जुन ने अकेला ही फटाखा का जलाया था जिस से यह दुर्घटना घटी थी. "
"यह अजीब सा इत्तेफ़ाक़ था. दादू लड़का भी दिवाली के दिन हादसे का शिकार हुआ था. वह केवल छह महिने का था और यह ऊस कि पहली दिवाली थी. धमाकेदार फटाखो कि आवाज से ऊस कि आँखे टेढ़ी हो गई थी."
" मैंने सुनकर इस तरह रियेक्ट किया था. दादू यह सचमुच अजीब सा इत्तेफ़ाक़ है जिसे सुनकर मेरा दिल फट गया हैं. "
" अर्जुन ने तो सालो तक अपने आप को अंधेरे कमरे में बंद कर लिया था. उसे ऐसा लग रहा था अब ऊस कि जिंदगी में कुछ भी नहीं बचा. "
" दादू! यह सुनकर मेरा दिल बैठ गया था. कितना खौफनाक इत्तेफ़ाक़ था कि आप के बेटे के साथ भी ऐसा हादसा हुआ था. "
" आप के बेटे का वह दर्द और आप कि बेबसी का मुझे एहसास हो रहा हैं. "
" ऊस कि आंखे ओपरेशन से सीधी हो गई थी. लेकिन वह दादू का ससुराल किसी कुदरती प्रकोप का शिकार हो गये थे. दादू के इस लडके को यह बीमारी विरासत में मिली थी. फिर भी ऊस ने ग्रेजुएशन पूर्ण कर लिया था. वह C. A. करने वाला था. दादू के साले को यह बीमारी लागु हुई थी. जो दादू के लडके को विरासत में मिली थी. यह बीमारी कभी भी किसी उम्र में हो सकती हैं. "
" यह बडी त्रासदी थी. कुदरत ने दादू के परिवार से बड़ा अन्याय किया था.. उन कि कड़ी परीक्षा ली थी. "
" मैंने अधीर होकर दादू को आश्वास्त करते हुए कहां था और मेरी हालत को बयां किया था. दादू के लडके कि दास्तान सुनकर मेरी रूह कांपने लगी थी. "
" पागल डोक्टर कि एक गलती ने दादू के लडके के भावि पर दुखो का बड़ा ताला लगा दिया था.
" तुम्हारी आँखे चली जायेगी. तुम आगे कुछ करने कि कोशिश नहीं करना.
" यह सुनकर क्षितिज को दादू के लडके को बड़ा झटका लगा था. वह अब कुछ नहीं कर पायेगा यह सोचकर ऊस ने सारे हथियार फेंक दिये थे. घर का माहौल भी कुछ नकारात्मक था. दादू के पिताजी और बीवी भी नकारात्मक सोच के शिकार थे इस हालत में इतनी पढ़ाई करने बाद वह नकारात्मक सोच से बाहर नहीं आ पाया था और अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली थी. "
" आप घोड़े को पानी पिलाने नदी तक ले जा सकते हो लेकिन ऊस कि मर्जी के खिलाफ उसे पानी नहीं पिला सकते हो. क्षितिज का भी यही हाल था वह कुछ भी करने को तैयार नहीं था. अब ऊस को कौन मदद कर सकता हैं?"
" ऊस डोक्टर कि संवेदन हीनता सुनकर मेरा खून घोल गया था. किसी के सपनो को डोक्टर कि ऐसी घातक सोच ने बेरहमी से कुचल दिया था. यह एक बड़ा महा पाप था जो लांच रिश्वत के दम पार डोक्टर बने लोग क्या समझेंगे? "
" बेचारे क्षितिज ka C. A. करने का सपना चकनाचूर हो गया था. वह पूरी तरह से मायूस हो गया था. इतनी बडी काबिलियत होने के बाद भी दादू के बेटे कि जिंदगी में अंधेरा छा गया था. वह सब कुछ छोड़कर बैठ गया था. "
" दादू कि यह बात सुनकर मुझे भी बहुत दुःख हुआ था.. क्षितिज ने काबिलियत होने के बाद हार मान ली थी वह त्रासदी था. दादू ने उसे इस अंधेरे से निकालने के अथाग प्रयास किया था, लेकिन नकारात्मक सोच कि गर्ता में इस तरह फस गया था कि उसे कुछ नहीं सूझ रहा था.
" दादू के लिये एक पिता के लिये बहुत बड़ा सदमा था. एक ग्रेजुएट लडके कि ऐसी घटिया सोच पर वह शर्मिंदगी फील रहे थे ऊस कि शिक्षा पर इतना खर्चा करने के लिये अफ़सोस कर रहे थे. "
" दादू कि अपनी छोटी बहन मुश्किल से छह किताब पढ़ी थी वह भी नकारात्मक सोच के नतीजो से वाकिफ थी. "
" एक पढ़े लिखें बेटे का ऐसा रवईया एक बाप के दिल को प्रताड़ित करता था. वह अपनी व्यथा किसी से शेयर नहीं कर सकते थे. बीबी के बेसमज प्यार ने उसे बिल्कुल कमजोर कर दिया था. "
" मैंने बार बार दादू के बेटे के बारे में चिंता कि थी. मैं अक्सर ऊस का हाल पूछती थी. लेकिन मेरा यह सवाल उन के घाव को कुरेदता था इस लिये मैंने पूछना बंद कर दिया था. "
" दादू ने अपने बेटे कि मौत के बारे में कल्पना कि थी. "
" जिसे सुनकर मैं अवाक हो गई थी "
00000000000000 ( क्रमशः)