शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (58) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (58)

            

               शहद की गुड़िया   प्रकरण 58

          " दादू और फ्लोरा दीदी के भाइयो ने मिलकर राघवन को अस्पताल में दाखिल किया था. ऊस वक़्त उन्हें अपनी बीमारी की गंभीरता का अंदाज नहीं था. वह फ़िल्म ' आनंद ' के हिरो की तरह अस्पताल में भी सभी मरीजों से हसकर बातें करते थे. "

          " दादू उन को मिलने गये थे तब उन्हे राघवन का मिजाज देखकर प्रसन्नता हुई थी. उन्होंने ने अपने दोस्त की लंबी जिंदगी के लिये भगवान से प्रार्थना की थी. "

          " लेकिन डोक्टर ने उन के सुनते हुए कह दिया था. ' अब उन की विकेट कभी भी गिर जायेगी. यह सुनकर राघवन टूट गये थे. ऊन में काफ़ी बदलाव आ गया था. उन की खुशी रातोरात उड़न छू हो गई थी. "

          " और राघवन ने 15 दिनों के अंदर ही देह त्याग दिया था.. "

           " ऊस वक़्त दादू अपने काम के लिये बाहर गये थे. बाद में उन के क्लाइंट की ओफिस में गये थे. तब उन्होंने ने दादू को मनहूस खबर सुनाई थी. "

           " तुम्हारे घर से बीवी का फोन आया था. तुम्हारे दोस्त का देहांत हो गया हैं. आप को ऊस की अंतिम यात्रा में शामिल होना है. "

           " दादू ने तुरंत घर फोन किया था. और आरती को मिलने स्टेशन बुलाया था. "

           " और दोनों नियत समय पर मिले थे. और बूके लेकर फ्लोरा दीदी के घर पहुंचे थे. बिल्डिंग के नीचे उन के भाई नीचे खडे थे. उन्होंने ने अपने बहनोई के मौत की जानकारी दी थी. "

            " राघवन की डेड बोड़ी को होल में रखा गया था.. दोनों ने उन के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम किया था और उन की डेड बोड़ी के पास बूके रखा था. "

           " फ्लोरा दीदी अपनी सुध बुध खो पड़े थे. वही बिल्कुल निश्चिंतन हालत में बिस्तर पर लेटी थी. दादू ने ऊस का चेहरा सहलाकर आश्वस्त किया था. लेकिन उन्हें कुछ पता नहीं था."

         " राघवन ने केथलिक धर्म अंगीकार किया था. इस लिये उन की डेड बोड़ी को कब्र में दफनाना था. "

         " इस अंतिम विधि में उन की सौतेली मा और भाइयो ने हाजिर ना रहकर मौत की आमन्या तोड़ी थी.. "

         " दादू! पूरा समय इस दफन विधि में शामिल थे. फ्लोरा दीदी की हालत तब भी नाजुक थी. दफन विधि के बाद दादू वापस फ्लोरा दीदी के घर आये थे और देर तक वहाँ ठहरे थे. "

         " पति के मौत का सदमा झेलना मुश्किल था. फिर भी फ्लोरा दीदी ने उसे झेल लिया था. एक बात अच्छी थी. उन को दादू के अलावा एक और व्यकित भाई के रूप में मिला था. "

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           "उन दिनों दादू को दोबारा एसिडिटी की समस्या हो गई थी. उन्हें अस्पताल में भरती किया था. उस दिन भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वन डे मैच खेला जा रहा था. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 270 रन बनाये थे. ऊस दिन सचिन तेंदुलकर का 24 वा जन्मदिन था. उन्होंने अपनी 25 वी सदी बनाकर भारतीय टीम को गौरव शील विजय दिलाया था. दादू को डोक्टर ने टी वी देखने के किये मना किया था फिर भी उन्होंने  बाहर विजिटर रूम में बैठकर मैच देखी थी. ऊस वक़्त अस्पताल के किसी मुलाजिम ने चैनल बदल कर न्यूज़ चैनल रखा था. "

            " ऊस में समाचार चल रहा था. न्यू योर्क से मुंबई आते हुए जहाज को अकस्मात हुआ हैं. ऊस में बहुत से लोग मारे गये थे. ऊस में संगीता शेटी का नाम शामिल था. यह सुनकर दादू को गहरा सदमा लगा था.. "

             " वह सालो बाद अपने पालक मामा की खबर सुनकर अपने पति के साथ मुंबई आई थी. ऊस के पति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ऊस की लड़की रिधिमा कुछ वजह से माता पिता के साथ नहीं निकली थी. "

              " अकस्मात की खबर मिलते ही वह पहली फ्लाइट में मुंबई पहुंची थी. ऊस के पिता की खबर भी ऊस ने पेपर में पढ़ी थी. वही मुंबई की किसी अस्पताल में भर्ती थे. "

               " दादू और उन के एक दोस्त ने उन का कब्जा लिया था और उन्हें घर ले गये थे. संगीता की मामीने भी इस हालत में अपने सुध बुध खो दिये थे. ऊस के पति की मौत की वजह से यह आफत आई थी, संगीता चल बसी थी और उन का दामाद कोमा में चला गया था. "

              " करम की यह कैसी कठिनाई भी. संगीता, दादू की जिंदगी की म्युजिका सदा के लिये चल बसी थी. ऊस की लड़की रिधिमा को उन्होंने ने देखा नहीं था. फिर भी ऊस ने दादू को लेखन प्रवृत्ति में काफ़ी मदद की थी जिस से दादू का बड़ा नाम हुआ था. "

             " ऊस ने दादू की बहुत सारी कहानी का अंग्रेजी में अनुवाद कर के अमेरिकन मेगेजिन की शान बढ़ाई थी. "                  

            " वह खुद लिटरेचर में पी एच डी कर रही थी. वह ही अपने माता पिता के लिये कोहिनूर के हिरे के समान थी."

            " दादू के अपाहिज लडके की बडी मुश्किल से  अनाथालय की प्रमुख और संचालक गरिमा देसाई की वजह से शादी हुई थी. ऊस वक़्त नीला भी वहाँ रहती थी. हालात उसे अनाथालय में खिंच लाई थी जो दूर के रिश्ते में दादू की बुआ लगती थी. "

           " दादू! नियमित स्नेहा को मिलने आश्रम में जाते थे.. ऊस का खुद का लड़का भी इसी आश्रम में रहता था. साथ रहते तीनो में अपनापन हो गया था. "

           " गरिमा देसाई की वजह से स्नेहा और दादू के बेटे की शादी हुई थी, जो देख नहीं सकता था.  स्नेहा का एक लड़का था, जो ऊस के साथ था, दादू के लडके से उसे लगाव हो गया था.

           " दोनों की शादी के दादू उन्हें घर ले आये थे, नीला का भी कोई नहीं था तो दादू उसे भी घर ले आये थे.. इस बात से खुश थी. वह देख नहीं पाती थी. इस स्थिति में गरिमा ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट की मदद से ऊस की आँखों का इलाज करवाया था. नीला दादू के घर की मुख्य सदस्या बन गई थी."

                   00000000000   ( क्रमशः)