शहद की गुड़िया - प्रकरण 57
" सब कुछ भावना पर निर्भर हैं. दादू इस बात पर विश्वास करते थे. उन्होंने ने मुझे यह बात समजाई थी और एक मिशाल पैश की थी. "
" एक डोक्टर भी चाकू का उपयोग करता हैं, एक गुंडा मवाली भी वही काम करता हैं लेकिन दोनों का उदेश्य, भावना अलग हैं. "
" एक डोक्टर मरीज को बचाने के लिये चाकू का उपयोग करता ज़ब की गुंडा किसी को मारने के लिये चाकू हाथ में लेता हैं. "
" फ्लोरा, मालिनी का रिप्लेसमेंट थी, दादू ने कभी ऊस को गलत नजरो से नहीं निहारा था, क्यों की वही शुद्ध और पाक थी भाई बहन के रिश्तों को बखूबी निभाया था, ज़ब की मालिनी का दामन पर पहले से धब्बा लगा था ऊस की यादों ने दादू को भटका दिया था. फिर भी उन्होंने अपनी साली की इज्जत बचाकर अपनी भूल का जुर्माना चुकाया था. "
" फ्लोरा का पति राघवन अपने परिवार को सुनहरा भविष्य देने के लिये वनवास के रूपये दुबई गया था. गया तो वह दो साथ के करार के साथ लेकिन बदले हुए हालात बदल दिये थे. ऊस के मालिक राघवन के काम से इतने प्रभावित हुए था. वह अब्दुल भाई के लिये वह इडिस्पोजेबल बन गया था. उन्होंने उसे भारत लौटने नहीं दिया था.
" कंपनी ने उसे घर के साथ कार भी दी थी. राघव ने फ्लोरा और लडके को दुबई में सेटल होने का प्रस्ताव किया था. लेकिन मा बेटे ऊस के लिये तैयार नहीं हुए थे. "
" एक बार कंपनी के काम में बाहर जाते समय ऊस के साथ साथ एक बड़ा हादसा हुआ था. ओइल टैंकर से कर टकरा गई थी. राघव तो बच गया था. और वह बुरी तरह से घायल हुआ था. और ऊस के गुह्य अंग को गहरी चोट लगी थी. काफ़ी समय वह बेहोश रहा था. इस लिये ना तो वही सिड्यूल के मुताबिक अपने परिवार के पास आ पाया था. "
" अब्दुल भाई खुद ऊस की स्थिति से परेशान थे. वह राघवन के घर फोन कर के बताना चाहते थे लेकिन फ्लोरा यह झटका बर्दास्त नहीं कर पायेगी. ऐसा सोचकर ऊस ने अब्दुल भाई को रोक दिया था."
" करीब करीब एक साथ राघवन अपने परिवार के पास आया था. ऊस बात का उसे अफ़सोस हुआ था.. राघवन को देखकर फ्लोरा गुस्से हो गई थी, ऊस ने अपने पति को लापरवाही का, प्यार नहीं होने का ताना मारा था. दोनों के बीच एक दरार पड़ गई थी. वह चाहते हुए भी सच्चाई बता नहीं पाया था. "
" फ्लोरा कुछ सुनने की दशा में नहीं थी. वह राघवन को ताना मारती थी और रोती रहती थी. "
" ऊस स्थिति में राघवन ने दादू को फोन कर के घर बुलाया था. "
" दादू तुरंत उन के घर पहुंच गये थे.. दरवाजे की रिंग बजाइ थी. ऊस वक़्त फ्लोरा की रोने की आवाज दादू के कानो से टकराई थी. सुनकर वही अस्वस्थ हो गये थे. कुछ गंभीर होने का ख्याल हुआ था. "
" ऊस वक़्त राघवन ने खुद दरवाजा खोला था. ऊस का चेहरा कुछ अशुभ होने का संकेत दे रहा था. "
" दादू घर में दाखिल हुए थे. ऊस वक़्त फ्लोरा दीदी सोफे पर बैठी रो रही थी. "
" दादू ने ऊस के पास बैठकर फ्लोरा का सर सहलाते हुए सवाल किया था.
" मेरी लाडो बहना को क्या हो गया? "
" यह सुनकर वह और जोर से रोने लगी थी.. "
" ऊस पर राघवन ने खुलासा किया था: "
" आप की बहन ने मुझ पर बेवफा और लापरवाह होने का इल्जाम लगाया हैं. "
" ऐसा क्या हो गया? जिस ने मेरी बहन को ऐसा मानने को विवश किया.?"
" मैं हर साल की तरह मुंबई नहीं आया ऊस बात का ऊस ने बतंगड़ बना दिया हैं. "
" बतंगड़ नहीं लेकिन मेरे दिल की फीलिंग्स को अंजाम दिया हैं. ऊस को मालूम हैं, चिंता की वजह से मुझे पेट के अल्सर की बीमारी डस गई थी.. यह बीमारी विश्व की दसवी घातक बीमारी हैं. जो चिंता करने से होती हैं. एक बार तो ऊस से बाहर आ गई लेकिन ऊस के ऐसे व्यवहार ने फिर से मुझे ऊस बीमारी की आग में धकेल दिया. "
" ऊस वक़्त मैं अपनी हालत किसी को बता नहीं पाई. अपने भाई को भी बता ना पाई. अब संभव भैया आप ही बताओ मैं क्या करुं? "
" फ्लोरा दीदी की बात सुनकर दादू अवढव में आ गये थे. दादू को अपनी बहन के प्रति सहानुभूति थी. वह ऊस की हालात से इत्तेफाक रखते थे.. "
" फिर भी फ्लोरा दीदी के दिल का आतश शांत नहीं हुआ था. "
" ऊस का पति राघवन अब भी कुछ कहना चाहता था. दादू ऊस की मन स्थिति को परख लिया था. उन्होंने अपने दोस्त को सवाल किया था. "
" मैं तुम दोनों की मनोदशा पूर्णतः वाकिफ हूं. दोनों को मोरल सपोर्ट की बेहद आवश्यकता हैं. लेकिन ऊस से बाहर निकलना बेहद जरूरी हैं दर्द को भीतर छिपाने से बहुत सारी मुस्किले ख़डी होती हैं. "
" दुःख को कभी सर पर चढने देना नहीं चाहिये. मौत जैसे विषम दुःख को लोगो ने कंधे पर उठाया हैं.. "
" दादू की बात सुनकर फ्लोरा दीदी ने अपने आप को संभाल लिया. "
" जरूर कोई ऐसी वजह थी जिस ने उसे अपने देश लौटने के लिये रोका था. "
" दादू की बातों ने फ्लोरा दीदी को भी सोचने पर विवश किया था. "
" जरूर कोई बात थी. जो राघवन अपनी जुबानी कह नहीं पा रहा था. "
" ज़ब दोनों ने ऊस पर दबाव डाला तो राघवन भीतर गया, अलमारी खोली और एक फ़ाइल लेकर बाहर आया और फ़ाइल दादू के हाथ में थमा दी. "
" ऊस पर अस्पताल का नाम प्रिंटेड था.. "
" दादू ने फ़ाइल खोली और ऊसे पढ़कर उन के सामने अंधकार सा फेल गया. "
000000000000 ( क्रमशः)"