शहद की गुड़िया- प्रकरण 56
" दादू ने मुझे ज्योत्सना के बारे में जो बताया था, वह सुनकर मुझे बड़ा धक्का लगा था. "
" ऊस का एक साथ दो लडके के साथ चक्कर चालू था. "
" एक लड़का बिल्डिंग के मुकादम का लड़का था. ऊस का नाम बाबू था. वही पूरी तरह से सड़े हुए आम जैसा था. ज्योत्सना ऊस की बातों में आ गई थी.. वह एक नंबर का आवारा बदचलन लड़का था. पढ़ाई लिखाई में कुछ नहीं था, पूरा दिन बड़े गुंडे मवालियो के संग घुमा करता था. "
" ऊस ने ज्योत्सना को अपनी जाल में फंसाया था. वह बिंदास्त लोगो को कहता फिरता था.. मैं ज़ब चाहूं तब ज्योत्सना को प्रेग्नेंट कर सकता हूं. "
" दूसरी और एक लड़का था, जिस का नाम संजय था. वह अच्छे घर का लड़का था. वह परिवार का चौथा लड़का था. ऊस के तीन भाइयो ने दादू की बिरादरी की लड़कियो से शादी की थी .
" दादू ऊस परिवार को अच्छी तरह पहचानता था.. ऊस के घर में सब लोग उन्हें पहचानते थे. दादू ने ऊस के लिये अपनी सासु मा को सिफारिश की थी. "
" उसके एक रिश्ते दार ने वापी का लड़का बताया था. परिवार सुखी समृद्ध था. पैसों की कोई तंगी नहीं थी. तुरंत ही यह रिश्ता तैयार हो गया था. लड़का बाबू का दोस्त था. ऊस के बारे में बाबू सब कुछ जानता था फिर भी सब को अँधेरे में रखकर ज्योत्सना को उंडे कुए में फेंक दिया था.. ज्योत्सना की ऊस लड़की से शादी हो गई थी. "
" शादी के दो तीन लडके ने ज्योत्सना के साथ किसी ना किसी सोना टाल दिया था. वह रात को ज्योत्सना को छोड़कर बहन के पति के साथ सोता था. उसे स्त्री में कोई दिलचस्पी नहीं थी. यह बात तो खुद लडके के माता पिता भी नहीं जानते थे. बाबू यह जानता था फिर भी ज्योत्सना की शादी ऊस दोस्त के साथ करवाई थी. "
" खुद हप्ते में चार दिन वापी जाकर ऊस के घर में रहता था. और ज्योत्सना के साथ सोता था. ऊस से वह प्रेग्नेंट हुई थी. सच्चाई बाद में बाहर आई थी. लड़के के माता पिता को घर का वारिस चाहिये था. तो स्थिति से समजोता कर लिया था. "
" बाबू की नजर ज्योत्सना के ससुराल की मिल्कत पर थी. वह इस जिंदगी से ऊब गई थी. ऊस स्थिति में बाबू ने उसे दूसरी शादी करवाने का वादा किया था.. वह घर छोड़ना चाहती थी. उसे बच्चे में कोई दिलचस्पी नहीं थी. इस स्थिति में बाबू उसे लेकर भाग गया था और खूब पैसों के बदले में उसे वेश्या दलालो के हाथों बेच दिया था. "
वह कहाँ थी, क्या करती थी? किसी को कुछ पता नहीं था. एक दिन दादू को वह चर्नी रोड स्टेशन के ओवर हेड ब्रिज पर मिल गई थी. वह आते जाते लोगो को एक भिखारीन की तरह सवाल करती थी. "
" चलना हैं साब? "
" वह देह का सौदा करती थी. यह देखकर दादू को चकमा लगा था. उन्होंने अपनी सासु को अपनी बेटी के बारे में बताया था. वही ज्योत्सना को घर में रखने को तैयार नहीं थे. "
" ऊस को बिगाड़ने में एक मा का ही हाथ था फिर भी ऊस के लिये उन्होंने दादू को दोषित ठहराया था. अब उन की सोच का भी क्या करना? "
" ऊस ने दादू को अपने ससुराल और अपने बच्चे के बारे में बताया था. दादू उसे समजाकर उसे अपने ससुराल ले गये थे. उन्होंने बिना कुछ कहे ज्योत्सना को अपना लिया था और अपनी गलती के बारे में ज्योत्सना की माफ़ी मांगी थी. उन्होंने ने दादू को कहां था. "
" आप की साली हमारे घर की बहू नहीं बेटी हैं. हम उसी तरह ऊस का ख्याल रखेंगे. अगर मौका मिला तो अपनी बेटी की तरह उसे बिदा कर देंगे. "
" और भगवान ने उन का साथ दिया था. शादी कर के वह अपने बच्चे को लेकर चली जायेगी इस डर से उन्होंने ज्योत्सना के लिये घर जमाई ढूंढ लिया था और उसे अपना बेटा समजकर अपना कारोबार ऊस के हाथों में सौंप दिया था. "
" एक साल बाद ज्योत्सना ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया था. "
" और ऊस की जिंदगी पटरी पर चढ़ गई थी. ऊस ने अपने बहनोई का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया था. "
"सालो बीत गये थे. दोनों लडके जवान हो गये थे. दोनों ने अच्छी पढ़ाई की थी. और शादी की. घड़ी भी नजदीक आ गई थी. ऊस के अपने बेटे सागर की शादी तय हुई थी. दादू सह परिवार उसकी शादी में शामिल हुए थे. वहाँ उन की मुलाक़ात एक लड़की से हुई थी. जो सागर के साथ ऊस के दफ्तर में मददनीश की हैसियत से काम करती थी. दोनों में अच्छी दोस्ती थी. वह अगले दिन ही शादी के लिये हाजिर हो गई थी."
" ऊस का नाम बिभूति था. ऊस के साथ बहुत बातें हुई थी. ऊस की दादू के परिवार के सभी सदस्यों से बात हुई थी. कुछ ही पलो में ऊस ने सब का दिल जीत लिया था. "
" और ऊस ने दादू को प्रतिष्ठित ' बड़े पापा' का रुतबा दिया था. "
" यह दादू के लिये ईश्वर का साब से बड़ा उपहार था. ऊस ने दादू को एहसास दिलाया था, दूर रहने के बाद ना मिलने के बाद रिश्ते जिवंत रखे जा सकते हैं. "
" ऊस की कुछ बातें दादू के दिल में अंकित हो गई थी."
" बड़े पापा! आप का वारिस आ गया हैं. मेरा छोटू आप को दादू कहकर बुलायेगा. "
" वही ज़ब बिभूति को छोड़ने गये थे ऊस दिन की यादें वही कभी नहीं भुला सके थे. "
" इतना दूर रहते हुए ऊस ने दादू को अपनी शादी में आमंत्रित किया था. "
" ऊस की एक बात बह कभी भुला नहीं पाये थे. ' बड़े पापा! मैं बहुत खुशकिस्मत हूं मुझे दो पापा का प्यार मिला है. "
" यह सब जानकर मेरा दिल खुशी से झूम उठा था.
00000000000 (क्रमशः )