शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (55) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (55)

                शहद 

            

               शहद की गुड़िया - प्रकरण 55

          " दादू एक दिन मेरे लिये मीठे आम लाये थे. और अपने हाथों से मुझे खिलाया था. "

           " आर्यन और मैं कोलेज की लाइब्रेरी में मिले थे. 13-14 की उम्र तो बस वो होर्मोनल बदलाव होता हैं मैंने 16 साल की उम्र में आर्यन को यह सोचकर छोड़ दिया था. लेकिन दादू ने मुझे समजाया था की मैं खुद गलत थी.. प्रेम की राह में कैसे किसी का दिल जितना वह एक बडी कला होती हैं जिस से मैं अंजान थी. इसी वजह से मैंने खो दिया था. शायद उसी वजह से मैंने काफ़ी लड़कों को खो दिया था. "

           " मैं कबूल करती हूं ऊस वक़्त मुझ में भी हिम्मत की कमी थी. ऊस की गहराई  पाठको को बताना आवश्यक हैं."

           " दादू की बातो ने सब कुछ समजाया अपनी सालियों के व्यवहार के बारे में भी बताया था. "

            " शादी के दादू और उन की पहली साली रात को एक साथ बैठकर पढ़ाई करते थे. ऊस वक़्त दादू एक अहम बात भूल गये थे. "

              " ऐसा कहां जाता हैं सगे बाप बेटी को भी अकेले साथ नहीं रहना  चाहिये. "

            " और साथ पढ़ने को तैयार हो गये थे. उन्हें कामशत्रु की ताकत के बारे में अंदाज नहीं था. "

            " उन्होंने अपनी साली की गोद में सर रख लिया था. ऊस पर मालिनी ने पूछा था. "

            " जीजू! नीद आती हैं? "

            " दादू ने हकार में जवाब दिया. साली ने कोई एतराज नहीं व्यक्त किया था तो उन्हें आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला था. और उन्होंने सर उठाकर ऊस की छाती पर रख दिया था. मालिनी को अच्छा लगा था. फिर भी ऊस ने जूठा दिखावा किया था. हकीकत में उसे अच्छा लगा था. फिर भी बडी बहन क्या सोंचेगी कहकर अपने आप को निर्दोष बताने की कोशिश की थी."

             " रोज दोनों साथ पढ़ते थे और दोनों के बीच कुछ ना कुछ होता था, फिर भी मालिनी ने अपने जीजू के साथ पढ़ना बंद नहीं किया था. "

               " एक बार दादू ने मालिनी को अपने बाहुपाश में कैद कर के ऊस के कंधो पर सर रख लिया था.. मालिनी कुछ नहीं बोली तो काम शत्रु ने अपना जलवा दिखाया. और दादू ने उसे जमीन पर सुलाकर आगे बढ़ने की कोशिश की ऊस वक़्त उन का जमीर जाग उठा. उन्होंने ने मालिनी को छोड़कर गुजारिश की :"

                " प्लीज! किसी को नहीं बताना. "

              " दादू की तीसरी नंबर की साली भी मालिनी से दो कदम आगे थी. वही दादू के पीछे दिवानी थी. मानो उन्हें प्रेम करती थी! "

                " एक बार वह अपनी नानी के साथ दादू के घर आई थी. रात को नौ बजे दादू खाना खाकर बिस्तर में थोड़ा आराम कर रहे थे. ऊस का नाम ज्योत्सना नाम था. वही जाकर दादू के बाजु में सो गई थी. यह देखकर दादू चकित रह गये थे. नानी भी भड़क गये थे. उन्होंने हाथ पकडकर बिस्तर से नीचे उतारा था, और बुरी तरह डांटा था. ऊस वक़्त ऊस की दलील सुनकर दादू को भी गुस्सा आया था. "

            " घर में जगह नहीं तो कहाँ सोउ? "

            " अपनी दीदी का घर था वही चटाई लेकर जमीन पर सो सकती थी. "                 " ऊस के ऐसे व्यवहार ने उन्हें कुछ गलत करने को उकसाया था ऊस वक़्त ज्योत्सना ने कोई विरोध या नाराजगी प्रगट नहीं की थी. "

              " मालिनी का प्यार चरम सीमा को छू गया था.. वही प्रेग्नेंट हुई थी तब दादू ने जोखिम उठाकर मुसीबत से उसे उगारा था. फिर भी किसी को कोई कद्र नहीं थी."

              " दादू ने शब्दश सब कुछ मुझे बयान किया था.

              " ऊस रात की ख़ामोशी में ज़ब दादू की उंगलियां मालिनी की नाजुक त्वचा से टकराई थी. तो वह अंदर से सिहर उठी थी लेकिन यह उसे अच्छा लगा था. "

               " कमरे में मौजूद लोगो की वजह से वही चोरी छिपी वाली घटना और नशीली हो गई थी.

               " दादू ने उन सन्नाटे में अपना हक जमाया था. तो मालिनी की ख़ामोशी ने सब कुछ कर लिया था, आगे जाकर ज्योत्सना ने भी उसे स्वीकार लिया था. और यह तीन लोगो के बीच एक राज बन गया था. "

              " दादू! ऊस रात की गर्मी और वह डर कितना नशीला कोम्बो था ज़ब उन्होंने ज्योत्सना के कपड़े में हाथ डाला था और वह उसे इन्जॉय कर रही थी. उसे कोई अफ़सोस नहीं था. "

             " दादू की पकड ने ज्योत्सना को पूरी तरह अपने वश कर लिया था. ऊस के बाद क्या होता हैं, क्या हुआ था यह एक बहुत बड़ा सवाल था.. "

             " दादू ने खुद कबूल कर लिया था. वह अपना आपा खो बैठे थे. "

             " ज़ब दादू का हाथ कपड़ो की अंदर गया तो ज्योत्सना के कोई आवाज की थी. "

             " ऊस सन्नाटे में ऊस की साँसे तेज हो गई थी. दोनों सालियों का एक सारिखा अनुभव हुआ था. "

             " मालिनी एक नाजायज संतान थी. ऊस के चेहरा यह बात का ढिंढोरा पीटता था. "

             " ऊस के साथ दादू ने बगल में पत्नी होते ही भी दुर्व्यवहार किया था, इतना नहीं ज्योत्सना के पति की मौजूदगी में ऊस को छोड़ा नहीं था. "

             " सालियों की बेबाकी ने कहानी के माहौल को गन्दा किया था, लेकिन यह एक बहुत बडी सच्चाई थी. लोगो को हकीकत से अवगत करना एक लेखक का निजी कर्तव्य हैं. "

              " इतना कुछ हो जाने के बाद भी उन्हें कोई फ़िक्र, दर्द नहीं था. मा को देखकर वह दोनों सच्चाई और जूठापन में फर्क करना भूल गये थे. "

              " दादू ने मुझे एक और राज बताया था. मालिनी सचमुच पहुंची हुई माया थी. एक लडके से प्यार का दावा करने के बावजूद, वह एक शादी सुदा लड़के के साथ ऊस का चक्कर चालू था. "

              " ऊस की सगाई होते ही दोनों पति पत्नी से भी अधिक व्यवहार करने लगे थे. और वह प्रेग्नेंट हो गई थी और शादी के बाद सात महिनो में एक लड़की को जन्म दिया था. ".


                       0000000000  ( क्रमशः)