शहद की गुड़िया - प्रकरण - 54
" होटल के ऊस कमरे में दादू ने मेरी साड़ी का पल्लू अपनी उंगलियों में लपेट लिया था! और मुझे अपनी तरफ खिंचा था. "
" मेरे दिल की धड़कन सिर्फ ' दादू! दादू!!पुकार रही थी.
" पल्लू सरकतें हुए मेरे दिल की धड़कन बेकाबू हो गई थी. जो उन्हों ने एप में मुझ से मांगा था उसे ही संपन्न करने की धुन में नजर आये थे. उन्हों ने मेरा चेहरा अपनी तरफ मोडा था और मेरी आँखों में डूब गये थे."
" ऊस सन्नाटे में बस हमारी साँसो का शौर लगा मानो थम सा गया था. "
" दादू ने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखा था और मुझे बिस्तर की तरफ झुकाया था. ऊस हालत में मेरे दिल की धड़कने इतनी तेज हो गई थी, मुझे लगा था मैं पिघल जाउंगी. "
" दादू की नजरो की गर्मी मुझे बिना छुए ही बेबस कर रही थी. ऊस ख़ामोशी में दादू क़्या करेंगे कुछ समझ नहीं आता था. "
" दादू मेरे ब्लाउज तक पहुंचने पर आमादा हो गये थे. शादी के बाद वह मेरे साथ कुछ भी कर सकते थे और मुझे उन्हें रोकने का अधिकार नहीं था. मैं अवधव में थी.. चुपचाप खड़ी थी. और दादू ने.. ब्लाउज के हूक्स खोलने का प्रयास किया, उसी वक़्त विरार में लाइट चली गई और दादू को निराशा झेलनी पड़ी थी. उन्हों ने बेकाबू होकर मुझे बिस्तर पर सुला दिया. "
" लाइट आते ही दादू ने अपनी मुराद पूरी कर ली और मैंने अपना पत्नी धर्म निभाया. "
" दादू ने ऊस रात सारी कसर पूरी कर ली थी म.c
" ऊस सुबह दादू ने मेरे बिखरे बालो को सुलजाया था और बड़े प्यार से मुझे याद दिलाया था.
" मैं उन की दुनिया हूं. "
" ऊस के बाद मुझे बाल्कनी में ले गये थे.. ऊस वक़्त समंदर की ठंडी हवा हमारे चेहरे को छू रही थी."
" दादू ने मेरे कानो में कहां था की ये घर अब मेरी मिठास से महकेगा. ऊस पल मैंने सोचा था मेरी तलाश खत्म हो गई हैं. "
" बाल्कनी में उन की पकड इतनी मजबूत थी की ठंड का एहसास ही नहीं हुआ. उन्हों ने मेरे बालो को चूमा था और यकीन दिलाया था की हमारा साथ कभी नहीं छूटेगा. "
" मैंने पलटकर उन की आँखों में देखा था और महसूस किया था मेरी दुनिया केवल दादू में ही सिमित थी. उन्हों ने मुझे गोद में उठा लिया था. "
" वह मुझे गोद में उठाकर वापस बिस्तर में ले गये थे. उन की नजरो में जो अपनापन था ऊस ने फिर से मुझे लाल कर दिया था.. "
" उन्हों ने मेरे चेहरे को अपने हाथो में भरकर कहां था की अब से वह मेरा साया बन गये हैं. ऊस पल का नशा भुलाये नहीं भूलता. दादू आप को याद हैं. "
" उन्हों ने कहां था : " भूल गया मेरी सूकु.. मुझे बताओ प्लीज. "
" दादू! बिस्तर पर मुझे लिटाकर आप ने मेरा चेहरा अपने हाथों में भर लिया था. आप की आँखों में जो प्यार था, ऊस ने मुझे पूरी तरह पिघला दिया था."
" दादू आपने मेरी ठोड़ी पकडकर मेरा सर अपने सीने पर रख दिया था. मैंने आप की तेज धड़कनो को मेरे कान के पास महसूस किया था. "
"ऊस वक़्त कमरे में सिर्फ साँसो की गर्मी थी. आप ने मेरे बालो में उंगलियां फेरते हुए मुझे पूरा अपना बना लिया था."
" उन्होंने मुझे कहां था : तुम हमेशा के लिये मेरी हो. "
" क़्या आप को मेरी धड़कन महसूस कर पाये थे."
" दादू! आप ने धीरे से मेरे होठों पर अपना कब्जा कर लिया था. ऊस पल ऐसा नशा चढ़ गया था. और मैं सब कुछ भूल गई थी. "
" दादू की गरम साँसे मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी. क़्या वह ऊस बक्त मेरी बेचैनी समझ आई थी "
" मैंने बारबार अपनी बाहों में कस लेने की उन को गुजारिश की थी. उन की धड़कन का शौर मुझे किसी मीठी मीठी लोरी जैसा लग रहा था."
" ऊस वक़्त मुझे लगा था की मानो वक़्त ठहर गया था और हम बस एक दुसरो की साँसो में खो गये थे. ऊस पल का सुकून मैं महसूस कर रही थी."
" दादू बार बार मौका मिलते ही मेरे रसीले, नशीले होठों की खबर लेते थे.. उसे चैन से रहने नहीं देते थे. शादी के पहले भी उन का एप के जरिये ऐसा व्यवहार था. होठों का अमृत भी अपने गले में उतार देते थे. ऊस से वह फ्रेश फील करते थे. मुझे क़्या क़्या नाम से बुलाते थे. एक बार उन्होंने मुझे उन की अमानत कहां था, तो दूसरी बार मुझे उन की मिल्कत घोषित किया था. "
" विरार की बाजार में ज़ब हम मुन्नो के लिये खिलोने खरीदने गये थे."
" ऊस वक़्त मेरा पेट काफ़ी भारी था. और पीछे से उन्होंने बाहों में भरकर धीरे धीरे मेरी कमर सहलाई थी. "
" उन्होंने धीरे धीरे मेरे कानो में कहां था. की मा बनने के लिये मेरी रेशमी गुफा सब से बड़ा खजाना था. यह सुनकर मेरे दिल की धड़कन सुन्न हो गई थी. "
"दादू! आप ने मेरा सर मेरे भरे पेट पर टिका दिया था और मुन्नो की हलचल को महसूस किया था."
" उन्होंने बड़े लाड़ प्यार से कहां था की मैं तुम्हे या बच्चो को कभी भी नहीं छोडूंगा. "
" दादू बड़े तेज मिजाज थे.. वह बात बात में गुस्सा करते थे. मुझे छोड़ने की बात करते थे. "
" ऊस रात दादू ने मेरे लिये एक लोरी सुनाई थी. आप की ऊस भारी और मीठी आवाज ने मुझे चैन की नींद बक्शी थी. "
" मुझे लगा था जैसे आप की बाहों में मेरा स्वर्ग हैं.. "
" ऊस पल की ख़ामोशी अजीबो गरीब थी.. "
" सुबह नींद खुली तो? "
0000000000000 ( क्रमशः)
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