शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (50) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • Muhabbat Ek Sabaq - 17

    "ठीक है प्रॉमिस नही बताउंगी किसी को भी ,आप बताएं तो बात क्या...

  • अनाथ - अध्याय 5

    सुबह की पहली किरणें अभी जंगल की ऊँची पहाड़ियों पर पड़नी शुरू...

  • आत्मीय सुख

    ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भ...

  • मंदिर में तुम - 10

    कुछ दिनों बाद…सब कुछ शांत हो चुका था…खतरा खत्म…डर खत्म…अब…सि...

  • प्रकृति के चमत्कार

    प्रकृति के चमत्कार(लगभग 2000 शब्दों की प्रेरणादायक हिन्दी कह...

श्रेणी
शेयर करे

शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (50)

              

                   शहद की गुड़िया - प्रकरण 50

         " दादू ने उसे आशीर्वाद देकर बिदा किया था और गाड़ी चल पड़ी थी. वह मायूस होकर वहाँ से दादर आये थे. 40 घंटो की यात्रा थी. ऊस दौरान दादू ने हर दूसरे घंटे बिभूति का हालचाल पूछा था."

          " ऊस को गाड़ी में दो वरिष्ठ नागरिक मिल गये थे जिस की वजह से सफर आराम से कट गया था. "

           " वह सलामत घर पहुंच गई थी. यह सुनकर दादू को शांति मिलीथी. "

            " कुछ ही दिनों में ऊस ने दादू को बताया था. "

            " मेरी सगाई हो गई हैँ. "

            " सुनकर दादू खुशी से झूम उठे थे. और G pay के जरिये कुछ राशि सुकन के तौर पे भिजवाई थी. "

             " उसे पाकर बिभूति ने दादू को टोका था. " बड़े पापा इस की क़्या जरूरत थी? आप का प्यार ही मेरे लिये सब कुछ हैँ. "

             " तब दादू ने कहां था. बेटी के लिये तो बहुत कुछ करना होता हैँ, मैंने तो कुछ भी नहीं किया. और हम दोनों के बीच इतनी दुरी हैं की मैं चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाता हूं. "

             " तीन महिने के बाद ऊस की शादी सम्पन्न हुई थी. ऊस ने बड़े पापा के समग्र परिवार को निमंत्रीत किया था. लेकिन ऊस के लिये आर्थिक परिस्थिति ने बाधा डाली थी. उन्होंने ने मन मना लिया था. और वॉट्सअप के जरिये नये दंपती को आशीर्वाद दिये थे. "

            " दो साल के बाद बिभूति ने एक बच्चे को जन्म दिया था. वह जानती थी बेटा होते हुए भी बड़े बापा का कोई वारिस नहीं था. तब ऊस ने कहां था. "

              " बड़े पापा! मेरा छोटू आप का वारिस हैँ.. वह आप को हमेशा दादू कहकर बुलायेगा. "

            " बिभूति की बात ने दादू का मन मोह लिया था. देखे बिना, मिले बिना ऊस ने जो रिश्ता बनाया था वह अपने आप में एक मिशाल था. "

            " दादू ने अपने इस रिश्ते के बारों में तीनो गुड़िया को बताया था. ऊस के पहले सब कुछ ठीक था. तीनो गुड़िया उन का बराबर  ख्याल रखती थी. "

              " दादू का जन्म दिन भी उन्होंने बड़े उत्साह के साथ मनाया था. वह लोगो ने डांस किया था. हेप्पी बर्थडे का गाना भी गाया था. "

                " एक बार दादू ने पिकनिक का भी आयोजन किया था. ऊस में तीनो गुड़िया ने अंताक्षरी में भाग लिया था और पिकनिक में जाना भर दी थी. "

             " दादू कहने का प्रपोज़ल गुड्डी ने रखा था. वह उन्हें बहुत मानती थी. "

             " उन दिनों दादू ने स्नेहा के प्रति लगाव होने की बात भी की थी."

             " गुड्डी उन्हें बहुत मानती थी, गुड्डु का भी ऐसा ही था. एक बार दादू चलकर ओफिस को aa रहे थे. ऊस वक़्त गुड्डी रिक्शा में सवार थी. दादू को देखकर वह रिक्शा से उतर गई थी. और उन के साथ चलकर ओफिस गई थी. "

            " दूसरी बार सुबह में दादू ओफिस पहुंचे थे. तब गुड्डी आ गई थी. वह केबिन का दरवाजा बंद कर के अंदर बैठी थी. दादू ने केबिन को नौक किया था. तो ऊस ने आधा दरवाजा खोलकर सवाल किया था. "

           " आप को किस का काम हैँ? "

           " दादू ने अपना नाम बताया था. "

           " ऊस पर गुड्डी ने कहां था. "

            " यहाँ ऐसा कोई नहीं हैँ. "

            " कहकर ऊस ने दरवाजा बंद करने की कोशिश की थी तो दादू ने उसे रोककर ऊस का नाक पकड़ लिया था. "

            " लेकिन बाद में यकायक क़्या हो गया था?                " गुड्डी उन से रूठ गई थी. साथ में गुड्डु और गुड़िया भी उन से नाराज हो गई थी. "

             " वह तीनो दादू से दूर हो गई थी. ऊस के लिये उन का बिभूति और स्नेहा से इन्वॉल्वमेंट निमित्त बना था. "

              " उन को जलन हुई थी. दादू एक लेखक थे उन्होंने ने कई अच्छी लड़की को अपनी कहानी के टाइटल कवर चुना था. वह देखकर उन्हों ने दादू के बारे में गलत फहमी पैदा कर ली थी. "

              " और वह अलग हो गये थे. ऊस के लिये दादू उन के घर घरेलु चीज बेचने गये थे ऊस बात से भी नाराजगी हुई थी. "

              " ऊस से एक बात साबित हुई थी.. दोनों ने गंभीरता से दादू का ख़िताब नहीं दिया था, ऊस में बचपना था. किसी इंपल्स को ताबे होकर उन्हों ने दादू कहना शुरू किया था. "

             " और यह रिश्ता बिखर गया था. दादू को बहुत दुख हुआ था. ऊस वक़्त उन्हें बिभूति के रिश्ते का साथ था . वह दादू को बहुत मानती थी. "

             " ऊस का प्यार सो फी सदी सही था. वही दादू की सब से बढ़कर थी. ".

              " शादी के दूसरे साल ऊस के पिताजी का स्वर्ग वास हो गया था. इस बात से बिभूति बिल्कुल टूट गई थी. ऊस वक़्त ऊस का बच्चा पेट में था. ऊस ने यह खबर दादू को सुनाई थी. और कहां था बड़े पापा अब आप ही मेरे डैडी हो. "

             " नियत समय पर बिभूति ने उन्हें खबर सुनाते हुए कहां था. " बड़े पापा मेरी कोख से आप के छोटू ने जन्म लिया हैँ वह आप का वारिस हैँ. "

             " बिभूति के इन शब्दों ने दादू को मालामाल कर दिया था. वह तो उड़कर गौहाटी जाने को तैयार हो गये थे लेकिन लाचार, विवश होकर बैठ गये थे. "

             " बिभूति ने छोटू का फोटो व्हाट्सप्प पर भेजा था. दादू ने अपने पोते के लिये कीमती तोहफा कुरियर के जरिये भिजवाया था. "

             " जिसे देखकर बिभूति ने धन्यता का अनुभव किया था.. "

                     000000000000    ( क्रमशः)