शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (49) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (49)

 

           

                   शहद की गुड़िया - प्रकरण 49

       " ऊस लडके का नाम सुधीर था. ऊस ने दादू को कहां था ::

         " संभव भाई आज से आप मेरी ओफिस में बैठकर आप का सब काम कर सकते हो, यहाँ हर कोई चीज का इस्तेमाल कर सकते हो. "

          " दादू को ऊस लडके में भगवान का दर्शन हुआ था. उन्होंने दिल से सुधीर को दुवा ये दी थी. "

           " वहाँ तीन हम उम्र लड़किया काम करती थी. और उन के आलावा एक बड़ी लड़की भी काम करती थी, जिस की शादी भी हो गई थी. "

            " उन तीनो लड़कियों को दादू से लगाव हो. गया था. वह तीनो हकीकत ने उन्हें दादू नाम से बुलाती थी.. "

             " उन तीनो का नाम क्रमशः कोमल, कामिनी और कुसुम था. वह तीनो दादू से बड़ा प्यार करती थी.. दादू भी तीनो को  गुड्डी, गुड्डु और गुड़िया नाम से बुलाते थे. "

             " दादू को उन के साथ में अपनापन होता था. उन का यह व्यवहार वह शादी सुदा लड़की को खटकता था. वह उन तीनो को रोकती थी. लेकिन वह तीनो मस्ती खोर थी अपने आप में मशगुल थी. "

             " एक साथ तीन गुड़िया के प्यार ने दादू का दिल खुसी से भर दिया था. "

             " तीनो अपनी जगह एक से बढ़कर एक थी."

              " कोमल तीनो में बड़ी थी दादू उसे गुड्डी कहते थे. वह सदा मोबाईल से ही जुडी रहती थी. लोगो को मेसेज करती रहती थी, दादू भी उसे मेसेज भेजते थे. वह दादू को खूब मानती थी. "

             " कामिनी को वह गुड्डु कहते थे. वह सब से ज्यादा दादू से धूल मिल गई थी. उन्होंने मांगकर गुड्डु का बचपन का फोटो अपने मोबाइल में रखा था, साथ में ऊस का ताज़ा फोटो भी मोबाइल में सेव किया था. यह जानकर उसे बुरा लगा था. ऊस ने दादू के मोबाइल से वह फोटो निकाल दिया था और कहां था. "

             " आप मेरी फोटो अपने मोबाइल में नहीं रख सकते हो. "

              " दादू ने ऊस की बात मानी थी और ऊस की माफ़ी भी मांगी थी. "

               " दादू उन तीनो से पारिवारिक रिश्ता स्थापित करना चाहते थे. इस लिये उन्होंने तीनो को अपने घर में आमंत्रित किया था. तब उन्होंने कहां था. "

               "दादू! इस रिश्ते को ओफिस तक रहने दो. "

                " उन की बातों ने दादू को नाराज किया था. फिर भी वह कुछ नहीं बोल पाये थे. उन को समझाने का कोई मतलब नहीं था. "

                " दादू ऊस वक़्त घर घर जाकर घर में लगने वाले सामान बेचने जाते थे. इस सिलसिले में वह बारी से उन के घर गये थे. गुड़िया और गुड्डु को तो ऊस से कोई समस्या नहीं थी लेकिन गुड्डी ने उन्हें बहुत कुछ सुनाया था.. दादू को देखकर सब के मुंह फूल गये थे. "

               ऊस दौरान दादू की साली के बेटे की शादी हुई थी. दादू सह परिवार ऊस शादी में शामिल हुआ था. ऊस वक़्त समीर की ओफिस में काम करने वाली बिभूति से उन की पहचान हुई थी. दोनों के बीच बहुत बातचीत हुई थी. वह अकेली आई थी. उसे अकेली भेजना सही नहीं था.. दादू ने ऊस को रिक्शा में बिठाया था. "

              " एक ही मुलाक़ात में दोनों के बीच गजब का लगाव हो गया था, अपनापन का जज्बा जागा था. ऊस के जाते समय दादू ने मोबाइल नंबर की लेन देन की थी. एक सामूहिक फोटो भी क्लिक किया था. "

               " और वह दोनों वॉट्सअप के जरिये बातें करने लगे थे. "

                " दादू ने के बी सी के अमिताभ बच्चन की तरह सवाल किये थे. "

                 " एक पड़ोसी! "

.                " एक दोस्त!

                  " एक भाई! "

                  " एक बड़े पापा "

                   " तुम्हे कौन सा नाम पसंद हैं? "

                    " ऊस ने तुरंत ही बड़े उत्साह के साथ जवाब दिया था. " बड़े पापा "

              " सुनकर दादू को बड़ी खुशी हांसिल हुई थी. उन्होंने जैसा सोचा था वैसा ही जवाब बिभूति ने दिया था. "

               " ऊस दिन के बाद दोनों में नये रिश्ते की शुरुआत हुई थी. वह दादू को बड़े पापा कहकर बुलाती थी. और मानो दादू को स्वर्ग मिल गया था. "

            " दोनों मोबाईल पर बातें करते थे, एक दूसरे का हाल चल पूछते थे. बिभूति अपनी सारी बातें अपने बड़े पापा से बताती थी. दादू भी उसे अपनी हर एक बात बताते थे. दोनों की पसंद भी एक जैसी थी, जिस ने दोनों को काफ़ी नजदीक कर दिया था. "

            " वह चेम्बूर में अपनी बुआ के पास रहती थी. "

            " एक दिन ऊस ने बताया था. ' बड़े पापा मैं गौहाटी वापस जा रही हूं. "

             " सुनकर दादू ने सवाल किया था. क्यों? "

              " मेरे माता पिता ने मुझे वापस बुलाया हैं. ".  

               " क्यों? दादू ने सहज सवाल किया था. "

                " जिस के जवाब में बिभूति ने बताया था. मेरे माता पिता मुझे मिस करते हैँ और दूसरा वह लोग मेरे लिये लड़का ढूंढ रहे थे. "

                " बिभूति उन्हें छोड़कर जा रही थी, ऊस बात से दादू को दुख हुआ था. वैसे तो ऊस समय दोनों एक ही बार मिले थे लेकिन मानो दोनों सालो से एक दुसरो को जानते पहचानते थे ऐसा माहौल बन गया था."

           " दादू ने उसे सवाल किया था. कब जा रही हो?"

            " बस इस संडे को. दोपहर तीन बजे कुर्ला टर्मिनस के गाड़ी हैँ. "

             " कोई बात नहीं मैं तुम्हे छोड़ने आऊंगा.. "

              " बड़े पापा! इतना कष्ट क्यों उठा रहे हो? "

               " तब दादू ने बड़े उत्साह के साथ बताया था. " मैं तो मेरी गुड़िया को बिदा करने aa रहा हूं. मालूम नहीं हम लोग दोबारा कब मिल पायेंगे? "

               " रूबरू तो नहीं मिल पायेंगे लेकिन टेलीफ़ोन, वॉट्सअप और वीडियो कोल्स के जरिये जरूर मिलेंगे. "

                " लाख मना करने पर दादू उसे छोड़ने कुर्ला टर्मिनस पहुंच गये थे. रास्ते में ऊस के खाने के लिये बहुत कुछ ख़रीदा था.

                        000000000000  (क्रमशः )