शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (47) Ramesh Desai द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (47)

                    शहद की गुड़िया - प्रकरण 47

         " और नियत समय पर दादू म्यूझिका की सगाई में शामिल होने को निकल पड़े थे. "

          " सगाई में कुछ नोन वेज आइटम्स थी. दादू ने चिकन और मटन समोसे खाये थे. सगाई संपन्न होने के बाद दोनों को आशीर्वाद देने दादू स्टेज पर गये थे. उन्होंने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिये थे. गणेश को विशेष रूप से गले लगाया था और फोटोग्राफर ने दोनों का फोटो क्लिक किया था. ऊस समय गणेश ने बड़े भावुक होकर सवाल भी किया था. "

           " अंकल! आप ने खाना खाया कैसा लगा. हमारे यहाँ ज्यादा नोन वेज खाना होता हैं, fir भी आप जैसे लोगो के लिये वेज भोजन का प्रबंध किया हैं. "

          " गणेश! तुम ऊस के बारे में मत सोचो मैंने वेज खाना तो खाया हैं और साथ में नोन वेज का भी आस्वाद लिया हैं. " 

           " यह सुनकर म्यूजिका भी प्रभावित हो गई थी. ऊस ने अचरज व्यक्त क़र के दादू को बढ़ावा दिया था..,

           " पापा यु आर यूनिक, लाजवाब हो कौन सी भी परिस्थिति में एडजस्ट कर लेते हो. "

           " दादू ने बड़े प्यार से गणेश के कंधो को सहलाते हुए गुजारिश की थी.

            " म्यूजिका या ने संगीता मेरी बेटी हैं उसे फूलो की तरह संभालना. "

           " सुनकर गणेश भी भावुक हो गया था. ऊस ने दादू से हाथ मिलाकर वादा किया था. "

            " दादू के लिये यह प्रसंग अपनी खुद की बेटी से भी ज्यादा अहमियत रखता था. "

             " सगाई के बाद म्यूझिका एक हप्ते से ज्यादा दादू के साथ थी. ऊस दौरान उन का रिश्ता और भी मजबूत हो गया था. "

            " ऊस की शादी गांव में होने वाली थी. इस लिये किसी के लिये भी यह शादी में शामिल होना नामुमकिन था . म्यूझिका ने शादी में हाजिर होने के लिये बहुत जोर दिया था लेकिन विवश, लाचार थे.

            " जाने के आख़िरी दिन म्यूझिका ने एक पार्टी का आयोजन किया था. ऊस वक़्त दादू को याद आया था. एक बार म्यूझिका ने ऊस के सामने पिजा का नाम लिया था. वह पिजा खाना चाहती थी. लेकिन दादू ने उसे निराश किया था.. "

            " उन्होंने मोहन से पैसे लेकर पार्टी के मेनू में पिजा को शामिल किया था. यह देखकर म्यूझिका भावुक हो गई थी.

             " पार्टी के बाद शादी के कार्ड का बटवारा करना था  रिवाज़ के मुताबिक पहला कार्ड लड़की के पीता भगवान की छबि को अर्पण करते हैं. म्यूझिका ने यह जिम्मा अपने पापा को दिया था. "

            " और दादू ऊस के कंधो पर हाथ रखकर भगवान की छबि तक ले गये थे. "

              " म्यूजिका ने पहला कार्ड भगवान की छबि के सामने रखने की गुजारिश की थी. तब दादू ने उसे रोकते हुए कहां था. "

              "यह कार्ड खुद तुम भगवान की छबि के पास रखो. मैं अपने पिता के बदले यह कार्ड आप के चरणों में रखती हूं आप ऊस का स्वीकार करो. "

             " यह देखकर सब कोई दिंग हो गये थे. चाचा के लडके को भी अचरज हुआ था. "

           " म्यूझिका के लिये वह अंतिम दिन था. बाद में उसे मिलने का मौका कभी नहीं मिलेगा इस बात से दादू विचलित हुए थे. "

             " म्यूजिका ने झुककर दादू का चरण स्पर्श किया था, और उन्होंने उसे गले लगाकर आशीर्वाद दिये थे. "

              " उसी दिन दादू को नया जोब मिला था और उन्होंने चाचा की ओफिस छोड़ दी थी. "

              " वह सब को मिलकर ओफिस से बिदा हुए थे उन के कुछ दिन पहले म्यूजिका की जगह एक नई लड़की को काम पर रखा गया था. ऊस के साथ बातचीत का रिश्ता बन गया था. दादू रोज नई ओफिस में जाते हुए स्टेशन पर उतर जाते थे, जहाँ चाचा की ओफिस  थी. ऊस लड़की का नाम कविता था..वह भी उसी गाड़ी से उतरती थी.. और दादू उसे केडबरी देते थे. वह लड़की भी दादू को सन्मान देती थी.

              " कैडबरी के बहाने दो मिनिट रोज मिलते थे. ऊस से दादू को बड़ा शुकुन मिलता था. "

                " दूसरी ओफिस में दादू ज्यादा काम नहीं कर पाये थे. वहाँ भी उन्हें कुछ लड़कियो से लगाव हो गया था. वहाँ भी संगीता नाम की लड़की थी.. दादू ऊस से अच्छी तरह बात करते थे. "

                 " ऊस दौरान दादू ने अपना कंसल्टेंसी का काम किया था. उन्हें कुछ पार्टियों का काम मिलता था. दादू उन का ड्यूटी ड्रॉ बेक काम करते थे जिस के लिये 1% से 2% सर्विस चार्जिंस लेते थे.. एक्सपोर्ट्स में कुछ ऐसी प्रोडक्ट्स भी थी जिस के रेट्स फिक्स नहीं हुए थे. तो ऊस के लिये ब्रांड रेट्स फिक्स करने पड़ते थे. यह काम मिनिस्ट्री ओफ फाइनेंस, दिल्ली में होता था.. दादू की इस में मास्टरी थी.

            " ज्यादातर दादू डायस इंटरमीडिएटस प्रोडक्ट्स का काम करते थे. इस काम में दादू का भागीदार वह लड़का था जो माधुरी एक्सपोर्ट्स में काम करता था. ऊस की वजह से दादू को कुछ अच्छे क्लाइंट्स मिले थे जिस में अरुण प्रोडक्ट्स मुख्य थी. ऊस कंपनी का बड़ा काम दादू को मिला था. उन के कुछ पुराने केस थे. ऊस की रिकवरी के लिये कंपनी ने 25% सर्विस चार्जिंस दिये थे यह उन के लिये प्रतिष्ठित काम साबित हुआ था. "

            " दादू ने काफ़ी समय यह काम संभाला था. वह ज्यादा काम करते थे और 50% हिस्सा उन्हे भागीदार को देना पड़ता था जो दादू को परवडता नहीं था.. उन्होंने काम के लिये जोब छोड़ दिया था लेकिन वह लड़का जोब पकड़ कर बैठा था. वह दो घोड़े पर एक साथ सवारी करता था. दादू को यह बात पसंद नहीं थी. "

              " भागीदारी खंडित हो गई थी.. ऊस समय दादू के साथ दिल्ली का काम था जो ऊस लडके ने दिलाया था.. दादू ने उन के सारे काम निपटाये थे और 1% से 1.5% कमीशन चार्ज करते थे. "

              " लाल चांद ऊस कंपनी के मालिक थे. उन्होंने अपनी कंपनी में नया मुलाजिम नियुक्त किया था जो उन की बीवी का पड़ोसी था. ऊस ने दादू के धंधे पर छुरी चलाने की घृष्ठा की थी.

             " और? "

                  000000000000   ( क्रमशः )